Iran America war Anthropic Claude AI chat gpt llm model AI tools become America biggest weapon in war युद्ध में AI बना अमेरिका का सबसे बड़ा हथियार, इन टूल्स ने ईरान को कैसे कर किया बेबस?, International Hindi News - Hindustan
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युद्ध में AI बना अमेरिका का सबसे बड़ा हथियार, इन टूल्स ने ईरान को कैसे कर किया बेबस?

ईरानी हमलों से ठीक पहले अमेरिकी सरकार एंथ्रोपिक के साथ कॉन्ट्रैक्ट विवाद के बाद संघीय एजेंसियों में इसके इस्तेमाल पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। कंपनी को 27 फरवरी को सप्लाई चेन रिस्क वाली कंपनी घोषित कर दिया गया था।

Mon, 2 March 2026 12:28 PMJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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युद्ध में AI बना अमेरिका का सबसे बड़ा हथियार, इन टूल्स ने ईरान को कैसे कर किया बेबस?

Iran America War: अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर इतिहास का सबसे बड़ा हमला कर दिया है। अमेरिका ने इस बार पूरी प्लानिंग के तहत हमला कर ना सिर्फ दर्जनों ईरानी अधिकारियों को मार गिराया, बल्कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की भी हत्या कर दी। दावा किया जा रहा है कि हमले में खामेनेई के भाई, बेटी और दामाद सहित कई अन्य सदस्यों की भी मौत हो गई। अब यह जानकारी सामने आई है कि इस युद्ध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अमेरिका का सबसे बड़ा हथियार बना।

अमेरिका की सेना पहले से ही सैन्य योजनाओं के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI का बड़े स्तर पर इस्तेमाल कर रही थी। बीते साल पेंटागन ने लगभग 200 मिलियन डॉलर तक के कॉन्ट्रैक्ट जारी किए थे, जिनका मकसद युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा में AI का इस्तेमाल बढ़ाना था। इन समझौतों में Anthropic के अलावा OpenAI, Google और एलन मस्क की xAI भी शामिल थीं। इन प्रोजेक्ट्स में लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLMs), एजेंटिक वर्कफ्लो और क्लासिफाइड और अनक्लासिफाइड दोनों तरह के सिस्टम शामिल थे।

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अमेरिका ने बनाया हथियार

अब ईरान पर हमले के लिए अमेरिका ने इन टूल्स को अपना साथी बनाया। 28 फरवरी को ईरान पर किए गए हमलों के दौरान पेंटागन ने एंथ्रोपिक कंपनी के Claude AI मॉडल का बड़े पैमाने पर उपयोग किया। हालांकि अमेरिकी सेना ने सिर्फ इस AI सिस्टम का ही इस्तेमाल नहीं किया। पिछले कुछ सालों में अमेरिकी रक्षा विभाग (DoD) ने युद्ध की तैयारी, खुफिया विश्लेषण और ऑपरेशन प्लानिंग के लिए कई बड़ी टेक कंपनियों के AI टूल अपने सिस्टम में शामिल किए हैं। एंथ्रोपिक ने 2024 के अंत से अमेरिकी रक्षा और खुफिया एजेंसियों के साथ काम शुरू किया था।

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कैसे ईरान को किया बेबस?

रिपोर्ट्स के मुताबिक हालिया हमलों में Claude AI का इस्तेमाल खुफिया जानकारी के विश्लेषण, टारगेट पहचान और युद्ध सिमुलेशन में किया गया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सैटेलाइट इमेज, इंटरसेप्ट और सिग्नल इंटेलिजेंस जैसे बड़े डेटा का विश्लेषण कराने के लिए AI की मदद ली। AI ने संभावित खतरों का आकलन, दुश्मन की लोकेशन की पहचान और हाई-वैल्यू टारगेट की प्राथमिकता तय करने में भी काफी मदद की। साथ ही हमले से पहले संभावित परिणाम, जोखिम और कोलेटरल डैमेज का अनुमान लगाने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया गया।

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अंतिम फैसला इंसानों का ही

अमेरिका ने एंथ्रोपिक के अलावा OpenAI के GPT मॉडल और ChatGPT आधारित सिस्टम का भी उपयोग किया। हालांकि यह कहा जा रहा है कि इन टूल्स ने हथियार नियंत्रित नहीं किए और ना ही खुद कोई घातक फैसला लिया। इसकी भूमिका सिर्फ निर्णय-सहायक टूल की रही, जो डेटा प्रोसेसिंग, विश्लेषण और रणनीतिक सुझाव देता है। जानकारों की मानें तो युद्ध से जुड़े अंतिम निर्णायक फैसले आज भी इंसान ही लेंगे।

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