युद्ध नहीं लेकिन हितों की रक्षा करेंगे; ईरान पर ब्रिटेन का सख्त स्टैंड, ट्रंप की '48 घंटे' पर क्या कहा?
ब्रिटेन ने ईरान से जुड़े बढ़ते संघर्ष में शामिल होने से इनकार कर दिया है। आवास, समुदाय और स्थानीय सरकार मामलों के राज्य सचिव स्टीव रीड ने रविवार को स्काई न्यूज से बात करते हुए स्पष्ट कहा कि ब्रिटेन किसी युद्ध में नहीं खिंच जाएगा, लेकिन वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

ब्रिटेन ने पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़े बढ़ते संघर्ष में शामिल होने से इनकार कर दिया है। आवास, समुदाय और स्थानीय सरकार मामलों के राज्य सचिव स्टीव रीड ने रविवार को स्काई न्यूज से बात करते हुए स्पष्ट कहा कि ब्रिटेन किसी युद्ध में नहीं खिंच जाएगा, लेकिन वह अपने राष्ट्रीय हितों और क्षेत्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। रीड ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने के लिए दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ट्रंप जो बात कर रहे हैं, उसके बारे में उनसे ही पूछा जाना चाहिए। हमारा फोकस सुरक्षा सुनिश्चित करने और तनाव कम करने पर है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि हम युद्ध में नहीं घसीटे जाएंगे, लेकिन क्षेत्र में अपने हितों की रक्षा जरूर करेंगे। हम अपने सहयोगियों के साथ मिलकर स्थिति को शांत करने के लिए काम करेंगे, क्योंकि संघर्ष को जल्द समाप्त करना ही हमारी सुरक्षा और आर्थिक हितों की सबसे बेहतर रक्षा है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार शाम ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी कि अगर 48 घंटों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी धमकी के पूरी तरह नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के विभिन्न बिजली संयंत्रों पर हमला कर उन्हें 'नष्ट' कर देगा, और यह कार्रवाई सबसे बड़े संयंत्र से शुरू होगी।
इससे पहले ट्रंप ने अपने सहयोगियों, खासकर नाटो देशों को 'कायर' करार देते हुए फटकार भी लगाई थी और कहा था कि अमेरिका के बिना नाटो 'कागजी शेर' है। उन्होंने लिखा था कि सहयोगी ईरान के खिलाफ सैन्य सहायता देने में विफल रहे हैं और कायरों, हम याद रखेंगे! ट्रंप की इन टिप्पणियों पर सवाल करने पर रीड ने सीधा जवाब देने से परहेज किया और कहा कि डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में खुद अपनी बात कह सकते हैं और वे जो भाषा इस्तेमाल करना चाहें, वह उनका फैसला है।
गौरतलब है कि ब्रिटेन की ओर से यह बयान ऐसे समय आया है जब 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में तनाव लगातार बढ़ रहा है और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ रहा है। ऐसे में ब्रिटेन ने साफ कर दिया है कि वह युद्ध में तो शामिल नहीं होगा, लेकिन हितों के साथ कोई समझौता भी नहीं करेगा।
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