अमेरिका और इजरायल से लंबी जंग क्यों चाहता है ईरान, किस फायदे के चलते बढ़ा हौसला
इजरायल ने ईरान के तेल डिपो को भी निशाना बनाया है। यहां तक कि वह दुनिया को तेल सप्लाई भी नहीं कर पा रहा है, जो उसकी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। फिर भी ईरान ने अब तक जंग रोकने की बात नहीं की है। ईरान के नेता अयातुल्लाह खामेनेई के बेटे मुजतबा बन गए हैं। वह भी पिता की तरह ही अपने इरादों पर अडिग हैं।
अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान अपने शीर्ष नेता अयातुल्लाह खामेनेई को खो चुका है। इस जंग में उसके लिए यह सबसे बड़ा झटका था। इसके अलावा तेहरान समेत आसपास के शहरों में लगातार हमले जारी हैं। इजरायल ने उसके तेल डिपो को भी निशाना बनाया है। यहां तक कि वह दुनिया को तेल सप्लाई भी नहीं कर पा रहा है, जो उसकी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। फिर भी ईरान ने अब तक जंग रोकने की बात नहीं की है। ईरान के नेता अयातुल्लाह खामेनेई के बेटे मुजतबा बन गए हैं। वह भी पिता की तरह ही अपने इरादों पर अडिग हैं।
यही नहीं ट्रंप ने जब मंगलवार को कहा कि अब जंग खत्म होने की तरफ है तो उन्होंने कहा कि इसका फैसला तो ईरान ही करेगा। अब अमेरिका ऐसा नहीं कर सकता कि जंग खत्म करने का ऐलान कर दे। जंग कब खत्म होगी। यह हम ही तय करेंगे। अब सवाल यह है कि यदि इतने भीषण हमलों का सामना ईरान कर रहा है तो भी वह जंग खत्म करने में दिलचस्पी क्यों नहीं ले रहा। इस संबंध में ईरान के सुप्रीम लीडर के विदेश मामलों के सलाहकार कमाल खराजी ने बात की है। उन्होंने कहा कि 10 दिनों की जंग में ईरान ने दिखा दिया है कि हम लंबी लड़ाई भी लड़ सकते हैं।
उनका कहना है कि हम इस जंग में अब कोई कूटनीतिक हल नहीं देखते। ऐसा इसलिए क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप जो वादे करते है, उन पर कभी अमल नहीं करते। उनका कोई भी वादा पूरा नहीं हुआ। आखिर जब बातचीत के लिए प्रयास करने की बात हो रही थी तो उसी बीच में हमले क्यों किए गए। यही नहीं उन्होंने ईरान की मंशा भी जाहिर कर दी। खराजी ने कहा कि अब तो यही संभव है कि दुनिया में ऐसी आर्थिक स्थितियां बन जाएं कि कई देश खुद ही अपील करें कि अब जंग रोक दी जाए। ऐसी स्थिति में अमेरिका और इजरायल को गारंटी देनी होगी कि वे ईरान पर हमले नहीं करेंगे। तभी यह जंग अब रुक सकती है।
भारत समेत कई देश जंग में उतरे बिना ही झेल रहे संकट
जानकार भी ऐसा ही मानते हैं। इसकी वजह यह है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने का सीधा असर भारत, पाकिस्तान, चीन समेत कई एशियाई देशों पर दिखने लगा है। पेट्रोल से लेकर गैस तक की किल्लत है। ऐसी स्थिति में ईरान के सामने यदि जंग की चुनौती है तो दूसरे देश बिना जंग में उतरे ही परेशानी झेल रहे हैं। फिर ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, बहरीन समेत कई सुन्नी मुस्लिम देशों पर सीधे हमले बोले हैं।
पड़ोसियों को ईरान ने बता दिया- अमेरिका नहीं ले सकता सुरक्षा की गारंटी
इससे भी उसने साबित करने की कोशिश की है कि यदि ईरान पर हमले हुए तो जंग की जद में उसके पड़ोसी देश भी आएंगे। अमेरिका उनकी सुरक्षा की गारंटी नहीं ले सकता। इसी कारण ईरान इस जंग से तत्काल पीछे हटने को तैयार नहीं है। उसे लगता है कि उसने अपने शीर्ष नेता को पहले ही दिन खो दिया है। ऐसी स्थिति में अब जंग लंबी चलने पर भी उसके पास खोने के लिए बहुत ज्यादा कुछ नहीं है।
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