नूर खान एयरबेस का सीक्रेट खुला! ईरान के विमानों को छिपा रहा था पाकिस्तान, भड़का अमेरिका
अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच पाकिस्तान का डबल गेम सामने आया है। एक अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने अमेरिकी एयरस्ट्राइक से बचाने के लिए ईरानी सैन्य विमानों को अपने नूर खान एयरबेस पर पनाह दी थी।

अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के दौरान पाकिस्तान की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ताजा अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक, एक तरफ जहां पाकिस्तान दोनों देशों के बीच शांति के लिए 'मध्यस्थ' होने का दिखावा कर रहा था, वहीं दूसरी तरफ उसने ईरानी सैन्य विमानों को संभावित अमेरिकी हवाई हमलों से बचाने के लिए अपने एयरबेस पर छिपने की जगह दी। इस खुलासे के बाद वाशिंगटन में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है।
नूर खान एयरबेस पर उतारे गए ईरानी विमान
CBS न्यूज की रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि 8 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्धविराम की घोषणा करने के कुछ ही समय बाद, ईरान ने अपने कई विमानों को पाकिस्तान के 'नूर खान एयरबेस' पर शिफ्ट कर दिया था। इन विमानों में ईरानी वायुसेना का एक आरसी-130 टोही और खुफिया जानकारी जुटाने वाला विमान भी शामिल था। गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था।
भड़का अमेरिका, सीनेटर ने की पाकिस्तान के रोल की समीक्षा की मांग
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अमेरिकी सांसदों ने इस्लामाबाद की तटस्थता पर सवाल उठाए हैं। रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इस संकट में पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका का फिर से आकलन करने की मांग की है।
सीनेटर ग्राहम की दो टूक: उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा- अगर यह रिपोर्ट सही है, तो अमेरिका, ईरान और अन्य पक्षों के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थ की भूमिका का पूरी तरह से पुनर्मूल्यांकन करना होगा।
इजरायल का किया जिक्र: उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल को लेकर पाकिस्तानी रक्षा अधिकारियों के पहले के बयानों को देखते हुए, अगर यह खबर सच साबित होती है तो उन्हें कोई हैरानी नहीं होगी।
पाकिस्तान ने दावों को किया खारिज
दूसरी ओर, एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने इन आरोपों को पूरी तरह से नकार दिया है। CBS न्यूज से बात करते हुए पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा कि नूर खान बेस शहर के बिल्कुल बीचों-बीच और घनी आबादी वाले इलाके में स्थित है। अधिकारी के मुताबिक, वहां विमानों के एक बड़े बेड़े को खड़ा करना और उसे आम जनता की नजरों से छिपाना नामुमकिन है।
क्या अफगानिस्तान में भी छिपाए गए नागरिक विमान?
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि युद्ध के दौरान ईरान ने अपने नागरिक विमानों को पड़ोसी देश अफगानिस्तान में भी भेजा था। एक अफगान नागरिक उड्डयन अधिकारी के अनुसार, युद्ध शुरू होने से ठीक पहले महान एयर का एक ईरानी विमान काबुल में उतरा था और ईरानी हवाई क्षेत्र बंद होने के बाद वहीं रुक गया।
अफगान अधिकारियों के मुताबिक, बाद में जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर हमले किए, तो इस विमान को ईरानी सीमा के पास हेरात में शिफ्ट कर दिया गया। हालांकि, तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने इन दावों को झूठा बताते हुए कहा, "नहीं, यह सच नहीं है और ईरान को ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं है।"
शांति प्रस्ताव पर ट्रंप बोले- ईरान लाइफ सपोर्ट पर है
यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान वाशिंगटन और तेहरान के बीच अपने रिश्ते संतुलित करने की कोशिश कर रहा है। सीजफायर के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब भी चरम पर है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने युद्ध समाप्त करने के तेहरान के ताजा प्रस्ताव को 'उचित' बताया। लेकिन, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस से बोलते हुए इस ईरानी प्रतिक्रिया को 'कचरा' करार देकर सिरे से खारिज कर दिया। ट्रंप ने कहा, "उनके भेजे गए उस कचरे को पढ़ने के बाद, मैंने उसे पूरा भी नहीं पढ़ा। वे (ईरान) लाइफ सपोर्ट पर हैं। यह सीजफायर भी भारी लाइफ सपोर्ट पर है।" ईरान ने भी साफ कर दिया है कि भविष्य की किसी भी बातचीत में यूरेनियम संवर्धन और परमाणु तकनीक पर कोई समझौता नहीं होगा।
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