Iranian forces destroyed around 180 drones and targeted US F-35 stealth fighter jet ईरानी सेना ने 180 ड्रोन मार गिराए, F-35 फाइटर जेट को बनाया निशाना; US को भारी नुकसान का दावा, International Hindi News - Hindustan
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ईरानी सेना ने 180 ड्रोन मार गिराए, F-35 फाइटर जेट को बनाया निशाना; US को भारी नुकसान का दावा

ईरानी स्पीकर ने कहा कि पश्चिमी देशों की ओर से दबाव डालने और धमकियां देने की कोशिशें विफल हो गईं, जिसके बाद बातचीत शुरू हुई। उन्होंने जोर दिया कि दुश्मन चेतावनियां और समय सीमा तय करके अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर सका।

Sun, 19 April 2026 04:31 PMNiteesh Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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ईरानी सेना ने 180 ड्रोन मार गिराए, F-35 फाइटर जेट को बनाया निशाना; US को भारी नुकसान का दावा

ईरान की सेनाओं ने लगभग 180 ड्रोनों को नष्ट कर दिया और अमेरिकी F-35 स्टेल्थ फाइटर जेट को भी निशाना बनाया। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गलीबाफ ने रविवार को यह दावा किया। उन्होंने इसे ईरान की बढ़ती सैन्य क्षमता का सबूत बताया। रिपोर्ट के अनुसार, गलीबाफ ने कहा कि F-35 पर हमला कोई एक बार की घटना नहीं है, बल्कि यह तकनीकी और डिजाइन क्षमताओं के चलते सुनियोजित कार्रवाई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि F-35 के पास गिरी मिसाइल ने दुश्मन को यह एहसास करा दिया कि ईरान के पास क्या क्षमताएं हैं और वह किस दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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मोहम्मद बागेर गलीबाफ ने कहा कि ईरान की डिफेंस टेक्नोलॉजी में प्रगति का संकेत देने के लिए यह घटना जानबूझकर की गई। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने पिछले महीने स्वीकार किया था कि F-35 जेट को ईरानी गोलीबारी से क्षतिग्रस्त होने के बाद आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी। सीएनएन ने अज्ञात सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी थी कि विमान पर संदिग्ध ईरानी हमला हुआ था। स्पीकर ने इन सैन्य घटनाओं को कूटनीति से जोड़ते हुए बताया कि अमेरिका के साथ बातचीत में कुछ मुद्दों पर सहमति बनी है, लेकिन कई अन्य मुद्दों पर अभी भी गहरे मतभेद बने हुए हैं।

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डोनाल्ड ट्रंप पर जमकर साधा निशाना

ईरानी स्पीकर ने कहा कि पश्चिमी देशों की ओर से दबाव डालने और धमकियां देने की कोशिशें विफल हो गईं, जिसके बाद बातचीत शुरू हुई। उन्होंने जोर दिया कि दुश्मन चेतावनियां और समय सीमा तय करके अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर सका, इसलिए अब मध्यस्थों के जरिए संदेश भेज रहा है। हालिया युद्धविराम पर उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के लिए इसके पीछे के मकसद अलग-अलग थे। ईरान ने अपनी मांगों को पूरा कराने के रणनीतिक कदम के रूप में युद्धविराम स्वीकार किया, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे इसलिए माना क्योंकि युद्ध के मैदान में ईरान विजेता था।

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मोहम्मद बागेर गलीबाफ ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ईरान के शासन परिवर्तन और उसकी आक्रामक व मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करने में असफल रहे। उन्होंने साफ कहा कि ईरान वेनेजुएला नहीं है और अमेरिकी प्रशासन ईरान की रक्षा व्यवस्था को तोड़ नहीं पाया। इससे पता चलता है कि ईरान अपनी सैन्य क्षमताओं पर गर्व करता है और इसे कूटनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रहा है। F-35 जैसे अत्याधुनिक विमान को निशाना बनाना ईरान की बढ़ती तकनीकी ताकत का प्रदर्शन माना जा रहा है। हालांकि, दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है, लेकिन प्रमुख मुद्दों पर अभी भी मतभेद बने हुए हैं।

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