रहने दो, अब जरूरत नहीं, याद रखेंगे; ईरान युद्ध में मदद भेजने में देर कर रहे ब्रिटेन पर भड़के ट्रंप
ईरान में जारी युद्ध में मदद भेजने में देर कर रहे ब्रिटिश पीएम स्टार्मर पर ट्रंप ने भड़ास निकाली है। ट्रंप ने कहा कि ऐसे लोगों की जरूरत नहीं है, जो युद्ध जीतने के बाद मदद के लिए आएं। गौरतलब है कि ब्रिटिश ने हिंद महासागर में मौजूद अपने सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति देने भी देर की थी।
Iran US Israel war update: ईरान के खिलाफ युद्ध लड़ रहा अमेरिका अब अपने सहयोगियों पर भड़ास निकालने लगा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने शनिवार को कहा कि युद्ध शुरू होने के एक हफ्ते बाद ब्रिटेन अब दो एयरक्राफ्ट करियर भेजने को लेकर गंभीरता से विचार कर रहा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि अब हमें युद्ध जीतने के लिए इनकी जरूरत नहीं है। इसके बाद एयरक्राफ्ट भेजने में देरी के लिए भी ट्रंप ने ब्रिटिश पीएम स्टार्मर की जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब ईरान युद्ध के समय ब्रिटिश समर्थन की कमी को हमेशा याद रखेगा। ट्रंप की तरफ से आया यह ताजा बयान दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव को प्रदर्शित करता है।
सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर अपनी भड़ास निकालते हुए ट्रंप ने स्टार्मर की आलोचना की। उन्होंने कहा कि स्टार्मर ने दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को खराब कर रहे हैं। गौरतलब है कि ब्रिटिश ने शुरूआत में हिंद महासागर में स्थित अपने सैन्य अड्डे का इस्तेमाल करने की इजाजत भी नहीं दी थी, हालांकि बाद में स्टार्मर ने इसके लिए हामी भर दी थी।
ट्रंप ने लिखा, "यूनाइटेड किंगडम, जो कभी हमारा महान सहयोगी था, शायद सबसे महान, अब आखिरकार मध्य-पूर्व में दो विमानवाहक पोत भेजने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। कोई बात नहीं, प्रधानमंत्री स्टार्मर, अब हमें उनकी जरूरत भी नहीं है, लेकिन हम इस बात को याद रखेंगे। हमें ऐसे लोगों की जरूरत नहीं, जो युद्ध में तब शामिल हों, जब हम इसे पहले ही जीत चुके हों।"
आपको बता दें, अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ से यह बयान ऐसे समय में आया है, जब ईरान की जंग और भी ज्यादा तेज हो गई है। दोनों तरफ से लगातार एक-दूसरे पर मिसाइलों और बमों की बरसात की जा रही है। इसी बीच ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय की तरफ से कहा गया था कि पीएम 'एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स' को मध्य-पूर्व भेजने के बारे में सोच रहे हैं। हालांकि, एक ब्रिटिश अधिकारी की तरफ कहा गया कि इस बारे में अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
इससे पहले ब्रिटिश पीएम ने ईरान युद्ध की शुरूआत में अपने सैन्य अड्डों का इस्तेमाल अमेरिका के लिए प्रतिबंधित करने के अपने फैसले का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि शुरूआत में उन्होंने अनुमति नहीं दी थी क्योंकि उन्हें यह सुनिश्चित करना था कि कोई भी सैन्य कार्रवाई कानूनी और पूरे तरीके से योजना के अनुरूप हो। जब यह तय हो गया तो उन्होंने रक्षात्मक हमलों के लिए इन सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति दे दी।
गौरतलब है कि अमेरिका और ब्रिटेन नाटो के सहयोगी सदस्य हैं और दशकों से एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करते रहे हैं। लेकिन ट्रंप के सत्ता में आने के बाद, अमेरिका का व्यवहार यूरोप के प्रति बदल गया है। ट्रंप लगातार ग्रीनलैंड और यूरोपीय देशों के साथ अपमानजनक व्यवहार करते हुए नजर आते हैं। इसकी वजह से पहले फ्रांस और अब ब्रिटेन भी अमेरिका से परे अपने फैसले लेने की तरफ देखने लगे हैं।
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