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ट्रंप ने पाकिस्तान को काम पर लगाया, भेजा था ईरान को मनाने; डील की इनसाइड स्टोरी

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने बयान जारी किया, 'इस्लामिक गणराज्य ईरान की ओर से मैं क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने के लिए अथक प्रयास के लिए अपने भाई पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल मुनीर के प्रति आभार और सराहना व्यक्त करता हूं।'

Thu, 9 April 2026 08:42 AMNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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ट्रंप ने पाकिस्तान को काम पर लगाया, भेजा था ईरान को मनाने; डील की इनसाइड स्टोरी

ईरान और अमेरिका ने 2 सप्ताह तक हमले रोकने का फैसला किया है। इसकी वजह पाकिस्तान की मध्यस्थता बताई जा रही है। अब खबरें हैं कि अमेरिका ही पाकिस्तान के जरिए ईरान के साथ सीजफायर करना चाहता था, जिसके लिए वह इस्लामाबाद पर काफी समय से दबाव बना रहा था। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। हालांकि, सहमति के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला तो था, लेकिन इजरायल के लेबनान पर हमले के बाद ईरान ने इसे फिर बंद कर दिया है।

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मामले से जुड़े जानकारी बताते हैं कि अमेरिका ही ईरान के साथ सीजफायर चाहता था। उन्होंने कहा कि हफ्तों से अमेरिकी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन इस्लामाबाद पर ईरान को मनाने का दबाव बना रहा था। इसके बाद पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की अगुवाई में हुई बैक चैनल बातचीत में तीनों मुल्क दो सप्ताह के सीजफायर के लिए तैयार हुए।

पहले से ही सीजफायर चाह रहे थे ट्रंप

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप 21 मार्च को ईरान के पावर प्लांट को खत्म करने की धमकी देने के बाद से ही सीजफायर चाहते थे। खबर है कि वह तेल की बढ़ती कीमतों से चिंतित थे और ईरानी शासन की जवाबी कार्रवाई से हैरान भी थे। ऐसे में मंगलवार को जब ट्रंप की तरफ से दी गई डेडलाइन खत्म हो रही थी, तो मुनीर ने अमेरिका के शीर्ष अधिकारियों से संपर्क साधा।

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ट्रंप की धमकी के बाद हरकत में आए

ट्रंप की तरफ से होर्मुज खोलने के पहले अल्टीमेटम के बाद मुनीर और पाकिस्तान के कई वरिष्ठ अधिकारी हरकत में आ गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने ईरान और अमेरिका के बीच संदेश लेन देन का काम किया। इस दौरान इस्लामाबाद को वार्ता के स्थान के तौर पर पेश किया गया, अमेरिका का 15 बिंदुओं का प्रस्ताव दिया और ईरान का 5 और 10 बिंदुओं का जवाब हासिल किया।

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों ही पक्षों की मांगें अलग थी, लेकिन समय के साथ ईरान अपने यूरेनियम भंडार पर सीमाएं तय करने और उन्हें कम करने के लिए काफी हद तक तैयार हो गया।

ईरान में अटकी बात

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान समर्थित बैक चैनल के जानकार दो लोग बताते हैं कि अमेरिका और इजरायल की तरफ से बमबारी के बाद अराघची और अन्य नेता होर्मुज डील के लिए सीजफायर करने तैयार हो गए थे। लेकिन IRGC से मुहर हासिल करने में जुटे हुए थे।

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पाकिस्तान ही क्यों

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और पाकिस्तान का मानना था कि अगर मुस्लिम बहुल देश की तरफ से अमेरिका का ऑफर दिया जाए, तो ईरान की तरफ से स्वीकार करने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। इसके बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को इस्लामाबाद में वार्ता के लिए दोनों मुल्कों को बुलाया है। वाइट हाउस ने कहा है कि जेडी वेंस वार्ता के लिए पाकिस्तान जा रहे हैं

शरीफ ने बुधवार को बताया कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस बात की पुष्टि की है कि इस्लामाबाद में होने वाली शांति बातचीत में तेहरान हिस्सा लेगा। पाकिस्तान पीएम ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति पेजेशकियन के साथ टेलीफोन पर 'अच्छी और गर्मजोशी भरी' बातचीत की। यह बातचीत अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सशर्त युद्धविराम पर सहमत होने के कुछ घंटों बाद हुई, जिसमें जहाज परिवहन के लिए होर्मुज जलमार्ग को खोलना भी शामिल है। हालांकि, यह साफ नहीं हुआ कि इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत में ईरान का की तरफ से कौन जाएगा।

ईरान ने की पाकिस्तान की तारीफ

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने समझौता करवाने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ और सेना प्रमुख मुनीर के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बयान जारी किया, 'इस्लामिक गणराज्य ईरान की ओर से मैं क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने के लिए अथक प्रयास के लिए अपने भाई पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल मुनीर के प्रति आभार और सराहना व्यक्त करता हूं।'

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चीन की भी हो सकती है भूमिका

एपी ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि चीन ने ईरान के नेताओं से बातचीत करके उन्हें अमेरिका से युद्धविराम का रास्ता तलाशने के लिए राजी करने की कोशिश की थी। दो अधिकारियों ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा कि बातचीत के दौरान चीनी अधिकारी ईरानी अधिकारियों के संपर्क में थे। एक अधिकारी ने कहा कि चीन अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है और वह मुख्य रूप से पाकिस्तान, तुर्किये और मिस्र समेत मध्यस्थों के साथ काम कर रहा है। हालांकि, चीन ने इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा था।

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