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तीन मोर्चों पर लड़ रहे नेतन्याहू को देश के अंदर से ही बड़ा झटका, कुर्सी पर मंडरा रहा खतरा

इजरायल में चुनाव करीब आ रहा है। इसके साथ ही नेतन्याहू के विपक्षी दलों की सक्रियता बढ़ने लगी है। नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए रणनीतियां बनने लगी हैं। दो प्रमुख विरोधी पार्टियों ने इसके लिए गठबंधन का भी ऐलान कर दिया है। तो क्या नेतन्याहू की कुर्सी पर संकट है?

Mon, 27 April 2026 07:34 PMDeepak Mishra लाइव हिन्दुस्तान, यरुशलम
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तीन मोर्चों पर लड़ रहे नेतन्याहू को देश के अंदर से ही बड़ा झटका, कुर्सी पर मंडरा रहा खतरा

इजरायल में चुनाव करीब आ रहा है। इसके साथ ही नेतन्याहू के विपक्षी दलों की सक्रियता बढ़ने लगी है। नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए रणनीतियां बनने लगी हैं। इजरायली प्रधानमंत्री की दो प्रमुख विरोधी पार्टियों ने इसके लिए गठबंधन का भी ऐलान कर दिया है। तो क्या नेतन्याहू की कुर्सी पर संकट है? बता दें कि दोनों दलों ने घोषणा की है कि वह चुनाव के दौरान घरेलू मुद्दों पर ध्यान देंगे। इसके लिए वह धार्मिक लोगों को सेना में भर्ती करने पर भी जोर देंगे। हालांकि ईरान, गाजा और लेबनान जैसे मुद्दों पर नफ्ताली बेनेट और यायर लैपिड के नेतृत्व वाली संयुक्त पार्टी की सुरक्षा नीति नेतन्याहू जैसी ही रहने की उम्मीद है। नई पार्टी को ‘बेयाचाद’ नाम दिया गया है। हिब्रू में इसका मतलब होता है साथ।

ईरान पर क्या रुख
हालांकि कुछ मुद्दे ऐसे हैं, जिन पर इजरायल का रुख समान रहने की उम्मीद है। इनमें से ही एक मुद्दा है ईरान। बेनेट और लैपिड अमेरिका के साथ संयुक्त रूप से ईरान पर हमले को लेकर एकमत हैं। इजरायल ने जब ईरान पर हवाई हमले किए तो लैपिड ने इसे राक्षस के खिलाफ युद्ध बताया था। हालांकि बेनेट और लैपिड, दोनों ही नेतन्याहू की आलोचना भी करते हैं। उनका कहना है कि नेतन्याहू ईरान में सत्ता परिवर्तन का मकसद पूरा नहीं कर पाए। आठ अप्रैल को सीजफायर होने के बाद से दोनों नेताओं ने फिर से युद्ध शुरू करने की बात नहीं कही है। हालांकि वह अभी भी रणनीतिक लक्ष्य हासिल करने की बात करते हैं।

लेबनान की बात
इसके अलावा बेनेट और लैपिड ने लेबनान में इजरायली सेना के हमले का भी समर्थन किया है। लैपिड ने कहा है कि इजरायल के लोगों को बचाने के लिए सेना को सभी जरूरी कदम उठाने चाहिए। उन्होंने हिजबुल्लाह के साथ संघर्षविराम का बहुत ज्यादा समर्थन नहीं किया। लैपिड ने कहाकि उत्तरी इजरायल के लिए जो खतरा है, उसे पूरी तरह से हटाना ही एकमात्र उपाय है। उन्होंने 17 अप्रैल को फेसबुक पोस्ट में सीजफायर की आलोचना की थी। उन्होंने लिखा कि हिजबुल्लाह ने दक्षिणी लेबनान को फिर से निशाना बनाना शुरू कर दिया। वह अगले दौर के हमलों के लिए मिसाइलों के साथ मजबूत होता जा रहा है।"

गाजा पर क्या कहा
वहीं, गाजा में युद्ध को लेकर भी बेनेट और लैपिड ने नेतन्याहू की आलोचना की है। दोनों ने कहाकि सात अक्टूबर, 2023 को इजरायल पर हुए हमले के बाद इजरायल ने हमास मिलिशिया समूह को पूरी तरह से नष्ट नहीं किया। जनवरी में, लैपिड ने कहाकि नेतन्याहू की सरकार ने गाजा में अच्छा परिणाम हासिल नहीं किया। उन्होंने कहाकि हमास के पास अभी भी हजारों सशस्त्र लड़ाके हैं। संघर्ष विराम के तहत हमास ने गाजा के तट पर एक छोटे से क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखा। इस महीने एक फेसबुक पोस्ट में बेनेट ने कहाकि नेतन्याहू की नीतियों के चलते हमास को गाजा में फिर से नियंत्रण पाने में मदद मिली है।

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क्या फिलिस्तीन को मिलेगा देश का दर्जा?
अब बात आती है कि क्या बेनेट और लैपिड फिलिस्तीन को लेकर नरम रवैया अपनाएंगे? हालांकि सार्वजनिक सर्वेक्षणों में इसको लेकर सकारात्मक संकेत नहीं है। इन सर्वेक्षणों के मुताबिक अधिकांश इजरायली कब्जा वाले वेस्ट बैंक, गाजा और पूर्वी यरूशलम में एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य के गठन का विरोध करते हैं। इसलिए बेनेट और लैपिड का रुख भी ऐसा ही रहने का उम्मीद है। बता दें कि नेतन्याहू भी फिलिस्तीनी राज्य के विरोध में हैं। उनकी सरकार ने वेस्ट बैंक में बस्तियों के निर्माण की योजनाओं को तेज कर दिया है।

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