हंता वायरस का प्रकोप, घूमना-फिरना कितना सुरक्षित? विशेषज्ञों ने दे डाली चेतावनी
हंता वायरस इन दिनों सुर्खियों में हैं। इसी साल एक अप्रैल को अर्जेंटीना से रवाना हुए क्रूज में इस वायरस से पीड़ितों के मिलने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। क्रूज शिप पर इस वायरस के मिलने के बाद सवाल उठने लगा है कि क्या इन हालात में यात्रा करना सुरक्षित है?
हंता वायरस इन दिनों सुर्खियों में हैं। इसी साल एक अप्रैल को अर्जेंटीना से रवाना हुए क्रूज में इस वायरस से पीड़ितों के मिलने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। क्रूज शिप पर इस वायरस के मिलने के बाद सवाल उठने लगा है कि क्या इन हालात में यात्रा करना सुरक्षित है? अगर यात्रा करनी ही पड़े तो किस तरह के बचाव के उपाय किए जाने चाहिए? बता दें कि डब्लूएचओ से मिली जानकारी के मुताबिक डच कंपनी के जहाज पर कुल 147 यात्री सवार थे। इसमें से आठ लोग वायरस की चपेट में आए और तीन की मौत हो गई। इसमें एक डच कपल और एक जर्मनी का यात्री है।
आपके घूमने-फिरने पर कैसे डाल सकता है असर?
फिलहाल तो तनाव की ज्यादा बात नहीं है। डब्लूएचओ और एक्सपर्ट्स ने जोर देकर कहा है कि आम टूरिज्म पर इसका असर नहीं पड़ने वाला है। हालांकि अगर आपने पोलर क्षेत्रों या फिर किसी अन्य दूर देश के लिए क्रूज शिप बुक की है तो आपको सावधान रहने की जरूरत है। इसके तहत आप ऑपरेटर्स से कुछ बेसिक सवाल पूछ सकते हैं। मसलन, उनसे पूछ सकते हैं कि शिप पर स्वास्थ्य की निगरानी के इंतजाम क्या हैं? वहीं, अगर आप किसी ऐसे इलाके से यात्रा से लौटे हैं, जहां पर लोग इस वायरस से प्रभावित रहे हैं तो 45 दिनों तक लक्षणों पर नजर रखने की जरूरत है। किसी तरह की परेशानी होने पर मेडिकल सलाह ली जानी चाहिए।
साफ-सफाई का रखें ख्याल
इसके अलावा अगर आप कहीं दूर जा रहे हैं तो ऐसे इलाकों में जाने से बचें जहां पर हाल ही में इस वायरस का प्रकोप फैला है। साफ-सफाई का ख्याल रखें। वहीं, घूमने जाने के दौरान वायरस से प्रभावित इलाकों में आउटिंग से बचें। खासतौर पर हाइकिंग, कैंपिंग और फार्म विजिट के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतें।
क्या यात्रा करना पूरी तरह से सुरक्षित
वैसे भी यात्रा के दौरान तमाम तरह के रिस्क रहते हैं। लेकिन मौजूदा हालात में यह थोड़ा परेशानी बढ़ाने वाला है। खासतौर पर किसी क्रूज यात्रा पर जाना या इंटरनेशनल ट्रैवेल बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी इन दिनों किसी अन्य देश की यात्राओं को लेकर भी चेतावनी जारी की है। हालांकि अच्छी बात यह है कि यह वायरस कोविड-19 या इंफ्लुएंजा जैसा खतरनाक नहीं है। विशेषज्ञों ने घबराहट से बचने की सलाह दी है। हालांकि सूचना, सतर्कता और सावधानी रखने की सलाह दी गई है।
क्या है हंता वायरस और कैसे फैलता है?
हंता वायरस मुख्य रूप से संक्रमित चूहों और मूषकों के मल-मूत्र के संपर्क से फैलता है। यह वायरस तब चर्चा में आया था, जब पिछले वर्ष न्यू मैक्सिको में अभिनेता जीन हैकमैन की पत्नी बेट्सी अराकावा की इसके संक्रमण से मृत्यु हो गई थी। डब्ल्यूएचओ के अनुसार हंता वायरस का संक्रमण दुर्लभ है, लेकिन कुछ मामलों में यह व्यक्ति से व्यक्ति में भी फैल सकता है। इसका कोई विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं है, हालांकि समय पर चिकित्सा मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।
हंता वायरस के लक्षण क्या हैं
डब्लूएचओ के मुताबिक दूसरे देशों की लंबी यात्रा के दौरान इस वायरस का खतरा है। इस वायरस की चपेट में आने के बाद एक से आठ हफ्ते के अंदर लक्षण दिखने लग जाते हैं। इसके शुरुआती लक्षणों में सिर में दर्द, थकान, सर्दी लगना, बुखार आना और मांसपेशियों में दर्द शामिल है। इसके अलावा गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं जैसे कि मतली, उल्टी, दस्त, और पेट में दर्द भी हो सकता है। वहीं, गंभीर मामलों में, यह अचानक सांस लेने में परेशानी और लो ब्लड प्रेशर तक की समस्या हो सकती है।
क्या है इलाज
फिलहाल हंता वायरस का कोई सटीक इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। अभी तक की जानकारी के मुताबिक गहन बचाव के साथ ही बीमार व्यक्ति को ठीक किया जा सकता है। एशिया और यूरोप में इस वायरस से प्रभावित मरने के केस काफी कम है। हालांकि अमेरिका में इसके चलते 50 फीसदी से ज्यादा मौतें हुई हैं। इसमें भी वहां पर मौतें ज्यादा हैं, जहां पर कुछ खास स्ट्रेन्स को ढंग से मैनेज नहीं किया जा सका।
डब्लूएचओ ने क्या कहा
इस बीच डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने हंता वायरस पर आश्वासन दिया है। उन्होंने कहाकि मैं जानता हूं कि आप चिंतित हैं। 2020 का दर्द अभी भी ताजा है, लेकिन यह कोई दूसरा कोविड-19 नहीं है। हंता वायरस से वर्तमान सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम कम बना हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि डब्ल्यूएचओ के आकलन के अनुसार स्थिति नियंत्रण में है और एमवी होंडियस पर मौजूद वायरस हंता वायरस का ‘एंडीज स्ट्रेन’ है। हालांकि यह गंभीर है और इसमें तीन लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन आम जनता के लिए इसका जोखिम कम है।
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