ईरान युद्ध में 'आखिरी वार' करने जा रहा अमेरिका, पाकिस्तान की इतनी कोशिश पर फिर जाएगा पानी?
अमेरिका ने इलाके में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। अमेरिकी नौसेना का जहाज USS त्रिपोली, जिसमें करीब 3500 सैनिक और मरीन सवार हैं, पश्चिम एशिया पहुंच चुका है। F-35 फाइटर जेट, ऑस्प्रे विमान और अन्य एयरक्राफ्ट भी तैनात हैं।

पाकिस्तान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध में चौधरी बनने की कर रहे पाकिस्तान की कोशिशों पर जल्द ही पानी फिर सकता है। इसकी वजह है अमेरिका की नई योजना। एक तरफ जहां पाकिस्तान खुद को इस संघर्ष में मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है और इस्लामाबाद में सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ईरान में खार्ग द्वीप और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े कई ठिकानों पर जमीनी सेना उतारने जा रहा है, जो युद्ध को और भड़का सकता है।
युद्ध को लेकर रविवार को पाकिस्तान में मुस्लिम देशों के कई नेता एकजुट हुए। सऊदी अरब, मिस्र, तुर्किये और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने शिखर सम्मेलन के दौरान तनाव कम करने का रास्ता निकालने को लेकर चर्चा की। एक अधिकारी ने बताया कि विदेश मंत्रियों ने क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा की और सुरक्षा मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हुए क्षेत्र में व्यापक शांति के विकल्पों पर मंथन किया। हालांकि बैठक के बाद कोई बयान जारी नहीं किया गया।
कोशिशों को लगेगा झटका
सम्मेलन के अलावा पाकिस्तानी अधिकारियों ने बीते सप्ताह ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने की कोशिश में सीधी बातचीत का संदेश भी पहुंचाया था। लेकिन अगर अमेरिका ग्राउंड ऑपरेशन शुरू करता है, तो इससे संघर्ष और बढ़ सकता है और पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने का खतरा है, जिससे पाकिस्तान की कोशिशों को झटका लग सकता है।
आखिरी वार की तैयारी में अमेरिका
इस बीच अमेरिका ईरान के खिलाफ निर्णायक हमला करने के विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिसमें जमीनी कार्रवाई और व्यापक बमबारी अभियान जैसी योजना शामिल हैं। सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार संघर्ष के अहम चरण में पहुंचने के बीच अमेरिकी अधिकारी मान रहे हैं कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं तथा ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए जारी रखता है, तो तनाव और बढ़ सकता है।
क्या है प्लान?
रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। इनमें ईरान के प्रमुख तेल निर्यात टर्मिनल खार्ग द्वीप पर हमला, लारक द्वीप पर कार्रवाई, और होर्मुज के पश्चिमी छोर के पास स्थित अबू मूसा और अन्य छोटे द्वीपों पर कब्जा जैसे कदम शामिल हैं।इसके अलावा बिना जमीनी सैनिक भेजे व्यापक हवाई हमलों के जरिए ईरान की क्षमताओं को कमजोर करने का विकल्प भी विचाराधीन है। वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने चेतावनी दी कि यदि समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका पहले से अधिक कठोर कार्रवाई कर सकता है। इस बीच अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ानी शुरू कर दी है, जिसमें समु्द्री अभियान दल और 82वीं वायुसेना इकाई के तत्वों की तैनाती शामिल है।
ईरान ने दी है चेतावनी
ईरान ने अमेरिकी बातचीत प्रस्तावों को खारिज करते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने कहा कि ईरान स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर क्षेत्र में महत्वपूर्ण ढांचे को निशाना बनाएगा। गालिबफ ने कहा है कि अमेरिका सार्वजनिक रूप से बातचीत की पहल का संदेश भेज रहा है लेकिन गुप्त रूप से वह जमीनी सैन्य अभियान की योजना बना रहा है। गालिबफ ने रविवार को ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी पर एक बयान में कहा, "दुश्मन बातचीत और संवाद के संदेश भेजने का ढोंग करता है, जबकि गुप्त रूप से जमीनी हमले की योजना बना रहा है। वह यह नहीं जानता कि हमारे लोग अपनी धरती पर अमेरिकी सैनिकों के आने का इंतजार कर रहे हैं ताकि उन पर गोलियां चला सकें और क्षेत्र में उनके साथियों को हमेशा के लिए दंडित कर सकें।"
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