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ईरान में जमीनी हमला करने कूदा तो फंसेगा अमेरिका, क्या है 'अर्बन वारफेयर' वाला खतरा

जमीनी हमले का अर्थ होगा कि अर्बन वारफेयर में उतरना। ऐसी स्थिति में अमेरिका के लिए ईरान की गलियों में घुसकर मात दे पाना आसान नहीं होगा। ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है क्योंकि 2022 में यूक्रेन पर हमला करने वाले रूस ने भी ऐसा ही किया था, लेकिन उसकी भारी-भरकम हथियारों से लैस सेना वहां फंसती दिखी थी।

Mon, 30 March 2026 10:01 AMSurya Prakash लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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ईरान में जमीनी हमला करने कूदा तो फंसेगा अमेरिका, क्या है 'अर्बन वारफेयर' वाला खतरा

ईरान में चल रही जंग को एक महीने से ज्यादा का वक्त बीच चुका है। अमेरिका और इजरायल के हमले के पहले ही दिन ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई मारे गए थे। यह ईरान के लिए सबसे बड़ा झटका और सदमा था। जानकारों का कहना था कि अमेरिका ने खामेनेई को इसलिए टारगेट किया है ताकि ईरान में नेतृत्व परिवर्तन किया जा सके। हालांकि अब तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है। खामेनेई समेत कई टॉप लीडर ईरान में मारे जा चुके हैं, लेकिन वह जंग जारी रखने के इरादे से पीछे नहीं हटा है। उसने अब तक बिना शर्त सरेंडर जैसी बात भी नहीं की है। खामेनेई के बेटे मोजतबा ने कमान संभाल रखी है और वह लगातार आक्रामक हैं।

इस बीच चर्चा है कि अमेरिका अब ईरान में जमीनी हमला करने की तैयारी कर रहा है और कभी भी सैनिक उतारे जा सकते हैं। माना जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप की ओर से इस संबंध में कभी भी ऐलान किया जा सकता है। हालांकि इस जमीनी हमले के भी अपने खतरे होंगे और ऐसा भी हो सकता है कि अमेरिका को यहां झटका ही लगे। ऐसा इसलिए क्योंकि जमीनी हमले का अर्थ होगा कि अर्बन वारफेयर में उतरना। ऐसी स्थिति में अमेरिका के लिए ईरान की गलियों में घुसकर मात दे पाना आसान नहीं होगा। ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है क्योंकि 2022 में यूक्रेन पर हमला करने वाले रूस ने भी ऐसा ही किया था, लेकिन उसकी भारी-भरकम हथियारों से लैस सेना वहां फंसती दिखी थी।

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क्या है अर्बन वारफेयर, जिसमें रूस को भी लगा था झटका

अब ऐसे ही स्थिति अमेरिका की भी हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि अर्बन वारफेयर में कूदने की स्थिति में किसी इलाके की पूरी जानकारी रख पाना संभव नहीं होता। यदि सैटेलाइट और अन्य माध्यमों से इलाके की पूरी जानकारी जुटा भी ली जाए तो मूवमेंट उतना आसान नहीं रहेगा, जितना स्थानीय सेना या लड़ाकों के लिए होता है। फिर अर्बन वारफेयर की स्थिति में मिसाइल, तोप जैसे बड़े हथियार काम नहीं आते। रूस के आगे भी यही संकट यूक्रेन में पैदा हुआ था, जब उसकी सेना यू्क्रेन के शहरों की गलियों में फंसती दिखी थी। अमेरिका इस मामले में अफगानिस्तान, इराक और वियतनाम के अपने ही अनुभवों से काफी कुछ सीख सकता है।

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट, क्यों जमीनी हमले में मजबूत हो सकता है ईरान

हाइब्रिड वारफेयर के जानकार और हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जयप्रकाश सिंह भी ऐसी ही राय रखते हैं। उन्होंने कहा, ‘अर्बन वारफेयर की स्थिति में ईरान को ही फायदा होगा। उसे अपने इलाके की पूरी समझ है। इसके अतिरिक्त ड्रोन आदि के माध्यम से भी वह अमेरिकी सैनिकों को टारगेट कर सकता है। यह युद्ध एक तरह का बिल्डिंग बाय बिल्डिंग फाइटिंग होता है। इसमें कब कहां से और कैसे हमला कर देगा। इसका अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। इस मामले में बढ़त स्थानीय फोर्सेज को होती है और बाहर से आई सेना यहां ट्रैप हो सकती है। ऐसा ही रूस के साथ यूक्रेन में हुआ था।’

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