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मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच ऐक्शन में जयशंकर, UAE के राष्ट्रपति से की मुलाकात; इस बात पर जोर

पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण स्थिति के बीच भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की और भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनका आभार व्यक्त किया।

Sun, 12 April 2026 05:21 PMDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच ऐक्शन में जयशंकर, UAE के राष्ट्रपति से की मुलाकात; इस बात पर जोर

पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण स्थिति के बीच भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की और भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनका आभार व्यक्त किया। रविवार को अबू धाबी में हुई मुलाकात के दौरान जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं तथा पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान भारतीय समुदाय की भलाई के लिए यूएई सरकार के प्रयासों की सराहना की।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए जयशंकर ने लिखा कि आज अबू धाबी में यूएई के राष्ट्रपति महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात कर मुझे अत्यंत सम्मानित महसूस हुआ। उन्होंने आगे कहा कि मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और संघर्ष के दौरान भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आभार जताया। व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के उनके मार्गदर्शन के लिए भी धन्यवाद दिया।

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एक अन्य पोस्ट में जयशंकर ने दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मक्तूम से फोन पर हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि दुबई में भारतीय समुदाय के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए यूएई नेतृत्व का आभार व्यक्त किया।

बता दें कि जयशंकर की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए पाकिस्तान में हुई उच्च स्तरीय वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर नई चिंताएं उत्पन्न हो गई हैं।

बैठक के बाद क्या बोले अमेरिकी उपराष्ट्रपति

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने वार्ता के बाद कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल एक स्पष्ट प्रस्ताव लेकर जा रहा था, लेकिन ईरान इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “हम यहां से एक बहुत ही सीधा प्रस्ताव लेकर जा रहे हैं। अब देखना होगा कि ईरानी इसे मानते हैं या नहीं।” यह वार्ता 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद दोनों देशों के बीच हुई सबसे महत्वपूर्ण आमने-सामने की बातचीत मानी जा रही है।

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वहीं, ईरान संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा कि उनके प्रतिनिधिमंडल ने रचनात्मक पहल की, लेकिन दूसरे पक्ष ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल का विश्वास जीतने में असफलता दिखाई। पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ ने और अधिक आलोचनात्मक रुख अपनाते हुए अमेरिका पर अपनी शर्तें थोपने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ कोई भी बातचीत ‘हमारी या आपकी शर्तों’ पर सफल नहीं हो सकती।

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वहीं दोनों देशों में समझौते नहीं होने के कारण एक बार फिर क्षेत्र में तनाव बरकरार है। चिंता जताई जा रही है कि अगर जंग दोबारा शुरू हुई तो वैश्विक ऊर्जा बाजार बाधित हो सकते हैं और महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों, खासकर हार्मुज स्ट्रेट पर खतरा मंडरा सकता है। यही कारण है कि भारत समेत कई देश ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर रहे हैं।

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