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बिना फोन के चीन पहुंचे ट्रंप और मस्क, ड्रैगन की साइबर सेना से क्यों डरा अमेरिका?

ट्रंप के चीन दौरे पर एलन मस्क और टिम कुक जैसे दिग्गजों ने साइबर हमले के डर से अपने पर्सनल फोन घर छोड़ दिए हैं। जानें क्या है 'बर्नर फोन' का राज और क्यों अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां 'जूस जैकिंग' को लेकर अलर्ट पर हैं।

Fri, 15 May 2026 09:05 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, बीजिंग
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बिना फोन के चीन पहुंचे ट्रंप और मस्क, ड्रैगन की साइबर सेना से क्यों डरा अमेरिका?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बेहद अहम शिखर सम्मेलन के लिए चीन के दौरे पर हैं। लेकिन इस दौरे की सबसे ज्यादा चर्चा किसी राजनीतिक डील के लिए नहीं, बल्कि उनकी टीम की कड़ी डिजिटल सुरक्षा को लेकर हो रही है। ट्रंप के साथ गए अमेरिकी अधिकारियों और बड़े बिजनेसमैन ने इस यात्रा के लिए अपने निजी मोबाइल फोन और लैपटॉप घर पर ही छोड़ दिए हैं। अमेरिकी मीडिया इसे 'डिजिटल लॉकडाउन' का नाम दे रही है।

यह 'डिजिटल लॉकडाउन' क्यों लगाया गया?

जब भी कोई बड़ा अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल चीन जाता है, तो अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को यह अंदेशा रहता है कि चीन उनके उपकरणों की जासूसी कर सकता है या उन्हें हैक कर सकता है। अमेरिका का मानना है कि चीन में कोई भी डिजिटल उपकरण या नेटवर्क सुरक्षित नहीं है। इसी डर की वजह से ट्रंप के साथ गए सभी लोगों को अपने रोजमर्रा के फोन और स्मार्ट डिवाइस ले जाने की सख्त मनाही थी।

इस कड़े नियम के दायरे में कौन-कौन है?

इस नियम का पालन सिर्फ सरकारी अधिकारियों तक सीमित नहीं है। ट्रंप के साथ गए दुनिया के सबसे बड़े तकनीकी दिग्गज- जैसे एलन मस्क, टिम कुक और जेनसन हुआंग ने भी अपने पर्सनल फोन चीन नहीं ले जाए हैं।

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निजी फोन के बिना काम कैसे हो रहा है?

निजी फोन की जगह, इन सभी लोगों को सुरक्षा एजेंसियों द्वारा खास तरह के उपकरण दिए गए हैं।

क्लीन या बर्नर फोन: ये ऐसे फोन और लैपटॉप होते हैं जिनमें कोई पुराना या निजी डेटा नहीं होता। इनमें सिर्फ काम की चीजें और सीमित इंटरनेट होता है। यात्रा के बाद इन उपकरणों को या तो नष्ट कर दिया जाता है या पूरी तरह से साफ कर दिया जाता है।

गोल्डन इमेज तकनीक: इन अस्थायी फोन्स में एक खास और सुरक्षित सॉफ्टवेयर सेटअप डाला जाता है। जिसे साइबर भाषा में 'गोल्डन इमेज' कहते हैं। जब ये लोग अमेरिका वापस लौटेंगे, तो सुरक्षा टीमें इन फोन्स की जांच करेंगी और यह देखेंगी कि इस सेटअप में कोई बदलाव या हैकिंग की कोशिश तो नहीं हुई है।

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फोन चार्ज करने पर भी पाबंदी!

चीन में इन लोगों को किसी भी अनजान चार्जर, होटल के वाई-फाई या पब्लिक USB पोर्ट का इस्तेमाल करने से सख्त रूप से रोका गया है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है 'जूस जैकिंग' का खतरा।

'जूस जैकिंग' हैकिंग का एक ऐसा तरीका है जिसमें हैकर्स पब्लिक चार्जिंग पोर्ट (जैसे होटल या एयरपोर्ट के USB केबल) में वायरस सेट कर देते हैं। जैसे ही आप अपना फोन चार्जिंग पर लगाते हैं, आपका जरूरी डेटा चोरी हो सकता है या फोन में जासूसी वाला सॉफ्टवेयर (मैलवेयर) आ सकता है। इससे बचने के लिए अधिकारियों को सिर्फ सरकार द्वारा दिए गए पावर बैंक और सुरक्षित चार्जर इस्तेमाल करने की ही इजाजत दी गई है।

चीन ने इन आरोपों पर क्या कहा?

चीन ने साइबर जासूसी के इन सभी आरोपों और दावों को सिरे से खारिज किया है। चीनी दूतावास के प्रवक्ता का कहना है कि चीन हमेशा कानून के दायरे में रहकर लोगों के डेटा और निजता की सुरक्षा करता है और किसी का भी डेटा अवैध रूप से न तो मांगता है और न ही इकट्ठा करता है।

कुल मिलाकर, अमेरिका यह मानकर चल रहा है कि चीन में इंटरनेट और डिजिटल दुनिया पूरी तरह से निगरानी में है, इसलिए उन्होंने किसी भी तरह की जानकारी लीक होने से बचाने के लिए यह सख्त कदम उठाया है।

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