US के लोग बेवकूफ हैं… भारत में वामपंथ के सफाए पर खुश हो गए अमेरिकी एक्सपर्ट, वोटर्स की जमकर तारीफ
केरल विधानसभा चुनाव में UDF ने 102 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि वामपंथी गठबंधन (LDF) महज 35 सीटों पर सिमट गया। इसके बाद अब भारत के किसी भी राज्य में लेफ्ट की सरकार नहीं बची।

Kerala Election Results: केरल विधानसभा चुनावों में वामपंथी गठबंधन की हार हो गई है। इसके साथ ही अब भारत के किसी भी राज्य में लेफ्ट की सरकार नहीं बची है। ऐसे में चुनावी नतीजों ने ना केवल भारत, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल मचा दी है। अब केरल में वामपंथी दलों के करीब छह दशक पुराने दबदबे के अंत और कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF की शानदार जीत पर अमेरिका से एक बड़ा बयान आया है। अमेरिकी पॉलिसी एक्सपर्ट ने इसके लिए भारतीय मतदाताओं की तारीफ की है और US के लोगों को बेवकूफ तक कह दिया है।
अमेरिकी पॉलिसी एनालिस्ट मार्क डबोविट्ज ने भारत वोटर्स की तारीफ करते हुए कहा कि "भारत ने कम्युनिस्टों को बाहर फेंक दिया है, जबकि अमेरिका में अब तक ऐसा नहीं हो रहा है। मार्क डबोविट्ज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर केरल के चुनावी नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “भारत कम्युनिस्टों को सत्ता से बाहर फेंक रहा है, जबकि अमेरिका उन्हें अपने शहरों, राज्यों और कांग्रेस के सदस्यों के रूप में चुन रहा है। हां, हम इतने बेवकूफ हैं।”
केरल में UDF की जीत
गौरतलब कि केरल में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF को जीत मिली है। UDF को 140 में से 102 सीटों पर जीत मिली है जबकि वामपंथी गठबंधन (LDF) महज 35 सीटों पर सिमट गया। वहीं भाजपा ने यहां 3 सीटों पर जीत दर्ज की। इस जनादेश के साथ ही भारतीय राजनीति के नक्शे से वामपंथ का आखिरी किला ढह गया है। लगभग 60 सालों में पहली बार ऐसा हुआ है कि भारत के किसी भी राज्य में वामपंथी दल की सरकार नहीं है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन समेत सीपीआई(एम) के कई वरिष्ठ नेताओं को कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ा और कई मंत्रियों को अपनी सीटें गंवानी पड़ीं।
बंगाल, त्रिपुरा के बाद केरल भी गंवाया
विशेषज्ञों का मानना है कि केरल में वामपंथ के पतन के पीछे कई कारण हैं। लंबे समय तक सब्सिडी और पेंशन के भरोसे वोट बैंक बचाए रखने वाला वामपंथ अब फेल हो गया है। युवा अब केवल सरकारी मदद नहीं, बल्कि आर्थिक विकास, निजी निवेश और नौकरी के अवसर चाहते हैं। इससे पहले 2011 में ममता बनर्जी ने बंगाल में 34 साल के शासन को खत्म कर शुरू की थी। 2018 में भाजपा ने त्रिपुरा में भी वामपंथ को सत्ता से बाहर किया। वहीं लोकसभा की बात करें तो 2004 में लोकसभा की 59 सीटें जीतने वाला वाम मोर्चा अब महज 5 सीटों पर सिमट गया है।
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