Nepal rejects third party involvement in border issue with India after Balen Shah controversial remark जल्दी ठिकाने आ गई नेपाल की अक्ल, भारत के साथ सीमा विवाद पर बदल गए सुर; क्या बोले बालेन के मंत्री?, International Hindi News - Hindustan
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जल्दी ठिकाने आ गई नेपाल की अक्ल, भारत के साथ सीमा विवाद पर बदल गए सुर; क्या बोले बालेन के मंत्री?

नेपाल और भारत के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर पुराना सीमा विवाद है। नेपाल इस पर अपना दावा करता रहा है। हालांकि भारत ने स्पष्ट किया है कि ये क्षेत्र भारत का हिस्सा हैं।

Thu, 11 June 2026 01:52 PMJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान, काठमांडू
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जल्दी ठिकाने आ गई नेपाल की अक्ल, भारत के साथ सीमा विवाद पर बदल गए सुर; क्या बोले बालेन के मंत्री?

भारत के साथ सीमा विवाद पर ऊलजलूल बयान देने के बाद अब नेपाल की अक्ल ठिकाने आ गई है। पिछले महीने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने यह कह कर विवाद खड़ा कर दिया था कि भारत के साथ सीमा विवादों को सुलझाने के लिए वे चीन और ब्रिटेन के पास जाएंगे। इसके बाद भारत ने नेपाल को अच्छे से समझा दिया था कि इस मामले में किसी भी तीसरे देश का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब नेपाल ने भी इस पर सहमति जताई है। नेपाल के विदेश मंत्री ने संसद में कहा है कि भारत-नेपाल सीमा विवाद पूरी तरह से एक द्विपक्षीय मामला है और इसमें किसी भी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।

नेपाली संसद को संबोधित करते हुए शिशिर खनाल ने प्रधानमंत्री बालेन शाह के बयान से उपजे विवाद को शांत करने की कोशिश की। उन्होंने अपने भाषण में कहा, “मैं इस सदन में यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि नेपाल-भारत सीमा एक द्विपक्षीय मुद्दा है। नेपाल हमेशा से इस समस्या को दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक समझौतों के आधार पर बातचीत के जरिए सुलझाना चाहता है।”

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नेपाली विदेश मंत्री की सफाई

नेपाली विदेश मंत्री ने आगे सफाई दी कि प्रधानमंत्री का इरादा किसी तीसरे पक्ष से मध्यस्थता कराने का नहीं था, जबल्कि उनका मतलब यह था कि अगर चीन या ब्रिटेन के पास 'सुगौली संधि' के दौर के ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध हों, तो उनका उपयोग तकनीकी प्रक्रिया में मदद के लिए किया जा सकता है। बता दें कि इससे पहले शिशिर खनाल भारत दौरे पर भी आए थे। यहां भी उन्होंने भारत के साथ सीमा विवादों को आपसी बातचीत के जरिए सुलझाने की बात कही। इसके बाद अब उन्होंने संसद में भी सफाई दी है।

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क्या बोले थे नेपाली पीएम?

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने बीते महीने संसद में एक बयान देते हुए कहा कि जैसे भारत ने नेपाल की जमीन पर अतिक्रमण किया है, वैसे ही नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर अतिक्रमण किया है। इस दौरान उन्होंने विवाद सुलझाने के लिए चीन और ब्रिटेन का जिक्र करने लगे। शाह ने संसद में कहा था, “आपको एक तथ्य जानकर आश्चर्य होगा, जो मुझे प्रधानमंत्री बनने के बाद ही पता चला है। सिर्फ भारत ने नेपाली क्षेत्रों पर अतिक्रमण किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई स्थानों पर भारत के क्षेत्रों पर अतिक्रमण किया है। अब दोनों देशों को तथ्यों की जांच करनी चाहिए और एक साथ बैठकर इस मुद्दे का हल करना चाहिए।”

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नेपाली प्रधानमंत्री ने कहा कि काठमांडू ने इस मुद्दे पर चीन और ब्रिटेन के साथ राजनयिक चर्चा भी की है। शाह ने कहा कि उन्होंने ब्रिटेन के साथ यह मामला इसलिए उठाया, क्योंकि यह उस दौर से जुड़ा है जब ब्रिटिश सरकार इस क्षेत्र को छोड़ कर गई थी। उनके इस बयान पर खूब विवाद हुआ। उन्हें अपने देश में ही आलोचना झेलनी पड़ी और इसीलिए अब सरकार डैमेज कंट्रोल में जुटी है।

भारत ने समझा दिया था

बता दें कि नेपाल और भारत के बीच कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को लेकर पुराना सीमा विवाद है। नेपाल इसके हिस्सों पर अपना दावा करता आया है। लेकिन भारत ने स्पष्ट किया है कि ये क्षेत्र भारत के उत्तराखंड का हिस्सा हैं। भारत ने विवाद की स्थिति में मुद्दे को द्विपक्षीय बातचीत के जरिए हल किए जाने की बात भी कही है। वहीं नेपाली PM के बयान पर भी भारत ने कड़ी आपत्ति जताई थी। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा था कि भारत-नेपाल सीमा का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा निर्धारित हो चुका है, लेकिन कुछ हिस्से अभी भी अनसुलझे हैं। मंत्रालय ने बताया कि गंडक नदी के मार्ग में बदलाव की वजह से यह स्थिति बनती है।

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