Iran War Proving Costly for US as Trump Forced to Seek help But Allies Given Cold Shoulder अमेरिका को महंगा पड़ रहा ईरान युद्ध! मदद मागने को मजबूर हुए ट्रंप, मित्र देशों ने भी दिखाया ठेंगा, International Hindi News - Hindustan
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अमेरिका को महंगा पड़ रहा ईरान युद्ध! मदद मागने को मजबूर हुए ट्रंप, मित्र देशों ने भी दिखाया ठेंगा

अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों से मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए युद्धपोत मांगे हैं। जानिए क्या बोले यूरोपीय देश और ईरान युद्ध की ताजा स्थिति।

Tue, 17 March 2026 09:08 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, वाशिंगटन
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अमेरिका को महंगा पड़ रहा ईरान युद्ध! मदद मागने को मजबूर हुए ट्रंप, मित्र देशों ने भी दिखाया ठेंगा

मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान की जंग ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के हमलों से बंद हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए नाटो सहयोगियों, यूके, जापान, ऑस्ट्रेलिया और यहां तक कि चीन से भी युद्धपोत भेजने की अपील की है। लेकिन जर्मनी, इटली, स्पेन समेत कई मित्र देशों ने साफ मना कर दिया। उनका कहना है कि 'यह हमारा युद्ध नहीं है।' इस वजह से ट्रंप को घरेलू दबाव और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है, जबकि तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह स्थिति कैसे बनी और इसका अमेरिका पर क्या असर पड़ रहा है।

जंग की शुरुआत और होर्मुज संकट

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए। ट्रंप ने दावा किया कि यह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने और विश्व युद्ध III टालने के लिए जरूरी था। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ड्रोन, मिसाइल और माइन्स से बंद कर दिया- यह वह जलडमरूमध्य है जिससे दुनिया के 20% तेल और LNG का परिवहन होता है। ईरान ने तेल टैंकरों पर हमले भी किए, जिससे शिपिंग रुक गई।

नतीजा? तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। गैस की कीमतें बढ़ीं, स्टॉक मार्केट गिरे और वैश्विक महंगाई का खतरा मंडराने लगा। अमेरिका में भी पेट्रोल-डीजल महंगा हुआ, शेयर बाजार प्रभावित हुए और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा। ईरान में अब तक 1500 से ज्यादा लोग मारे गए, जबकि अमेरिकी सेना के 13 सैनिक शहीद हो चुके हैं। 32 लाख ईरानी विस्थापित हो गए।

ट्रंप ने मदद क्यों मांगी- और कैसे मजबूर हुए?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लगभग सात देशों से 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को खुला रखने के लिए युद्धपोत भेजने की मांग की है। यह जलमार्ग वैश्विक कच्चे तेल के व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस बीच, यूरोप इस बात को लेकर चिंतित है कि यह युद्ध कब तक चलेगा और क्या उन्हें अपने युद्धपोत भेजने चाहिए।

ट्रंप ने शुरू में दावा किया था कि अमेरिका को किसी की मदद नहीं चाहिए, 'हम दुनिया की सबसे ताकतवर सेना हैं।' लेकिन होर्मुज बंद होने से तेल सप्लाई प्रभावित होने और घरेलू आलोचना बढ़ने पर उन्होंने यूरोपीय देशों, एशियाई सहयोगियों और यहां तक कि चीन-जापान से युद्धपोत भेजने की अपील की। उन्होंने कहा कि तेल आयात करने वाले देशों को खुद अपनी सुरक्षा करनी चाहिए। ट्रंप ने चेतावनी भी दी कि हम याद रखेंगे और कुछ देशों को बहुत बुरा भविष्य का हवाला दिया। 16 मार्च 2026 को ट्रंप ने दावा किया कि कई देश मदद के लिए रास्ते पर हैं और कुछ पहुंच भी चुके हैं। लेकिन वास्तविकता अलग है।

मित्र देशों का रुख: नॉट अवर वॉर

ज्यादातर सहयोगी ने साफ इनकार कर दिया। जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरीस पिस्टोरियस ने कहा कि ट्रंप को उम्मीद है कि यूरोपीय फ्रिगेट क्या करेंगे जो अमेरिकी नेवी नहीं कर सकती? यह हमारा युद्ध नहीं है। हमने शुरू नहीं किया। जर्मन सरकार ने याद दिलाया कि युद्ध शुरू होने से पहले न तो अमेरिका ने सलाह ली और न ही यूरोपीय मदद मांगी थी।

इटली के उप प्रधानमंत्री माटियो साल्विनी बोले कि इटली किसी से युद्ध नहीं लड़ रही। युद्ध क्षेत्र में जहाज भेजना मतलब युद्ध में कूदना है। स्पेन, पोलैंड, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया, जापान ने भी स्पष्ट रूप से मना कर दिया। जापान और ऑस्ट्रेलिया ने कोई सैन्य जहाज भेजने से इनकार किया। यूके और डेनमार्क ने सीमित मदद (जैसे माइन स्वीपिंग ड्रोन) पर विचार किया है, लेकिन पूर्ण सैन्य अभियान से दूर हैं। ईयू की विदेश नीति प्रमुख काया कालास ने कहा कि होर्मुज नाटो क्षेत्र से बाहर है। विदेश मंत्रियों की बैठक में नौसेना अभियान बढ़ाने का प्रस्ताव खारिज हो गया। यह अस्वीकृति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रंप ने युद्ध शुरू करने से पहले कोई गठबंधन नहीं बनाया था। अब जब संकट गहराया तो मदद मांगनी पड़ी।

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फिनलैंड के राष्ट्रपति की दो टूक

फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने कहा है कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए नाटो गठबंधन के भविष्य को दांव पर लगाते हैं, तो सहयोगियों को उनकी बातों को गंभीरता से लेना चाहिए। रविवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने जोर देकर कहा कि नाटो और एशियाई सहयोगियों को होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस शिपमेंट की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने में मदद करनी चाहिए। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी सहयोगी इस मामले में सहायता करने में विफल रहते हैं, तो नाटो को एक बहुत बुरे भविष्य का सामना करना पड़ सकता है।

सोमवार को ब्लूमबर्ग टेलीविजन को दिए एक इंटरव्यू में राष्ट्रपति स्टब ने कहा कि जाहिर है, हमें अमेरिका के राष्ट्रपति की हर बात को गंभीरता से लेना होगा। उन्होंने कहा कि जिन देशों के पास अमेरिका की मदद करने की क्षमता और इच्छा है, उन्हें ऐसा करना चाहिए। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि एक रक्षात्मक गुट के रूप में नाटो इस तरह के सीधे सैन्य हमले नहीं करता है। मध्य पूर्व में शांति की आवश्यकता पर बल देते हुए स्टब ने सुझाव दिया कि इसमें यूरोपीय देश या भारत मध्यस्थ के रूप में शामिल हो सकते हैं। स्टब ने माना कि ईरान पर हुए मूल सैन्य अभियान के बारे में सहयोगियों के साथ पहले चर्चा नहीं की गई थी, लेकिन उन्हें यकीन है कि ट्रंप अब यूके, फ्रांस और जर्मनी के साथ बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस शांति प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा यह है कि इजराइल, अमेरिका और ईरान- इन तीनों प्रमुख खिलाड़ियों के हित एक-दूसरे से काफी अलग हैं।

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