pakistani transgender hina baloch claims 80 percent pakistan is gay 20 percent bisexual पाकिस्तान की 80 फीसदी आवाम गे, बाकी 20% बायसेक्सुअल; एक्टिविस्ट हिना बलूच ने खोले गहरे राज, International Hindi News - Hindustan
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पाकिस्तान की 80 फीसदी आवाम गे, बाकी 20% बायसेक्सुअल; एक्टिविस्ट हिना बलूच ने खोले गहरे राज

पाकिस्तानी एक्टिविस्ट हिना बलूच के वायरल वीडियो ने सनसनी मचा दी है। उन्होंने दावा किया है कि पाकिस्तान में 80% लोग गे और 20% बायसेक्सुअल हैं, और वहां कोई 'स्ट्रेट' नहीं है। जानें हिना बलूच के इस दावे और संघर्ष की पूरी कहानी।

Sat, 4 April 2026 01:43 PMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, इस्लामाबाद
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पाकिस्तान की 80 फीसदी आवाम गे, बाकी 20% बायसेक्सुअल; एक्टिविस्ट हिना बलूच ने खोले गहरे राज

पाकिस्तानी ट्रांसजेंडर कार्यकर्ता हिना बलूच का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो ने पाकिस्तान में बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। वीडियो में हिना ने दावा किया है कि पाकिस्तान में कोई भी 'स्ट्रेट' (विषमलैंगिक) नहीं है और देश की पूरी आबादी या तो समलैंगिक (Gay) है या बायसेक्सुअल (Bisexual)। उनका तर्क है कि सामाजिक दबाव, धर्म और पारिवारिक सम्मान की आड़ में पाकिस्तान में लोग अपनी कामुकता को छिपाकर रखते हैं।

पाकिस्तानी समाज का 'खुला रहस्य'

'क्वीर ग्लोबल' को दिए एक हालिया इंटरव्यू में हिना बलूच ने पाकिस्तानी समाज की इस स्थिति को एक 'खुला रहस्य' बताया। उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि पाकिस्तान की आधे से अधिक आबादी वास्तव में गे है। वे बस इसे खुलकर कहना नहीं चाहते हैं। मुझे लगता है कि पाकिस्तान की 80 प्रतिशत आबादी गे है और बाकी 20 प्रतिशत बायसेक्सुअल है। इसलिए मुझे नहीं लगता कि कामुकता के मामले में पाकिस्तान में कोई भी 'स्ट्रेट' है।'

धर्म और संस्कृति की आड़

बलूच ने तर्क दिया कि कई लोग अपनी सेक्शुअल ओरिएंटेशन (यौन रुझान) को दबाते हैं या उससे इनकार करते हैं। अपने बचपन के अनुभवों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'लोग इससे इनकार करेंगे, वे इसके बीच में धर्म को लाएंगे, वे संस्कृति का हवाला देंगे, लेकिन यह एक खुला रहस्य है।'

हिना बलूच ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों को शेयर करते हुए बताया कि उनका निजी संघर्ष कामुकता को लेकर कम, बल्कि अपनी जेंडर एक्सप्रेशन (लिंग अभिव्यक्ति) को लेकर ज्यादा था। उन्होंने बताया, 'मुझे हमेशा इस बात की चिंता सताती थी कि मैं कैसे लिपस्टिक लगाऊं ताकि परिवार से गालियां न सुननी पड़ें। मैं कैसे महिलाओं वाले कपड़े और गहने पहनूं जिससे मुझे मार न खानी पड़े?'

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समुदाय का शोषण

उन्होंने पाकिस्तान के 'ख्वाजा सरा' (ट्रांसजेंडर) समुदाय द्वारा सामना की जाने वाली प्रणालीगत और सामाजिक चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस समुदाय के कई लोगों को मजबूरन भीख मांगने, शादियों में नाचने या सेक्स वर्क (वेश्यावृत्ति) जैसे सीमित और शोषणकारी कामों में धकेल दिया जाता है।

इन सामाजिक बंधनों और शोषण को अस्वीकार करते हुए, बलूच ने जेंडर और अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए सक्रिय रूप से काम करना शुरू किया। वह 'सिंध मूरत मार्च' की सह-संस्थापक बनीं और पाकिस्तान के प्रसिद्ध 'औरत मार्च' में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने खुद को ट्रांसजेंडर और अल्पसंख्यक अधिकारों की एक मुखर पैरोकार के रूप में स्थापित किया।

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हिंसा और देश छोड़ना

बलूच ने बताया कि एक विरोध प्रदर्शन के दौरान 'प्राइड फ्लैग' फहराने के बाद उन्हें भारी हिंसक प्रतिशोध का सामना करना पड़ा था। इसके अलावा, उन्होंने कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा कथित अपहरण और दुर्व्यवहार का भी सामना किया। इन जानलेवा और खौफनाक अनुभवों ने अंततः उन्हें पाकिस्तान छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। बाद में, उन्होंने लंदन के प्रतिष्ठित 'SOAS विश्वविद्यालय' में स्कॉलरशिप हासिल की और अपनी सुरक्षा के लिए यूनाइटेड किंगडम (UK) में शरणार्थी का दर्जा मांगा।

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