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पाकिस्तान टॉक्स फेल होते ही रूस का बड़ा दांव, क्रेमलिन ने ऑफर की मध्यस्थता; अमेरिका-ईरान मानेंगे?

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई महत्वपूर्ण शांति वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई है। लंबे समय तक चली इन बातचीतों में दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना रहा, जिसके बाद वार्ता बेनतीजा रही। वार्ता की इस विफलता के बाद रूस ने मध्यस्थता की भूमिका निभाने की पेशकश की है।

Sun, 12 April 2026 06:43 PMDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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पाकिस्तान टॉक्स फेल होते ही रूस का बड़ा दांव, क्रेमलिन ने ऑफर की मध्यस्थता; अमेरिका-ईरान मानेंगे?

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई महत्वपूर्ण शांति वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई है। लंबे समय तक चली इन बातचीतों में दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना रहा, जिसके बाद वार्ता बेनतीजा रही। वार्ता की इस विफलता के बाद रूस ने मध्यस्थता की भूमिका निभाने की पेशकश की है। क्रेमलिन ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की है। समाचार एजेंसी इंटरफैक्स के अनुसार, अमेरिका-ईरान वार्ता विफल होने के तुरंत बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर बातचीत की। इस कॉल में मॉस्को के क्षेत्रीय कूटनीति में सक्रिय रहने के इरादे का स्पष्ट संकेत मिला है।

क्रेमलिन द्वारा जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, पुतिन ने दोहराया कि रूस मध्य पूर्व में तनाव को राजनीतिक और राजनयिक माध्यमों से हल करने के सभी प्रयासों का समर्थन करने के लिए तैयार है। उन्होंने वार्ता के जरिए समाधान खोजने में मदद करने और क्षेत्र में न्यायपूर्ण तथा स्थायी शांति स्थापित करने के लिए मध्यस्थता प्रयासों में योगदान देने की अपनी तत्परता जताई।

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गौरतलब है कि पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता बेनतीजा रही। दोनों देशों के बीच करीब 21 घंटे तक बातचीत चली। अमेरिकी पक्ष ने वार्ता असफल रहने का कारण बताते हुए कहा कि उसने ईरान के सामने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव रखा, जबकि ईरान ने कहा कि अमेरिका की अत्यधिक मांगों के कारण समझौता नहीं हो सका। अमेरिका का प्रतिनिधित्व उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस, राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुशनर कर रहे थे। ईरान के प्रतिनिधिमंडल में संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबफ एवं विदेश मंत्री अब्बास अराघची सहित कुल 71 लोग शामिल थे।

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वेंस ने वार्ता के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि हम पिछले 21 घंटे से बात कर रहे हैं। हमने कई अहम मुद्दों पर बात की। बुरी खबर यह है कि हमारे बीच समझौता नहीं हो सका। मुझे लगता है कि यह हमसे ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने हमसे कहा था कि आपको यहां नेक नीयत से आना होगा और किसी समझौते तक पहुंचने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करना होगा। हमने वैसा ही किया, लेकिन दुर्भाग्य से, हम कोई भी प्रगति नहीं कर पाए।

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दूसरी ओर ईरान के मुख्य वार्ताकार ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई वार्ता में समझौता न हो पाने के लिए अमेरिका को दोषी ठहराया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने 'एक्स' पर सिलसिलेवार पोस्ट में कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने 21 घंटे की बातचीत के दौरान भविष्य को ध्यान में रखते हुए कई रचनात्मक योजनाएं पेश कीं लेकिन अमेरिकी ईरान का विश्वास हासिल नहीं कर सके। उन्होंने कहा कि अब अमेरिका के लिए ''यह तय करने का समय है कि वह हमारा विश्वास हासिल कर सकता है या नहीं।

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