ईरान को प्यासा तड़पाने की कोशिश में US? वॉटर प्लांट पर हमला, विदेश मंत्री ने दी चेतावनी
ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि अमेरिकी सेना ने केशम द्वीप पर मौजूद वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट को निशाना बनाया है, जिसकी वजह से 30 गांवों की जल आपूर्ति बाधित हुई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को ऐसी हरकतों का परिणाम भुगतना होगा।

iran news update: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे युद्ध ने पूरे विश्व को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। तमाम देश संभावित ऊर्जा संकट से बचाने की जुगत में लगे हुए हैं। ईरान लगातार हमलों का सामना कर रहा है और पलटवार भी कर रहा है। इसी बीच, ईरानी विदेश मंत्री ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान के केशम द्वीप पर मौजूद एक वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट (समुद्र के पानी को मीठे पानी में बदलने वाली सुविधा) को निशाना बनाया है। उन्होंने कहा कि इससे लगभग आस पास के 30 गांवों की जलापूर्ति प्रभावित हुई है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया साइट पर किए गए पोस्ट में इस हरकत के लिए अमेरिका पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, "अमेरिका ने केशम द्वीप पर मौजूद मीठे पानी के विलवणीकरण संयंत्र पर हमला करके एक घोर और हताश अपराध किया है। इससे 30 गांवों में पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई है। ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला करना एक खतरनाक कदम है जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। यह मिसाल अमेरिका ने कायम की है, ईरान ने नहीं।" अभी तक इस हमले और आरोप पर अमेरिका की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है।
युद्ध के बीच गंभीर जल संकट की ओर बढ़ता ईरान
ईरान युद्ध के बीच दुनिया भले ही तेल की कीमतों और उसकी उपलब्धता को लेकर चिंतित हो, लेकिन ईरान के लिए युद्ध के अलावा दूसरा सबसे बड़ा संकट पानी ही है। ईरान दुनिया के सबसे अधिक जल-संकट झेलने वाले देशों में से एक है। वहां के लगभग सभी नवीकरणीय जल संसाधनों का उपयोग पहले से ही कृषि, उद्योग और घरेलू जरूरतों में हो रहा है।
ब्लूम बर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक दशकों से चल रहे सूखे, घटती बारिश और भूजल के अत्यधिक दोहन ने ईरान में जलाशयों को खतरनाक रूप से खाली कर दिया है। 2025 तक देश के ज्यादातर बड़े जलाशय सूखने की स्थिति में पहुंच गए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की कुल जल आपूर्ति का 90 फीसदी हिस्सा खेती में इस्तेमाल होता है। पश्चिमी देशों की तरफ से लगातार टैरिफ और सैंक्शन का सामना कर रहे ईरान की सिंचाई प्रणाली पुराने ढर्रे पर चल रही है। इसकी वजह से बड़ी मात्रा में मीठा पानी बर्बाद होता है।
अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध में फंसा ईरान, एक बड़ा तेल उत्पादक देश है। लेकिन तेल की कमाई से जनता की पानी की समस्या को दूर नहीं किया जा सकता। पश्चिमी देशों से दूरी और वैज्ञानिक पद्धतियों से अलगाव की वजह से ईरान में पानी का अत्याधिक दोहन हुआ है। शहरों की स्थिति केंद्र में होने की वजह से ठीक है, लेकिन सुदूर गांवों के लिए स्थिति लगातार जटिल होती जा रही है। जियोपॉलिटिकल मॉनिटर के मुताबिक, सूखती नदियां, खाली होते भूजल भंडार और गायब होती झीलों ने पहले ही कृषि उत्पादन को कम कर दिया है। इसके कारण कई ग्रामीण समुदायों को शहरों की ओर पलायन करना पड़ा है।
इस संघर्ष के शुरू होने से पहले भी ईरान गंभीर जल संकट से जूझ रहा था, लेकिन इस संघर्ष ने इसे और भी ज्यादा तेजी के साथ बढ़ा दिया है। ईरानी विदेश मंत्री ने अभी एक जल शोधन तंत्र के क्षतिग्रस्त होने की बात कही है। लगातार होती बमबारी के बीच भविष्य में जल स्त्रोतों जैसे बांध, पाइपलाइन के टूटने या क्षतिग्रस्त होने की आशंका बनी हुई है। इसी तरह से जमीन में मौजूद पानी को निकालने और जल शोधन करने के लिए बिजली की जरूरत होगी, युद्ध की वजह से वह भी बाधित हो सकती है। ईरान जैसे पश्चिमी एशिया के कई देश पीने के पानी के लिए बड़े पैमाने पर डिसैलिनेशन प्लांट (समुद्र जल शोधन) पर निर्भर करते हैं, इसलिए युद्ध के दौरान ये संयंत्र रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा बन जाते हैं।
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