what happened in donald trump secret room meeting could not reach last deal with iran डोनाल्ड ट्रंप की सीक्रेट रूम मीटिंग में ऐसा क्या हुआ? होते-होते नहीं हो पाया ईरान से समझौता, International Hindi News - Hindustan
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डोनाल्ड ट्रंप की सीक्रेट रूम मीटिंग में ऐसा क्या हुआ? होते-होते नहीं हो पाया ईरान से समझौता

वाइट हाउस में सीक्रेट रूम मीटिंग के बाद एक बार फिर ईरान के साथ समझौते पर बात नहीं बन पाई। डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान उसकी शर्तें मानने को तैयार है। हालांकि होर्मुज और परमाणु डील को लेकर बात फिर अटकी रह गई।

Sat, 30 May 2026 10:17 AMAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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डोनाल्ड ट्रंप की सीक्रेट रूम मीटिंग में ऐसा क्या हुआ? होते-होते नहीं हो पाया ईरान से समझौता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार दावा कर चुके हैं कि अमेरिका और ईरान समझौते के करीब पहुंच गया है। उन्होंने यहां तक कहा कि होर्मुज खुलने वाला है और ईरान परमाणु हथियारों से दूरी बनाने को तैयार है। हालांकि शुक्रवार को सीक्रेट रूम की बैठक के बाद एक बार फिर पेच अटक गया है। ट्रंप ने अपने आधिकारिक आवास एवं कार्यालय'वाइट हाउस' में शुक्रवार को अपने सलाहकारों के साथ बैठक की लेकिन ईरान के साथ युद्धविराम की अवधि बढ़ाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने संबंधी प्रस्तावित समझौते पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं किया है। इस बीच ईरान ने भी कहा है कि यह समझौता अभी अंतिम रूप नहीं ले पाया है।

दो घंटे की बैठक, नहीं निकला कोई परिणाम

बैठक से पहले ट्रंप ने कहा था कि वह इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लेने वाले हैं। हालांकि, बाद में प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ लगभग दो घंटे चली बैठक बिना किसी निर्णय के समाप्त हो गई।

अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि ट्रंप केवल उसी समझौते को मंजूरी देंगे जो उनकी तय शर्तों को पूरा करे और ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर अंकुश लगाए।

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ट्रंप ने यह उच्चस्तरीय बैठक ऐसे समय में की जब एक दिन पहले कई मीडिया संस्थानों ने खबर दी थी कि अमेरिकी और ईरानी वार्ताकार एक प्रारंभिक समझौते पर सहमत हो गए हैं जिसके तहत मौजूदा नाजुक युद्धविराम को 60 दिनों के लिए बढ़ाया जाएगा और ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम पर फिर से वार्ताएं शुरू होंगी। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'ईरान को यह मानना होगा कि वह कभी परमाणु हथियार या बम नहीं बनाएगा।' उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए खोला जाना चाहिए और वहां बिछाई गई सभी समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाया जाना चाहिए।

अमेरिका पर विश्वास नहीं- ईरान

वहीं, ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बघेर कालिबाफ ने शुक्रवार को कहा कि ईरान को गारंटी या शब्दों पर नहीं, बल्कि केवल ठोस कार्रवाई पर भरोसा है। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में अमेरिका और इजराइल द्वारा दो बार हमले किए जाने के बाद अविश्वास बना हुआ है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, 'दूसरा पक्ष कार्रवाई नहीं करेगा तो ईरान भी कोई कदम नहीं उठाएगा। हम बातचीत से नहीं, बल्कि मिसाइलों से रियायतें हासिल करते हैं।'

अभी अंतिम रूप नहीं ले पाया समझौता

ट्रंप की बैठक समाप्त होने से पहले ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी प्रसारक से कहा कि समझौता 'अभी अंतिम रूप नहीं ले पाया है।' अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने गुरुवार को संकेत दिया था कि वार्ताकार ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि विस्तृत शर्तों पर आगे की वार्ताओं में चर्चा होगी।

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हालांकि, बघाई ने कहा कि ईरानी अधिकारी फिलहाल 'युद्ध समाप्त करने पर ध्यान लगा रहे हैं और इस समय परमाणु योजना के विवरण पर चर्चा नहीं कर रहे हैं।' ईरान चाहता है कि किसी भी समझौते में इजराइल और लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्ला के बीच युद्धविराम भी शामिल हो। साथ ही, वह विदेशों में फ्रीज अरबों डॉलर के अपने फंड जारी कराने की मांग भी कर रहा है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'ईरान शर्तें तय करेगा : नकद के बदले नकद, लाभ के बदले लाभ, मुफ्त में कुछ नहीं।'

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