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रूसी तेल खरीदने के लिए US ने भारत को क्यों दी 30 दिन की 'छूट'? ट्रंप के मंत्री ने बताया

ईरान युद्ध के बीच अमेरिका ने रूसी तेल खरीद के लिए भारत को दी छूट पर पूरा प्लान बताया है। अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कियह एक अस्थायी कदम है, जिसका उद्देश्य ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के कारण कच्चे तेल के बाजार पर पड़े दबाव को कम करना है।

Sat, 7 March 2026 01:23 AMUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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रूसी तेल खरीदने के लिए US ने भारत को क्यों दी 30 दिन की 'छूट'? ट्रंप के मंत्री ने बताया

ईरान युद्ध के बीच अमेरिका की तरफ से दावा किया गया है कि उसने भारत को 30 दिन तक रूसी तेल खरीदने की 'छूट' दी है। देश में विपक्षी पार्टियां लगातार अमेरिका की तरफ से अपनाई गई इस शब्दावली पर सवाल उठा रही हैं। इसी बीच, ट्रंप के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने अमेरिका के इस फैसले के पीछे की वजह बताई है। उन्होंने कहा कि यह एक अस्थायी कदम है, जिसका उद्देश्य ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के कारण कच्चे तेल के बाजार पर पड़े दबाव को कम करना है। क्रिस राइट से पहले अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने रूसी तेल खरीद के लिए भारत को 30 दिन की छूट देने का ऐलान किया था। इसके बाद से ही भारत में इस शब्दावली को लेकर सरकार पर हमला होना शुरू हो गया था। विपक्ष की तरफ से कहा गया कि आखिर एक संप्रभु देश होने के नाते अमेरिका भारत को कैसे कोई अनुमति दे सकता है।

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अब एबीसी न्यूज से बात करते हुए अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा, "हमने तेल की कीमतों को कम रखने के लिए कुछ अल्पकालिक उपाय लागू किए हैं। हम अपने मित्र भारत को यह अनुमति दे रहे हैं कि जो रूसी तेल पहले से जहाजों में है, उसे खरीदे, अपनी रिफाइनरियों में उसे प्रोसेस करे और जल्दी से बाजार में उपलब्ध कराए। यह आपूर्ति को जारी रखने और बाजार पर दबाव कम करने का एक व्यावहारिक तरीका है।” उन्होंने कहा कि यह अमेरिकी नीति में बदलाव नहीं बल्कि एक अल्पकालिक उपाय है।

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दरअसल, यह वही अमेरिका है, जो कुछ महीनों पहले रूसी तेल खरीदने के लिए भारत के ऊपर 25 फीसदी टैरिफ लगाए हुए था। इसके बाद भी भारत सरकार ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रूसी तेल को खरीदना जारी रखा था। ईरान युद्ध की वजह से होर्मुज स्ट्रेट पर खतरनाक स्थिति बन गई है। इस वजह से वैश्विक ऊर्जा बाजार में मांग की तुलना में आपूर्ति घटने की स्थिति बन गई है। भारत, रूसी तेल को प्रोसेस करके दुनिया भर में पहुंचाता रहा है। ऐसे में अगर अमेरिका चाहता है कि भारत ऐसा करता रहे।

बेसेंट ने क्या कहा था?

अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला करने से पहले इसे कुछ दिन का युद्ध समझकर अपनी नीति बनाई थी, लेकिन खामेनेई के मारे जाने के बाद ईरान की जनता में विरोध की ज्यादा आवाज नहीं आ रही है। इसकी वजह से अब इस युद्ध के लंबे खिंचने की आशंका बढ़ गई है। ऐसे में ईरान ने हमला करके होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिका और बाकी देशों के लिए बंद कर दिया है। ऐसे में गुरुवार को अमेरिकी वित्त मंत्री ने भारत को 30 दिनों के लिए रूसी तेल खरीद की छूट देने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा, "भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण साझेदार है, और हमें उम्मीद है कि नई दिल्ली भविष्य में अमेरिका से तेल की खरीद बढ़ाएगा। यह अस्थायी कदम ईरान द्वारा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बनाए गए दबाव को कम करेगा।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह जानबूझकर अल्पकालिक कदम है और इससे रूस सरकार को ज्यादा आर्थिक लाभ नहीं होगा, क्योंकि यह केवल उस तेल से संबंधित है जो पहले से समुद्र में जहाजों पर फंसा हुआ है।

हालांकि आपको बता दें, भारत सरकार की तरफ से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। भारतीय जनता पार्टी की तरफ से जरूर इस बात को कहा गया है कि भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद को केवल कम किया था, बंद नहीं किया था। ऐसे में अगर भारत को खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति नहीं होगी, तो निश्चित तौर पर वह कच्चे तेल के दूसरे विकल्पों की ओर देखेगा।

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