एयरस्पेस में ड्रोन्स, पायलटों को सता रहा डर; ईरान-अमेरिका युद्ध ने कैसे छोड़ा असर?
अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच युद्ध छिड़ा हुआ है। कई अन्य देश भी इस युद्ध की चपेट में हैं। वहीं, कई मिडिल ईस्ट में एयरस्पेस का बंद होना समस्या को और बढ़ा रहा है। पायलटों के अंदर भी इसको लेकर काफी ज्यादा डर हैं।
अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच युद्ध छिड़ा हुआ है। कई अन्य देश भी इस युद्ध की चपेट में हैं। वहीं, कई मिडिल ईस्ट में एयरस्पेस का बंद होना समस्या को और बढ़ा रहा है। पायलटों के अंदर भी इसको लेकर काफी ज्यादा डर हैं। पायलट कह रहे हैं कि वह मिसाइलों वाले एयरस्पेस में विमान उड़ाने को लेकर सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। गौरतलब है कि इस युद्ध में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई मारे जा चुके हैं। वहीं, युद्ध ने दुनिया के कई सबसे व्यस्त हवाई अड्डों के ऊपर आसमान को सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलों और हमले वाले ड्रोन से भर दिया है।
फिलहाल इस एयरस्पेस में केवल कुछ रेस्क्यू फ्लाइट्स ही उड़ान भर पा रही हैं। कई पायलटों, आधे दर्जन से अधिक विमानन और सिक्योरिटी सोर्सेज ने कहाकि यूक्रेन, अफगानिस्तान और इजरायल जैसे क्षेत्रों में चल रहे युद्धों के चलते पायलटों पर काफी दबाव है। उन्होंने कहाकि अब चालक दल को सीमित वायु क्षेत्र में उड़ान भरनी पड़ रही है। इसके अलावा सक्रिय युद्ध क्षेत्रों से दूर एक्टिव ड्रोन की बढ़ती संख्या के चलते भी काफी दबाव है।
क्या कह रहे पायलट
तान्जा हार्टर, एक पायलट हैं। वह मध्य पूर्व में काम कर चुकी हैं और यूरोपीय कॉकपिट एसोसिएशन की अध्यक्ष हैं। हार्टर ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहाकि हम मिलिट्री पायलट नहीं हैं। हमें हवा में इस तरह के खतरों से निपटने के लिए ट्रेनिंग नहीं दी गई है। उन्होंने कहाकि मिडिल ईस्ट के आसमान में विमानन क्षेत्र को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा रहा है। इसके चलते पायलटों के बीच भय और चिंता पैदा हो रही है। उन्होंने कहाकि बतौर पायलट वह मिसाइलों से भरे आसमान में उड़ान नहीं भरना चाहेंगी।
लेबनान के नागरिक विमानन प्राधिकरण के प्रमुख ने कहाकि मध्य पूर्व में प्रशिक्षित पायलट आपातकालीन परिस्थितियों को संभालने के आदी हो गए हैं। मिडिल ईस्ट एयरलाइंस के एक पायलट, जिनके पास दस साल का अनुभव है, ने रायटर्स से कहा कि बेरुत की उड़ानों को संभालना मुश्किल हो गया है। पहले, लेबनान में कंधे से दागी जाने वाली एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलों की सामान्य रेंज 15,000 फीट होती थी। सुरक्षित रहने के लिए, पायलट उस दूरी से ऊपर उड़ान भरते थे। विमान में अक्सर अतिरिक्त ईंधन भी होता था ताकि जरूरत पड़ने पर वे किसी अन्य हवाई अड्डे की तरफ जा सकें। हालांकि अधिकांश मिसाइल हमले इतनी दूर होते हैं कि वे सीधे खतरे का कारण नहीं बनते। पायलट भी आम तौर पर उड़ानों के दौरान इतने व्यस्त रहते हैं कि उन पर ध्यान नहीं दे पाते।
यूरोपीय हवाई अड्डों पर भी असर
सिर्फ मध्य पूर्व ही नहीं, यूरोपीय हवाई अड्डों पर भी ड्रोन का प्रभाव पड़ा है। खतरा केवल मध्य पूर्व तक ही सीमित नहीं है। 2022 में रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद, ड्रोन दोनों पक्षों के लिए एक महत्वपूर्ण हथियार बन गए हैं। एयरलाइन कैप्टन क्रिश्चियन वॉन डी'आहे ने 15 साल तक कॉमर्शियल पायलट के रूप में काम किया है। वह डेनिश एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन के प्रमुख हैं। उन्होंने कहाकि बढ़ता जोखिम चिंताजनक है। उन्होंने कहाकि ड्रोन्स को आसानी से नहीं देखा जा सकता।
ड्रोन से टकराने पर विमान पर क्या असर
अगर ड्रोन किसी विमान के इंजन से टकराते हैं तो विमान की पावर खत्म हो सकती है। वहीं, पंखों को हुए नुकसान से भी विमान की संचालन क्षमता प्रभावित हो सकती है। अधिकांश रजिस्टर्ड विमान एक ट्रांसपोंडर के जरिए संकेत भेजते हैं। यह उपकरण रडार सिस्टम को उन्हें पहचानने की अनुमति देता है। ड्रोन ऐसे संकेत नहीं भेजते, जिससे पायलट उन्हें ट्रैक नहीं कर पाते। सामान्य हवाई अड्डे के रडार सिस्टम भी ड्रोन का पता लगाने में कठिनाई महसूस करते हैं। विशेष रडार सिस्टम मौजूद होते हैं, लेकिन इन्हें आमतौर पर कानून प्रवर्तन एजेंसियां या सेना चलाते हैं।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




साइन इन