'सिर्फ दिल्ली में ही 200 टीवी चैनल...', नॉर्वे की पत्रकार से भिड़े भारत के विदेश सचिव
भारतीय विदेश मंत्रालय के सचिव सिबी जॉर्ज ने प्रेस की आजादी पर सवाल उठाने वाले विदेशी पत्रकार को करारा जवाब दिया है। उन्होंने अज्ञानी एनजीओ की रिपोर्ट्स पर निशाना साधते हुए भारत के विशाल मीडिया इकोसिस्टम और लोकतंत्र की ताकत गिनाई।

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने नॉर्वे के प्रेस और वहां के पत्रकारों को प्रेस की स्वतंत्रता के मुद्दे पर कड़ा जवाब दिया है। मंत्रालय का स्पष्ट कहना है कि बहुत से विदेशी लोग "अज्ञानी एनजीओ" द्वारा प्रकाशित भ्रामक रिपोर्ट्स को पढ़कर भारत के बारे में गलत धारणा बना लेते हैं और उन्हें भारत की विशालता का कोई अंदाजा नहीं है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुई तीखी बहस
नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज की नॉर्वे की एक पत्रकार हेले लिंग (Helle Lyng) के साथ तीखी बहस हुई। जब उनसे प्रेस की आजादी को लेकर सवाल किया गया, तो सिबी जॉर्ज ने भारत के विशाल मीडिया इकोसिस्टम की ताकत और उसकी पहुंच को गिनाते हुए करारा जवाब दिया।
"सिर्फ दिल्ली में ही 200 टीवी चैनल हैं"
सिबी जॉर्ज ने नॉर्वे के पत्रकार को जवाब देते हुए कहा, "क्या आपको पता है कि हमारे यहां कितनी खबरें छपती हैं? हमारे यहां हर दिन शाम को कितनी ब्रेकिंग न्यूज आती हैं। सिर्फ दिल्ली में ही अंग्रेजी, हिंदी और अन्य कई भाषाओं में कम से कम 200 टीवी चैनल मौजूद हैं। लोगों को भारत के इतने बड़े पैमाने की कोई समझ ही नहीं है।"
एनजीओ की भ्रामक रिपोर्ट्स पर साधा निशाना
विदेशी रिपोर्ट्स की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए और उनकी आलोचना करते हुए विदेश मंत्रालय के सचिव ने कहा, "लोगों में समझ की कमी है। वे किसी अनजान और अज्ञानी एनजीओ द्वारा प्रकाशित एक या दो खबरों को पढ़ लेते हैं और फिर आकर इस तरह के सवाल पूछते हैं।"
संविधान, महिला अधिकार और मानवाधिकारों का दिया हवाला
सिबी जॉर्ज ने भारत के संविधान और नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, "हमारे पास एक ऐसा संविधान है जो देश के लोगों के मौलिक अधिकारों की पूरी गारंटी देता है। देश में महिलाओं को भी समान अधिकार प्राप्त हैं, जो कि एक बेहद महत्वपूर्ण बात है।"
"हमें अपने लोकतंत्र पर गर्व है"
भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों को रेखांकित करते हुए उन्होंने आगे कहा, "1947 में ही हमने अपनी महिलाओं को वोट देने का अधिकार दे दिया था। हमने एक साथ मिलकर आजादी हासिल की। मुझे ऐसे कई देशों के बारे में पता है, जहां भारत के कई दशकों बाद महिलाओं को वोटिंग का अधिकार मिला। हम समानता और मानवाधिकारों में विश्वास करते हैं। मानवाधिकार का इससे बेहतरीन उदाहरण क्या हो सकता है कि लोगों को अपनी सरकार बदलने और वोट देने का अधिकार हो। भारत में ठीक ऐसा ही हो रहा है और हमें इस बात पर बहुत गर्व है।"
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