क्या इजरायल के पास भी है परमाणु हथियार? डिमोना पर ईरानी हमले से उठे सवाल, युध्द में नया मोड़
डिमोना शहर बेहद अहम है क्योंकि यहां शिमोन पेरेस नगेव न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर स्थित है, जिसे इजरायल के परमाणु कार्यक्रम का मुख्य केंद्र माना जाता है। हालांकि, इजरायल ने कभी आधिकारिक रूप से परमाणु हथियारों के होने की पुष्टि नहीं की है। इसके बावजूद शक की सुईयां उठती रही हैं।
ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध में एक नया और गंभीर मोड़ आया है। शनिवार रात को ईरान ने इजरायल के दक्षिणी हिस्से में स्थित डिमोना और अराद शहरों पर मिसाइल हमले किए। ये हमले ईरान की नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी पर हुए हमले का बदला माने जा रहे हैं। इजरायली स्वास्थ्य मंत्रालय और बचाव सेवाओं के अनुसार, इन हमलों में 100 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें डिमोना में 33 और अराद में करीब 90 लोग शामिल हैं। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई गई है, जिसमें बच्चे और महिलाएं भी हैं। इजरायल की वायु रक्षा प्रणाली इन मिसाइलों को रोकने में विफल रही, जिससे कई मिसाइलें सीधे टारगेट पर गिरीं और आवासीय इलाकों में भारी तबाही मचाई।
डिमोना शहर बेहद अहम है क्योंकि यहां शिमोन पेरेस नगेव न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर स्थित है, जिसे इजरायल के परमाणु कार्यक्रम का मुख्य केंद्र माना जाता है। हालांकि, इजरायल ने कभी आधिकारिक रूप से परमाणु हथियारों के होने की पुष्टि नहीं की है। पश्चिमी खुफिया रिपोर्ट्स और 1986 में इजरायली तकनीशियन मोरदेचाई वानुनु की जानकारी के अनुसार, यहां प्लूटोनियम उत्पादन होता है। ईरान ने जानबूझकर इस क्षेत्र को निशाना बनाया, जिससे इजरायल की परमाणु नीति पर सवाल उठ रहे हैं। ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर घलीबाफ ने कहा कि डिमोना जैसे संरक्षित क्षेत्र में मिसाइल पहुंचना युद्ध की नई फेज की शुरुआत है।
इजरायल की परमाणु नीति पर उठे सवाल
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने पुष्टि की है कि परमाणु सुविधा को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और कोई रेडिएशन लीक नहीं हुआ। इजरायल ने इन हमलों की पुष्टि की है लेकिन नतांज पर हमले में शामिल होने से इनकार किया है। इजरायली रक्षा बल (IDF) ने कहा कि वे जांच कर रहे हैं कि क्यों उनके इंटरसेप्टर कामयाब नहीं हुए। इस घटना ने इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया है। ईरान का दावा है कि यह हमला नतांज पर अमेरिका-इजरायल की ओर से किए गए हमले का जवाब है। क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को लेकर चेतावनी दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला इजरायल की परमाणु नीति को चुनौती देता है, जहां वह न तो हथियारों की मौजूदगी स्वीकार करता है और न ही इनकार। यह घटना मध्य-पूर्व में संघर्ष को और गहरा कर रही है। दोनों पक्षों के बीच प्रत्यक्ष टकराव बढ़ने से चिंता बढ़ गई है। IAEA ने अधिकतम संयम बरतने की अपील की है। डिमोना पर हमला न केवल सैन्य बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक संदेश देता है, जो दोनों देशों के बीच परमाणु मुद्दों को केंद्र में ला रहा है। अगर यह सिलसिला जारी रहा तो बड़ा युद्ध क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है।
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