ट्रंप ने ईरान पर रोके हमले, रूस ने की शांति की बात; मिडिल ईस्ट में सुलह के संकेत?
रूस ने मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के राजनीतिक एवं राजनयिक समाधान की मांग की है। यह बयान ठीक उसी समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुलासा किया कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच संघर्ष समाप्त करने के लिए बातचीत हुई है।

रूस ने मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के राजनीतिक एवं राजनयिक समाधान की मांग की है। यह बयान ठीक उसी समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुलासा किया कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच संघर्ष समाप्त करने के लिए बातचीत हुई है। ट्रंप ने सोमवार को कहा कि पिछले दो दिनों में दोनों पक्षों के बीच 'शत्रुता के पूर्ण एवं समग्र समाधान' को लेकर बहुत अच्छी और सार्थक वार्ता हुई है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि उन्होंने ईरानी ऊर्जा अवसंरचना पर संभावित हमलों को रोकने का आदेश दिया है।
इससे पहले ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत फिर से खोलने का अल्टीमेटम जारी किया था। गौरतलब है कि 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर की गई बमबारी के बाद शुरू हुए इस युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट प्रभावी रूप से बंद पड़ा हुआ है, जिससे वैश्विक तेल व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
रूसी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ हुई बातचीत में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने तत्काल शत्रुता समाप्त करने और राजनीतिक समाधान निकालने का आग्रह किया। इसमें सभी संबंधित पक्षों, खासकर ईरान के वैध हितों का ध्यान रखा जाए। रूसी बयान में अमेरिका-ईरान वार्ता का कोई जिक्र नहीं किया गया, जिसकी तेहरान की ओर से अभी तक पुष्टि नहीं हुई है।
मॉस्को ने स्पष्ट किया कि यह फोन कॉल ईरान की ओर से शुरू की गई थी। रूस, ईरान के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक है और उसने अमेरिका-इजरायल के हमलों की कड़ी निंदा की है, हालांकि उसने सार्वजनिक रूप से सैन्य सहायता की पेशकश नहीं की। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पहले ही कहा था कि स्थिति को राजनीतिक और राजनयिक समाधान की ओर ले जाना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि यही एकमात्र रास्ता है जो इस क्षेत्र में उत्पन्न विनाशकारी तनाव को प्रभावी ढंग से कम कर सकता है।
बता दें कि रूस ने बुशहर में ईरान के एकमात्र चालू परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण में मदद की थी और ऐसे हमलों के खिलाफ चेतावनी दी है जो इस स्थल को खतरे में डाल सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निगरानी निकाय ने पिछले सप्ताह घोषणा की थी कि इस संयंत्र पर एक प्रक्षेपास्त्र से हमला किया गया था। पेस्कोव ने सोमवार को कहा कि अगर यह प्रवृत्ति जारी रही तो इससे सुरक्षा को बहुत गंभीर खतरा पैदा होगा। हम परमाणु सुविधाओं पर हमलों को बेहद खतरनाक और संभवतः अपरिवर्तनीय परिणामों वाला मानते हैं।
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