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पाकिस्तान पर बालाकोट जैसी एयरस्ट्राइक नहीं कर पाएगा भारत? पूर्व अमेरिकी राजदूत की चेतावनी

पूर्व अमेरिकी राजदूत केनेथ जस्टर की चेतावनी: अमेरिका और पाकिस्तान के सुधरते रिश्तों का असर भविष्य में भारत के आतंकवाद विरोधी 'कड़े' फैसलों पर पड़ सकता है। जानें भारत-अमेरिका-पाक त्रिकोणीय संबंधों का पूरा विश्लेषण।

Fri, 24 April 2026 07:39 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, वाशिंगटन
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पाकिस्तान पर बालाकोट जैसी एयरस्ट्राइक नहीं कर पाएगा भारत? पूर्व अमेरिकी राजदूत की चेतावनी

भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत केनेथ जस्टर ने वाशिंगटन के हडसन इंस्टीट्यूट में आयोजित 'द न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस' में भारत-अमेरिका और पाकिस्तान के त्रिकोणीय संबंधों पर एक अहम बयान दिया है। गुरुवार को बोलते हुए उन्होंने आगाह किया कि अमेरिका और पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकियां भारत के रणनीतिक फैसलों को प्रभावित कर सकती हैं, विशेषकर तब जब भविष्य में सीमा पार से कोई बड़ा आतंकी हमला होता है।

पाकिस्तान और ट्रंप प्रशासन की नजदीकियां

जस्टर ने कहा कि पाकिस्तान ने ट्रंप प्रशासन को अपनी ओर आकर्षित करने में सफलता पाई है। यह नजदीकियां इतनी बढ़ गई हैं कि पाकिस्तान अब अमेरिका-ईरान वार्ता में एक मध्यस्थ की भूमिका भी निभा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई स्तरों पर और कई कारणों से, पाकिस्तान का यह कदम भारत के लिए एक परेशानी और कई लोगों के लिए आश्चर्य का विषय है।

आतंकवाद पर भारत की प्रतिक्रिया पर असर

पूर्व राजदूत ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण कूटनीतिक चिंता व्यक्त की। उनका मानना है कि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच मधुर संबंधों का भारत पर व्यावहारिक प्रभाव पड़ सकता है। यदि भविष्य में कोई बड़ी 'सीमा पार आतंकी घटना' होती है, तो अमेरिका-पाक संबंधों के कारण भारत अपनी प्रतिक्रिया को सीमित कर सकता है।

पूर्व राजदूत ने अपने कार्यकाल के दौरान हुए पुलवामा आतंकी हमले और उसके बाद भारत की बालाकोट एयरस्ट्राइक को याद करते हुए एक बड़ी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में, अब भारत को इस बात पर संदेह हो सकता है कि पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों के खिलाफ किसी कड़ी सैन्य कार्रवाई में अमेरिका उसका समर्थन करेगा या नहीं।

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द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाने की उम्मीद

पिछले 26 वर्षों से सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में अमेरिका-भारत संबंधों से जुड़े रहने के अनुभव को साझा करते हुए, जस्टर ने आशा व्यक्त की कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध पूरी तरह से पटरी पर आ जाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों पक्षों को एक पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

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21वीं सदी में भारत का भू-राजनीतिक महत्व

अंत में, जस्टर ने भारत की वैश्विक रसूख का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत की विशाल जनसंख्या, इसके बाजार का आकार, तकनीकी प्रतिभा और इसकी बढ़ती सैन्य शक्ति को देखते हुए, भारत का उदय इस सदी की सबसे महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक कहानियों में से एक होगा। उनके विचार में, अमेरिका का इस कहानी का एक सकारात्मक हिस्सा बनना, अमेरिका और भारत दोनों के हित में है।

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