पाकिस्तान में ईरान शांति वार्ता फेल, अब ड्रैगन करेगा खेला? ट्रंप ने चीन को दे दी खुली धमकी
Trump news: ईरान युद्ध को रोकने के लिए पाकिस्तान में चल रही शांति वार्ता असफल हो चुकी है। इसी बीच खबरें सामने आई हैं कि चीन, ईरान को एयर डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी में है। ट्रंप ने चीन को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने ऐसा किया, तो इसका अंजाम बुरा होगा।

Donald Trump: ईरान की जंग को थामने के लिए पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता असफल हो गई है। ईरान की तरफ से आरोप लगाया गया है कि अमेरिका ऐसी शर्तों पर युद्ध विराम चाहता है, जिसे स्वीकार करना उसके लिए संभव नहीं है। दूसरी तरफ अमेरिका का कहना है कि ईरान को सबसे आसान समझौता दिया गया था लेकिन उसको भी उन्होंने स्वीकार नहीं किया। इन सब के बीच चीन का ऐंगल भी सामने आया है। ऐसी खबरें सामने आई हैं, कि सीजफायर के दौरान चीन ईरान को अपने हथियार भेज सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को ऐसा न करने की चेतावनी दी है।
रविवार को मीडिया से बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध को लेकर चर्चा की। इसी बातचीत के दौरान ट्रंप से चीन द्वारा ईरान को हथियार सप्लाई के बारे में पूछा गया। उन्होंने जवाब देते हुए कहा, "अगर चीन ऐसा करता है, तो उसे बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा, उनके ऊपर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया जाएगा। ठीक है?" गौरतलब है कि अभी ईरान के साथ अमेरिका की लड़ाई खत्म नहीं हुई है, ऐसे में अगर तेहरान के पास चीनी हथियार आ जाते हैं, तो यह अमेरिका के लिए बड़ा खतरा होंगे।
ईरान को एयर डिफेंस देने की कोशिश कर रहा चीन: रिपोर्ट
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी खुफिया जानकारी से संकेत मिलता है कि चीन अगले कुछ हफ्तों में ईरान को नए एयर डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि इस मामले से परिचित तीन लोगों ने ऐसे संकेत दिए हैं कि बीजिंग इन खेपों को तीसरे देशों के माध्यम से भेजने की कोशिश कर रहा है ताकि उनके स्रोत को छिपाया जा सके। अज्ञात सूत्रों का हवाला देते हुए कहा गया है कि बीजिंग कंधे से दागी जाने वाली वायुरोधी मिसाइल प्रणालियों (एमएएनपीए) को स्थानांतरित करने की तैयारी कर रहा है।
इस्लामाबाद में शांति वार्ता फेल
गौरतलब है कि यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है, जब इस्लामाबाद में हुई अमेरिका औ ईरान की शांति वार्ता असफल हो चुकी है। ऐसी स्थिति में पश्चिम एशिया की जंग एक बार फिर से शुरू होने की आशंका बन रही है। इससे पहले, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने चेतावनी दी थी कि बीजिंग का ईरान के साथ अमेरिकी हितों के विपरीत तरीके से हस्तक्षेप दोनों संबंधों को जटिल बना सकता है।
ग्रीर ने सीएनबीसी को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “हमारी अर्थव्यवस्थाओं के मूल लक्ष्य बहुत अलग हैं। लेकिन आर्थिक स्थिरता बनाए रखने का एक तरीका है। यदि चीन ईरान के साथ इस तरह से हस्तक्षेप करता है, जो अमेरिकी हितों के लिए हानिकारक है, तो यह स्पष्ट रूप से संबंधों को जटिल बना देगा, और इसे समाप्त करना चीन की जिम्मेदारी है।”
बता दें, अमेरिका द्वारा ईरान पर पिछले कई दशकों से लगातार प्रतिबंध लगाए गए हैं। ऐसे में चीन ही ईरान के लिए एक बड़ा दोस्त बनकर सामने आया है। ईरान के ज्यादातर तेल उत्पादन का हिस्सा चीन ही खरीदता है। अभी हाल ही में जब होर्मुज से सभी देशों के जहाजों को निकलने में डर लग रहा था। चीनी झंडे वाले जहाज बेधड़क चल रहे थे। चीन ही ईरान की जरूरतों का ज्यादातर सामान सप्लाई करता है। 28 फरवरी के बाद ईरान ने अपना ज्यादातर एयर डिफेंस सिस्टम गंवा दिए हैं। रूस स्वयं अभी युद्ध में उलझा हुआ है, ऐसे में वह तेहरान को एयर डिफेंस सिस्टम देने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में चीन ही है, जो ईरान की इस समस्या का समाधान कर सकता है।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




साइन इन