Netherlands returns 1000 year old Chola Empire copper plates PM Modi says moment of happiness for every Indian नीदरलैंड्स ने लौटाईं 1000 साल पुरानी कॉपर प्लेट्स, पीएम मोदी बोले- हर भारतीय के लिए खुशी का क्षण, International Hindi News - Hindustan
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नीदरलैंड्स ने लौटाईं 1000 साल पुरानी कॉपर प्लेट्स, पीएम मोदी बोले- हर भारतीय के लिए खुशी का क्षण

पीएम मोदी की नीदरलैंड्स यात्रा के दौरान वहां की सरकार ने भारत को तोहफा दिया है। दशकों पहले भारत में डच शासन के दौरान यहां से ले जाए गए चोल साम्राज्य के कॉपर प्लेट्स को नीदरलैंड्स सरकार ने लौटा दिया है। इन कॉपर प्लेट्स को जिंदा अभिलेख कहा जाता है।

Sat, 16 May 2026 10:32 PMUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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नीदरलैंड्स ने लौटाईं 1000 साल पुरानी कॉपर प्लेट्स, पीएम मोदी बोले- हर भारतीय के लिए खुशी का क्षण

नीदरलैंड्स की यात्रा पर गए प्रधानमंत्री मोदी को वहां की सरकार ने एक खास तोहफा दिया है। भारत की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करते हुए यूरोपीय देश ने 1000 साल पुराना चोल साम्राज्य का कॉपर प्लेट्स सेट (लीडेन प्लेट्स) भारत को लौटा दिया है। बता दें, भारत सरकार इन अभिलेखों की मांग पिछले कई सालों से कर रही है। इन कॉपर प्लेट्स को ऐतिहासिक रूप से सबसे मूल्यवान जीवित अभिलेखों में से एक माना जाता है।

भारत द्वारा लंबे समय से इन अभिलेखों की वापसी का प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस क्षण को हर भारतीय के लिए खुशी का पल बताया। उन्होंने लिखा, "हर भारतीय के लिए यह खुशी का क्षण है। 11वीं शताब्दी के चोल कॉपर प्लेट्स नीदरलैंड्स से वापस लाए जा रहे हैं। मैंने प्रधानमंत्री रॉब जेटेन की उपस्थिति में आयोजित समारोह में भाग लिया।"

इन ताम्र पत्रों के बारे में आगे बताते हुए पीएम मोदी ने लिखा, "इन चोल ताम्रपत्रों में 21 बड़े और 3 छोटे प्लेट शामिल हैं, जिनमें से अधिकांश पर विश्व की सबसे सुंदर भाषाओं में से एक, तमिल भाषा में लेख अंकित हैं। ये महान राजेंद्र चोल प्रथम द्वारा अपने पिता, राजा राजाराजा प्रथम द्वारा किए गए मौखिक वादे को औपचारिक रूप देने से संबंधित हैं। ये चोलों की महानता को भी दर्शाते हैं। भारत में हम चोलों, उनकी संस्कृति और उनकी समुद्री शक्ति पर अत्यंत गर्व करते हैं।"

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भारत से डच ले गए थे यह कॉपर प्लेट्स

चोल साम्राज्य के दौर के यह कॉपर प्लेट्स नीदरलैंड कैसे पहुंचे इसको लेकर भी एक कहानी है। 12वीं सदी से लेकर 18वीं सदी तक यह प्लेट्स नागपट्टिनम में ही सुरक्षित रखे हुए थे। 18वीं सदी में जब यहां पर डचों का कब्जा हुआ उस समय पर फ्लोरोटियस कैम्पर इसे अपने साथ नीदलैंड्स ले गया। इसके बाद कई दशकों तक यह अभिलेख वहां पर सुरक्षित रखी रहीं। समय के साथ यूरोपीय इतिहासकारों के बीच में यह तमिल शिलालेख प्रसिद्ध हो गए।

इस दौरान भारत की तरफ से लगातार इन्हें वापस करने का अनरोध किया जाता रहा। इसके बाद भारत के दावे पर रिटर्न एंड रेस्टिट्यूशन पर इंटर गर्वमेंटल समिति ने भारत की मांग को जायज माना। समिति ने भारत को इन ताम्रपत्रों का वैध मूल देश माना और दोनों सरकारों के बीच वापसी को लेकर बातचीत को प्रोत्साहित किया। इसके बाद डच सरकार भी इसे वापस करने के लिए तैयार किया।

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बहुत ही दुर्लभ हैं यह अभिलेख

नीदरलैंड्स ने जिन कॉपर प्लेट्स को भारत को वापस लौटाया है, वह चोल सम्राट राजाराज चोल 1 के समय से संबंधित है। इन कॉपर प्लेट्स सेट में 21 कॉपर की प्लेटें हैं, जिनका वजन करीब 30 किलोग्राम है। इन्हें एक कांसे के छल्ले से जोड़ा गया है, जिस पर चोल साम्राज्य की मुहर लगी हुई है। अभिलेखों के एक तरफ संस्कृत लिखी हुई है, दूसरी तरफ तमिल भाषा लिखी हुई है।

दरअसल, यह अभिलेख नागपट्टिनम स्थित एक बौद्धमठ से संबंधित है। चोल सम्राट राजाराज प्रथम ने अपने शासन काल के दौरान बौद्धमठ को मौखिक रूप से दिए दान को ताड़पत्रों पर लिखाया था। इसके बाद उनके बेटे सम्राट राजेंद्र चोल प्रथम ने इन्हें तांबे के प्लेटों पर लिखवाया था। इसके बाद इन्हें बांधने वाले छल्ले पर राजेंद्र चोल का निशान बना हुआ है।

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