यूक्रेन जंग की रणनीति बनाने वाले रूसी जनरल को मॉस्को में गोलियों से भूना, कौन हैं व्लादिमीर एलेक्सेव?
जनरल एलेक्सेव 2011 से जीआरयू में दूसरे सबसे शक्तिशाली अधिकारी के पद पर तैनात हैं। यूक्रेन युद्ध की रणनीतियों में उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। रूस ने इस घटना को हत्या के प्रयास का मामला मानते हुए आपराधिक जांच शुरू कर दी है।
Russia Ukraine War: रूस की राजधानी मॉस्को में रूस की सैन्य खुफिया एजेंसी (जीआरयू) के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल व्लादिमीर एलेक्सेव पर भीषण हमला हुआ है। शुक्रवार को एक अज्ञात हमलावर ने उनपर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। रूसी अधिकारियों के मुताबिक में लेफ्टिनेंट जनरल एलेक्सेव को कई गोलियां लगी हैं और उनका मॉस्को के एक अस्पताल में इलाज किया जा रहा है।
हालांकि बयान में यह नहीं बताया गया कि लेफ्टिनेंट जनरल एलेक्सेव पर हमले के पीछे किसका हाथ हो सकता है, लेकिन यह तय है कि इससे रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता एक बार फिर पटरी से उतर सकती है। बता दें कि रूस में पिछले कुछ समय में कई हाई-प्रोफाइल सैन्य अधिकारियों को निशाना बनाया गया है। इस ताजा हमले ने मॉस्को की आंतरिक सुरक्षा और खुफिया तंत्र पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घर के पास हुआ हमला
जानकारी के मुताबिक राजधानी के उत्तर-पश्चिमी इलाके में स्थित एक आवासीय इमारत के पास घात लगाकर बैठे हमलावर ने जनरल एलेक्सेव पर कई गोलियां चलाईं और मौके से फरार हो गया। हमले के तुरंत बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुयी है। वहीं रूसी जांच समिति ने इस घटना को हत्या के प्रयास का मामला मानते हुए आपराधिक जांच शुरू कर दी है।
कौन हैं जनरल एलेक्सेव
जनरल एलेक्सेव 2011 से जीआरयू में दूसरे सबसे शक्तिशाली अधिकारी के पद पर तैनात हैं और यूक्रेन युद्ध की रणनीतियों में उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है जहां एक तरफ यूक्रेन उन्हें अंतरराष्ट्रीय अपराधी मानता है, वहीं अंतरराष्ट्रीय विवादों से उनका पुराना नाता भी रहा है।
ईयू और अमेरिका ने लगाए हैं प्रतिबंध
ब्रिटेन और यूरोपीय संघ(ईयू) ने एलेक्सेव पर 2018 में सैलिसबरी (यूके) में रूसी डबल एजेंट सर्गेई स्क्रीपल और उनकी बेटी पर 'नोविचोक' नर्व एजेंट से हमला कराने का मास्टरमाइंड होने का आरोप लगाया था। इस कारण वे ईयू के प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा साल 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के दौरान साइबर हमलों और हस्तक्षेप के आरोपों के चलते अमेरिका ने भी उन पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे।
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