Shahbaz Sharif was humiliated and pushed aside at the very first meeting of the Board of Peace बोर्ड ऑफ पीस की पहली ही बैठक में शहबाज शरीफ की बेइज्जती, किनारे धकेले गए- VIDEO, International Hindi News - Hindustan
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बोर्ड ऑफ पीस की पहली ही बैठक में शहबाज शरीफ की बेइज्जती, किनारे धकेले गए- VIDEO

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को फ्रेम के अंतिम किनारों पर जगह मिली। कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ऐसे संकेतों का बड़ा महत्व होता है।

Fri, 20 Feb 2026 09:20 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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बोर्ड ऑफ पीस की पहली ही बैठक में शहबाज शरीफ की बेइज्जती, किनारे धकेले गए- VIDEO

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गाजा के पुनर्निर्माण के लिए बुलाई गई 'बोर्ड ऑफ पीस' (Board of Peace) की पहली औपचारिक बैठक पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक रूप से काफी असहज रही। वाशिंगटन में आयोजित इस हाई-प्रोफाइल बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ न केवल कूटनीतिक रूप से बल्कि सांकेतिक तौर पर भी किनारे नजर आए। इस नए घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अमेरिका की नई शांति योजना में पाकिस्तान की प्रासंगिकता कम होती जा रही है।

बैठक के बाद जारी की गई आधिकारिक ग्रुप फोटो ने पाकिस्तान की वर्तमान कूटनीतिक स्थिति की एक धुंधली तस्वीर पेश की। सूत्रों के अनुसार, जहां राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो केंद्रीय भूमिका में थे, वहीं सऊदी अरब, कतर और इंडोनेशिया जैसे देशों के नेताओं को उनके ठीक पीछे प्रमुखता दी गई। इसके विपरीत पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को फ्रेम के अंतिम किनारों पर जगह मिली। कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ऐसे संकेतों का बड़ा महत्व होता है।

गाजा पर रुख स्पष्ट न होना बनी अड़चन

बैठक में मौजूद राजनयिक सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल पूरे समय असहज दिखा। इसका मुख्य कारण गाजा के मुद्दे पर पाकिस्तान का अस्पष्ट रुख माना जा रहा है। ट्रंप की इस योजना के तहत सदस्य देशों से गाजा में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए हजारों सैनिकों की टुकड़ी भेजने की उम्मीद की गई थी।

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हालांकि पाकिस्तान ने पहले इसमें रुचि दिखाई थी, लेकिन अब इस्लामाबाद अपनी सेना भेजने में हिचकिचा रहा है। इसका परिणाम तब दिखा जब ट्रंप ने सैन्य मदद देने वाले देशों की सूची पढ़ी। उन्होंने इंडोनेशिया, मोरक्को, अल्बानिया, कोसोवो, कजाकिस्तान, मिस्र और जॉर्डन का नाम तो लिया, लेकिन पाकिस्तान का नाम इसमें शामिल नहीं था।

वाशिंगटन के गलियारों में यह चर्चा रही कि पाकिस्तान केवल बड़े दावे करता है, लेकिन जब वास्तविक प्रतिबद्धता की बात आती है तो वह पीछे हट जाता है। 70 अरब डॉलर की जरूरत वाले इस पुनर्निर्माण प्रोजेक्ट के लिए अब तक लगभग 5 अरब डॉलर ही जुट पाए हैं, जिसमें भी पाकिस्तान का कोई बड़ा योगदान नजर नहीं आया।

हालांकि,प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को उस समय थोड़ी राहत मिली जब राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने भाषण में उनकी और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की तारीफ की। ट्रंप ने पुराने विवादों को याद करते हुए मजाकिया लहजे में कहा, "मुझे यह व्यक्ति (शहबाज शरीफ) पसंद है।" उन्होंने जनरल मुनीर को 'मजबूत फाइटर' बताया और उनके हवाले से फिर वही दावा दोहराया कि ट्रंप ने भारत-पाक युद्ध रोककर 2.5 करोड़ जिंदगियां बचाईं।

पाकिस्तान की चुनौती

ट्रंप द्वारा गठित यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, जिसका लक्ष्य युद्धग्रस्त क्षेत्रों में पुनर्निर्माण और शांति स्थापित करना है। 40 से अधिक देशों और पर्यवेक्षकों (जिसमें भारत भी शामिल था) की मौजूदगी में हुई इस बैठक ने पाकिस्तान को एक कड़वी सच्चाई का अहसास कराया है। यदि इस्लामाबाद ने अपनी प्राथमिकताओं और ठोस योगदान पर स्पष्टता नहीं दिखाई तो वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर केवल एक उपस्थित सदस्य बनकर रह जाएगा, जिसकी कोई वास्तविक ताकत नहीं होगी।

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