Indias drone plan shelved amid Iran war deal with Israeli companies ईरान युद्ध के बीच ठंडे बस्ते में चला गया भारत का 'ड्रोन प्लान', इजरायल की कंपनियों से हुई थी डील, International Hindi News - Hindustan
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ईरान युद्ध के बीच ठंडे बस्ते में चला गया भारत का 'ड्रोन प्लान', इजरायल की कंपनियों से हुई थी डील

भारत और अमेरिका की दो कंपनयों के बीच MALE ड्रोन का प्रोग्राम शुरू ही हुआ था कि ईरान युद्ध छिड़ गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस युद्ध की वजह से इजरायल की कंपनियां भारत को ड्रोन उपलब्ध करवाने में देर कर रही हैं।

Mon, 30 March 2026 11:25 AMAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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ईरान युद्ध के बीच ठंडे बस्ते में चला गया भारत का 'ड्रोन प्लान', इजरायल की कंपनियों से हुई थी डील

ईरान और अमेरिका-इजरायल के युद्ध के बीच भारत का बड़ा ड्रोन प्रोग्राम ठंडे बस्ते में चला गया है। भारतीय सेना को मीडिया अल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (MALE) ड्रोन उपलब्ध करवाने के लिए इजरायल की दो कंपनियों के साथ 30 हजार करोड़ रुपये की डील हुई है। हालांकि इस युद्ध की वजह से इजरायली कंपनियों ड्रोन सप्लाई करने में देरी कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक अब ड्रोन उपलब्ध करवाने की समय सीमा को आगे बढ़ा दिया गया है।

बता दें कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन बड़ी भूमिका निभाता है। ऐसे में भारत भी सेना में बड़ी संख्या में ड्रोन शामिल करना चाहता है। जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी की इजरायल यात्रा का एक एजेंडा यह भी था। फोर्ब्स इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में कहा थआ कि 2026 में भारत और इजरायल के बीच 8.6 अरब डॉलर का रक्षा समझौता हो सकता है। भारत ने मेक इन इंडिया पर जोर देते हुए कहा था कि इजरायल ड्रन की तकनीक दे और भारत में इसका उत्पादन हो।

क्या है MALE ड्रनो की खासियत

भारत ने इजरायल से हेरोन एमके-2 मीडियम एल्टिट्यूड लॉन्ग एंड्यूरेंस ड्रोन खरीदने की योजना शुरू कर दी थी। ये ड्रोन हवा में 45 घंटे तक लगातार उड़ान भर सकते हैं। इसके अलावा ये ड्रोन 470 किलोग्राम भार उठाने में सक्षम हैं। खराब मौसम में भी ये ड्रोन 35 हजार फीट की ऊंचाी तक उड़ान भर सकते हैं।

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बता दें कि अमेरिका और इजरायल दोनों ही आधुनिक हथियारों के मामले में बहेद मजबूत हैं। हालांकि उन्हें अंदाजा नहीं था कि ईरान के पास भी हथियारों का इतना बड़ा जखीरा है। इजरायल को लगा थाकि कुछ ही दिनों में ईरान घुटनों पर आ जाएगा। ईरान के एक शीर्ष अधिकारी ने अमेरिका को जमीनी आक्रमण के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिकी सैनिकों को ''आग के हवाले कर दिया जाएगा।''

उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब महीने भर से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए पाकिस्तान में क्षेत्रीय विदेश मंत्री एकत्र हुए हैं। ईरान की सरकारी मीडिया की खबर के मुताबिक, ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर कलीबाफ ने कहा कि सप्ताहांत में हुई वार्ता केवल एक बहाना थी क्योंकि अमेरिका पश्चिम एशिया में अतिरिक्त सैनिक भेज रहा है। पाकिस्तान ने कहा है कि सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र के विदेश मंत्री पश्चिम एशिया युद्ध को समाप्त करने के मकसद से इस्लामाबाद में अमेरिका या इजराइल की भागीदारी के बिना बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, प्रगति के बहुत कम संकेत मिले क्योंकि इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमले जारी रखे जबकि तेहरान ने भी पूरे क्षेत्र में मिसाइलों और ड्रोन से जवाबी हमले जारी रखे।

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तनाव कम होने के आसार नहीं

अमेरिका के लगभग 2,500 मरीन सैनिक इस क्षेत्र में पहुंच गए हैं और इसके साथ ही यहां पिछले दो दशकों में अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती हो गई है। इसके अलावा, 82वीं 'एयरबोर्न डिवीजन' के कम से कम 1,000 'पैराट्रूपर्स' को भी पश्चिम एशिया भेजने का आदेश दिया गया है, जो दुश्मन के इलाके में उतरकर अहम ठिकानों और हवाई पट्टियों को सुरक्षित करने में सक्षम हैं।

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अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि अमेरिका ''जमीनी बल उतारने के साथ ही अपने सभी उद्देश्यों को हासिल कर सकता है।'' इस बीच, रविवार को ईरान ने क्षेत्र में स्थित इजराइली और अमेरिकी विश्वविद्यालयों को निशाना बनाने की धमकी दी। ऐसा पहली बार है जब ईरान ने शिक्षण संस्थानों को निशाना बनाने की खुले तौर पर धमकी दी है। सरकारी मीडिया ने खबर में बताया कि अर्धसैनिक बल 'रिवोल्यूशनरी गार्ड' ने एक बयान में चेतावनी दी कि यदि ईरानी विश्वविद्यालयों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो क्षेत्र में मौजूद इजराइली विश्वविद्यालयों और अमेरिकी विश्वविद्यालयों के परिसर को ''सीधे तौर पर'' निशाना बनाया जाएगा।

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