मुस्लिम देशों के आगे कटोरा लेकर पहुंचा पाकिस्तान, कहीं 'अपने' भी पीछे ना खींच लें हाथ
सऊदी अरब पाकिस्तान का प्रमुख द्विपक्षीय साझेदार रहा है। उसने अब तक 5 अरब डॉलर की जमा राशि रोलओवर की है। सऊदी वित्त मंत्री ने इस्लामाबाद का दौरा किया और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात भी की थी।
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है। विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के लिए इस्लामाबाद लगातार हाथ-पैर मार रहा है। पाकिस्तान सरकार को अब सऊदी अरब और कतर से 5 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता मिलने की उम्मीद है। यह मदद पाकिस्तान की बाहरी भुगतान क्षमता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह राशि पाकिस्तान के कमजोर विदेशी भंडार को सहारा देगी, खासकर तब जब देश अप्रैल के अंत तक संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को 3.5 अरब डॉलर का कर्ज चुकाने वाला है। यह कर्ज 2018 से रोलओवर किया जा रहा था।
सऊदी अरब पाकिस्तान का प्रमुख द्विपक्षीय साझेदार रहा है। उसने अब तक 5 अरब डॉलर की जमा राशि रोलओवर की है। सऊदी वित्त मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल्लाह अल-जादान ने इस्लामाबाद का दौरा किया और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की। उन्होंने वित्तीय समर्थन देने का आश्वासन भी दिया। पाकिस्तान अब सऊदी अरब से नकद जमा राशि बढ़ाने की भी अपील कर रहा है। कतर इस सहायता में शामिल होकर यूएई की जगह लेने की संभावना रखता है, जैसा कि आईएमएफ की शर्तों में संकेत दिया गया है।
IMF और विश्व बैंक से भी मदद की उम्मीद
वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब 13 से 18 अप्रैल तक वाशिंगटन में आईएमएफ-विश्व बैंक की बैठक में भाग लेंगे। वहां वे IMF और विश्व बैंक के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। आईएमएफ ने पाकिस्तान के तीन प्रमुख द्विपक्षीय कर्जदाताओं (सऊदी अरब, चीन और यूएई) से जमा राशि बनाए रखने को कहा है। यूएई के कर्ज चुकाने के बाद कतर संभवतः नया जमा करने वाला देश बनेगा। यह आर्थिक कूटनीति पाकिस्तान को सख्त शर्तों से कुछ राहत दिला सकती है।
इस 5 अरब डॉलर की सहायता से पाकिस्तान जून तक बाहरी भुगतान आसानी से कर पाएगा। फिलहाल विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 16.4 अरब डॉलर के आसपास हैं, लेकिन उच्च आयात लागत और क्षेत्रीय तनाव से भुगतान संतुलन पर असर पड़ रहा है। यह सहायता पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने और भविष्य में कर्ज को मैनेज करने में मदद करेगी। सऊदी अरब और कतर जैसे मित्र देशों का समर्थन पाकिस्तान के लिए राहत का स्रोत रहा है, जो उसकी आर्थिक चुनौतियों को कम करने में सहायक हो सकता है।
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