दो हफ्ते पहले ईरान के पास नौसेना थी, अब… पश्चिम एशिया में जारी युद्ध पर ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध को लेकर नया दावा किया है। उन्होंने कहा कि ईरान के पास दो हफ्ते पहले एक नौसेना थी, लेकिन अब वह समंदर की गहराई में समा चुकी है। इतना ही नहीं उनकी वायुसेना भी तबाह हो चुकी है। अमेरिकी सेना ने उनके 50 से ज्यादा जहाज गिरा दिए हैं।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध को लेकर नया दावा किया है। उन्होंने कहा कि दो हफ्ते पहले ईरान के पास नौसेना थी, लेकिन अब वह समुद्र में डूब चुकी है। उनके जहाज अब समंदर की गहराई में हैं। ईरानी वायुसेना भी लगभग खत्म हो चुकी है। उनके 58 जहाज गिराए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि सीधे तौर पर कहें, तो हमारी सेना ईरान में अच्छा प्रदर्शन कर रही है।
वाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने ईरान में जारी युद्ध को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, "मैं शुरूआत में सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि हम ईरान में बहुत बेहद अच्छा कर रहे हैं। हमारे और उनके बीच फर्क यह है कि दो हफ्ते पहले उनके पास नौसेना थी, अब उनके पास कोई नौसेना नहीं है। सब समुद्र की तलहटी में है। दो दिनों में 58 जहाज गिरा दिए गए। हमारे पास दुनिया की सबसे बेहतरीन नौसेना है और इसका कोई मुकाबला नहीं है।”
इसके साथ ही ट्रंप ने दोहराया कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे। उन्होंने कहा, "“हम उन्हें परमाणु हथियार नहीं रखने देंगे, क्योंकि अगर उनके पास ये होंगे, तो वे उनका इस्तेमाल करेंगे, और हम ऐसा होने नहीं देंगे।" ट्रंप ने ईरान के परमाणु हथियार का मुद्दा और इस युद्ध का ठीकरा अपने पूर्ववर्तियों पर भी फोड़ा। उन्होंने कहा कि यह काम बहुत पहले हो जाना चाहिए था, लेकिन तब नहीं हुआ इसलिए उन्हें यह अभी करना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि इससे पहले जब अमेरिकी राष्ट्रपति से ईरान में सैनिक भेजने के बारे में पूछा गया था, तो उन्होंने इससे इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा, "मैं यह नहीं करने जा रहा हूं, अगर मैं करने भी जा रहा होता, तो आपको नहीं बताता।" हालांकि, ट्रंप ने ऐसा करने से इनकार किया। ट्रंप की यह टिप्पणियां ऐसे समय में सामने आई हैं, जब ईरान में पिछले 21 दिनों से लगातार युद्ध जारी है। इस युद्ध में ईरान के सैंकड़ों लोग मारे जा चुके हैं, जबकि दूसरी तरफ भी कुछ दर्जन लोग मारे जा चुके हैं।
कायर हैं नाटो देश: ट्रंप
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध में मदद न करने के लिए यूरोप के देशों को कायर कहा। ट्रंप ने शुक्रवार को 'ट्रुथ सोशल' पर एक लंबी पोस्ट में दावा किया कि ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल अभियान अब "सैन्य रूप से जीत लिया गया है"। उन्होंने कहा कि चल रहे ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों के बावजूद अब क्षेत्र में "बहुत कम खतरा" बचा है।
ट्रंप ने लिखा, "वे तेल की उन ऊंची कीमतों की शिकायत करते हैं जिन्हें चुकाने के लिए वे मजबूर हैं, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने में मदद नहीं करना चाहते।" उन्होंने इस कार्य को एक "साधारण सैन्य युद्धाभ्यास" बताते हुए कहा, “उनके लिए यह करना बहुत आसान है और इसमें जोखिम भी बहुत कम है... कायर और हम इसे याद रखेंगे!”
यह टिप्पणी तब आई है जब अमेरिका अपने पुराने सहयोगियों पर खाड़ी में समुद्री मार्गों को सुरक्षित करने के लिए योगदान देने का दबाव बना रहा है। इसमें ईरानी आक्रामकता को रोकने के लिए एक बहुराष्ट्रीय नौसैनिक एस्कॉर्ट का गठन शामिल है। जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण ऊर्जा की कीमतों में अत्यधिक वृद्धि हुई है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर संकट मंडरा रहा है।
गुरुवार को ब्रिटेन, जापान, नीदरलैंड, फ्रांस, इटली और जर्मनी ने कहा था कि वे सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए "उपयुक्त प्रयासों में योगदान देने के लिए तैयार" हैं। हालांकि, इस संयुक्त बयान में सेना तैनात करने की कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई गई। कुछ सरकारों ने संकेत दिया कि उनकी भागीदारी केवल स्थिति सामान्य होने के बाद ही होगी।
इस बीच, नाटो ने पुष्टि की है कि उसने इराक से अपना सलाहकार मिशन वापस ले लिया है और क्षेत्रीय सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण कर्मियों को यूरोप में स्थानांतरित कर दिया है। शुक्रवार को अंतिम टुकड़ी इराक से रवाना हो गई।
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