ईरान-अमेरिका युद्ध में जॉर्जिया मेलोनी किसकी तरफ? इटली की पीएम ने खुद बताया
मेलोनी ने कहा कि ईरान संकट हाल के इतिहास के सबसे मुश्किल पलों में से एक था, और उन्होंने विपक्ष से इटली के हितों की रक्षा के लिए सरकार के साथ एकजुट होने को कहा। उन्होंने कहा कि इटली ने युद्ध से पहले मिलिट्री दखल को रोकने के लिए कतर और ओमान के साथ काम किया था।

ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई पर हमला करने के बाद अमेरिका और ईरान में युद्ध शुरू हो गया। मिडिल ईस्ट में हालात काफी खराब हैं, जिसका पूरी दुनिया पर असर पड़ रहा है। चीन, रूस जैसे देशों ने ईरान का खुलकर समर्थन किया है, जबकि इटली ने बताया है कि वह किसकी तरफ है। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा कि उनका देश ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमलों में हिस्सा नहीं लेगा और इसके बजाय एक डिप्लोमैटिक समाधान में मदद करना चाहता है। यानी कि मेलोनी ने साफ किया है कि वह बातचीत से युद्ध खत्म करवाना चाहती हैं।
मेलोनी ने बुधवार को सांसदों से कहा, "इटली ईरान में चल रहे युद्ध में हिस्सा नहीं ले रहा है और न ही लेगा, और कहा कि बढ़ता संघर्ष एक बड़े इंटरनेशनल लॉ के संकट का हिस्सा है।'' मेलोनी ने कहा कि ईरान संकट हाल के इतिहास के सबसे मुश्किल पलों में से एक था, और उन्होंने विपक्ष से इटली के हितों की रक्षा के लिए सरकार के साथ एकजुट होने को कहा। उन्होंने कहा कि इटली ने युद्ध से पहले मिलिट्री दखल को रोकने के लिए कतर और ओमान के साथ काम किया था। और उन्होंने कहा कि इटली ने तेहरान के साथ लंबे समय से रिश्ते खुले रखे हैं, पिछले साल दो राउंड की न्यूक्लियर बातचीत की मेजबानी की थी।
मेलोनी ने यह भी कहा कि युद्ध के कारण एनर्जी की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण सरकार उन कंपनियों पर कार्रवाई कर सकती है जो अंदाजा लगा रही हैं। उन्होंने बिना कोई डिटेल दिए दोहराया कि सरकार इसमें शामिल फर्मों पर और टैक्स लगाने के लिए तैयार है। वहीं, चीन ने खाड़ी देशों पर हमलों का विरोध करते हुए क्षेत्र में तनाव कम करने और शांति बहाल करने के लिए रचनात्मक भूमिका निभाने की बात कही है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने बुधवार को कहा कि चीन खाड़ी देशों पर हमलों का समर्थन नहीं करता है और नागरिकों तथा गैर-सैन्य लक्ष्यों पर होने वाले अंधाधुंध हमलों की निंदा करता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में सबसे बड़ी प्राथमिकता शत्रुता और संघर्ष को और फैलने से रोकना है। चीन संबंधित पक्षों के साथ सहयोग बढ़ाकर क्षेत्र में तनाव कम करने और शांति स्थापित करने के प्रयास जारी रखेगा। गौरतलब है कि क्षेत्र में तनाव 28 फरवरी को उस समय बढ़ गया था जब अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के कई ठिकानों, जिनमें तेहरान भी शामिल है, पर हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने इज़रायल और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इसी बीच होर्मुज़ जलडमरूमध्य मार्ग में भी तनाव बना हुआ है। दुबई से लगभग 50 समुद्री मील उत्तर-पश्चिम में बुधवार को एक मालवाहक जहाज पर प्रक्षेपास्त्र से हमला किया गया, जिससे वह इस क्षेत्र में हाल के दिनों में निशाना बनाए गए तीसरे जहाज के रूप में सामने आया। ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) के अनुसार जहाज के चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं और किसी पर्यावरणीय क्षति की सूचना नहीं है।
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