Iran US Israel War Update Have Tehran Underground Missile Cities Become Its Biggest Weakness? ईरान के 'भूमिगत मिसाइल शहर', इस्लामिक गणराज्य की सबसे बड़ी ताकत, बन गई कमजोरी?, International Hindi News - Hindustan
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ईरान के 'भूमिगत मिसाइल शहर', इस्लामिक गणराज्य की सबसे बड़ी ताकत, बन गई कमजोरी?

इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हमलों का जवाब ईरान बड़ी ही तेजी और सटीकता के साथ दे रहा है। मार्च 2025 में ईरान ने अपने भूमिगत मिसाइल शहरों को दुनिया के सामने रखा था। ईरान इसे अपनी सबसे बड़ी ताकत मानकर चल रहा था, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक अब यह कमजोरी बनते जा रहे हैं।

Fri, 6 March 2026 05:04 PMUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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ईरान के 'भूमिगत मिसाइल शहर', इस्लामिक गणराज्य की सबसे बड़ी ताकत, बन गई कमजोरी?

इजरायल और अमेरिका द्वारा मिलकर ईरान पर किए गए हमले ने पूरे पश्चिम एशिया को संघर्ष में लाकर खड़ा कर दिया है। अमेरिका और इजरायल को उम्मीद थी कि वह खामेनेई का खात्मा करके जल्दी ही ईरान को घुटनों पर ला देंगे, लेकिन उनकी यह उम्मीद अब धूल में मिलती हुई नजर आ रही है। इस्लामिक गणराज्य को इस बात का अंदेशा था कि अमेरिका कभी न कभी उसके ऊपर हमला करेगा, ऐसे में ईरान ने अपने देश में कई भूमिगत मिसाइल शहरों को बनाया हुआ है। इजरायल के साथ 12 दिनों के संघर्ष के दौरान ईरान ने दुनिया के सामने इनकी झलक भी दिखाई थी। हालांकि, ईरान की सबसे बड़ी ताकत समझे जाने वाले यह शहर उसके लिए बड़ी मुसीबत का कारण बन गए हैं।

वॉल स्ट्रीट जनरल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल के भारी बमबर्षक विमान लगातार तेहरान और ईरान के बाकी हिस्सों पर बम बरसा रहे हैं। इन भूमिगत शहरों के ऊपर भी अमेरिका विमान लगातार मंडरा रहे हैं, जैसे ही मिसाइल लॉन्चर या कोई हथियार प्रणाली बाहर की तरफ आती है, तो उस पर तुरंत ही हमला कर दिया जाता है। अमेरिकी विमानों ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत ईरान के ऊपर इतने बम बरसाए हैं कि कई जगहों पर ईरानी हथियार इन शहरों में ही दब गए हैं।

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रिपोर्ट में बताया गया कि हाल के दिनों में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में भी कई जगहों पर भूमिगत बंकरों के ठीक बाहर मिसाइलों और उनके लॉन्चरों के मलबे को देखा गया था। इन सिस्टम्स को इजरायली हमलों में नष्ट कर दिया गया था। ईरान के द्वारा बनाए गए यह भूमिगत शहर मुख्य रूप से शिराज, इम्फहान, तबरिज और केर्मानशाह शहरों के पास मौजूद थे। विश्लेषकों के अनुसार, जिन दर्जनों मिसाइल ठिकानों पर हमला किया गया, उनमें से लगभग सभी भूमिगत हैं, लेकिन उनके ऊपर इमारतें, सड़कें और प्रवेश द्वार बने हुए हैं। इन्हीं से सैटेलाइट तस्वीरों में उनकी पहचान संभव हो जाती है।

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ईरान के भूमिगत मिसाइल शहर

ईरान लगातार अपनी सुरक्षा के लिए ऐसे शहरों का निर्माण करता आ रहा है। पिछली साल जब अमेरिका ने पहाड़ियों के बीच मौजूद ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों को निशाना बनाने और तबाह करने का दावा किया था उस वक्त दुनिया की नजर इस पर पड़ी थी। ईरान ने भी अपने दुश्मनों को सावधान करने के लिए मार्च 2025 में ईरान ने एक वीडियो जारी किया था, जिसमें उसने दावा किया था कि यह उसका सबसे बड़ा भूमिगत मिसाइल ठिकाना है। हालांकि इसकी लोकेशन सार्वजनिक नहीं की गई थी। वीडियो में दिखाया गया था कि वरिष्ठ सैन्य कमांडर लंबी, खिड़की रहित सुरंगों में घूम रहे हैं, जहाँ मिसाइल ले जाने वाले ट्रक खड़े हैं। कुछ ठिकानों पर ऐसे भूमिगत साइलो बनाए गए हैं, जिनसे बिना मिसाइल को बाहर निकाले ही उन्हें दागा जा सकता है।

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अमेरिकी सेना के पूर्व मिसाइल एक्सपर्ट कॉलिन डेविड के अनुसार, दक्षिणी ईरान के खोरमूज शहर के पास एक बेस में ऐसे 9 भूमिगत साइलो हो सकते हैं। यह साइलो मूल रूप से पहाड़ के अंदर गहरे गड्ढों जैसे होते हैं, जिनका रुख फारस की खाड़ी की ओर होता है और जिनमें एक पक्का एंट्री प्वाइंट बना होता है। हालांकि, वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक सीएनए कॉर्प के रिसर्च एक्सपर्ट डेकर एवलेथ के अनुसार ईरान अब भूमिगत साइलो से मिसाइल दागने की रणनीति को काफी हद तक छोड़ चुका है। उनका कहना है कि तकनीकी कठिनाइयों के कारण इन साइलो का बार-बार उपयोग करना मुश्किल होता है।

लगातार तेज हो रहा युद्ध

अमेरिका और इजरायल भले ही ईरान पर हमला करके उसे घुटनों पर लाने की योजना बनाकर आए हों, लेकिन उनके लिए यह काम बहुत मुश्लिक हो गया है। ईरान ने अमेरिका ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। अमेरिकी डिफेंस मिसाइलों की तुलना में ईरान के सस्ते ड्रोन्स ने लगातार पश्चिम एशिया में तबाही मचाई हुई है, इसके साथ ही अमेरिका को बड़ी मात्रा में खर्च भी उठाना पड़ रहा है।

ट्रंप जिस युद्ध को कुछ दिनों में खत्म करने का सपना देखकर आए थे, अब वह लंबा खिंचता जा रहा है। हालांकि वह कह रहे हैं कि वह इस युद्ध के 4 हफ्तों के लिए भी तैयार हैं, लेकिन देखना होगा कि क्या पश्चिम एशिया के देशों के पास रक्षा करने वाली इतनी मिसाइलें हैं, जो ईरानी हल्के और सुसाइड ड्रोन्स को लंबे समय तक संभाल सकें।

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