तेल बाजार में डॉलर की बादशाहत को लग सकता है तगड़ा झटका, यूएई ने US से ऐसा क्या कह दिया?
यूएई के अधिकारियों ने कहा है कि अगर उनके पास डॉलर की कमी हो जाती है, तो उन्हें तेल और अन्य लेन-देन के लिए चीन की मुद्रा युआन या अन्य देशों की मुद्राओं का सहारा लेना पड़ सकता है।

अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर बनीं अनिश्चितताओं के बीच अब संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने अमेरिका से ‘सेफ्टी नेट’ यानी वित्तीय मदद का भरोसा मांगा है। यूएई ने अमेरिकी अधिकारियों से यह गारंटी मांगी है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो उसकी अर्थव्यवस्था संभाली जा सके। वहीं यूएई ने यह तक कह दिया है कि उसे तेल व्यापार के लिए चीनी युआन का रुख करना पड़ सकता है।
यह खबर वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के हवाले से सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक UAE को चिंता है कि अगर युद्ध और गहराया तो उसकी अर्थव्यवस्था और ग्लोबल फाइनैंशल हब के रूप में उसकी स्थिति पर बड़ा असर पड़ सकता है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार कम हो सकता है और निवेशक भी डर सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, UAE ने कहा है कि अभी तक वह युद्ध के बड़े आर्थिक असर से बचा हुआ है, लेकिन हालात बिगड़ने पर उसे वित्तीय मदद की जरूरत पड़ सकती है। फिलहाल UAE का दिरहम अमेरिकी डॉलर से जुड़ा हुआ है और उसके पास करीब 270 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है।
US से क्या कहा?
पिछले हफ्ते वॉशिंगटन में हुई बैठकों में UAE सेंट्रल बैंक के गवर्नर खालिद मोहम्मद बलामा ने अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के साथ करेंसी-स्वैप लाइन का मुद्दा उठाया था। UAE के अधिकारियों ने अमेरिका को बताया कि अगर डॉलर की कमी होती है, तो उसे तेल बिक्री और अन्य लेन-देन के लिए चीन के युआन या अन्य मुद्राओं का सहारा लेना पड़ सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले के फैसले ने पूरे क्षेत्र को एक बड़े और नुकसानदायक संघर्ष में उलझा दिया है, जिसके असर लंबे समय तक रह सकते हैं।
आगे क्या?
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फेडरल रिजर्व की पॉलिसी कमिटी (FOMC) द्वारा UAE के लिए स्वैप लाइन मंजूर होने की संभावना कम है। आमतौर पर अमेरिका ऐसे इंतजाम उन्हीं देशों के लिए करता है, जिनसे अमेरिका के वित्तीय संबंध ज्यादा मजबूत होते हैं या जहां संकट का असर सीधे अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। फेड के स्थायी स्वैप समझौते ब्रिटेन, कनाडा, जापान, स्विट्जरलैंड और यूरोपीय संघ के साथ हैं। कोरोना महामारी जैसे संकट के समय मैक्सिको, दक्षिण कोरिया और ब्राजील समेत अन्य देशों को भी अस्थायी राहत दी गई थी। UAE के अमेरिका के साथ ऐसे मजबूत वित्तीय संबंध नहीं हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध के कारण पूंजी बाहर जाने, बाजार में उतार-चढ़ाव और आर्थिक अस्थिरता का खतरा बढ़ गया है। S&P ग्लोबल के मुताबिक, UAE की मजबूत वित्तीय स्थिति इन झटकों को झेल सकती है, लेकिन अगर तेल निर्यात या इंफ्रास्ट्रक्चर पर लंबे समय तक असर पड़ा तो जोखिम बढ़ सकता है। इस बीच, खाड़ी देशों ने हाल के हफ्तों में बाजार से अरबों डॉलर का कर्ज भी जुटाया है, ताकि नकदी की स्थिति मजबूत की जा सके।
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