स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलवाने के लिए भारत निभा रहा अहम रोल, संकट के बीच UAE ने जताया भरोसा
अमीरात के मंत्री ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के हालिया दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि यह रिश्तों में आई मजबूती का संकेत है। इससे पहले पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध के बीच विदेश मंत्री UAE पहुंचे थे।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात ने भारत पर भरोसा जताया है। UAE ने कहा है कि भारत हमेशा से शांति का पक्षकार रहा है और वह शांति सुनिश्चित करने का हर संभव प्रयास कर रहा है, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाने के लिए की जा रही कोशिशें भी शामिल हैं। UAE के एक मंत्री ने इस दौरान यह भी कहा है कि होर्मुज को हर हाल में खुला और सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर इस रास्ते में कोई बाधा आती है, तो उसका असर सिर्फ खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हिन्द महासागर क्षेत्र और अफ्रीका की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ेगा।
मॉरीशस में हुए नौवें हिन्द महासागर सम्मेलन में मौजूद संयुक्त अरब अमीरात के मंत्री शेख शखबूत बिन नाहयान अल नाहयान ने समुद्री सुरक्षा और कनेक्टिविटी पर भारत के साथ तालमेल को खास तौर पर जोर दिया उन्होंने कहा, “संयुक्त अरब अमीरात और भारत के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी है, जो अब हिन्द महासागर और अफ्रीका पर ज्यादा केंद्रित होती जा रही है, और समुद्री सुरक्षा, संपर्क और आर्थिक सहयोग में दोनों के बीच मजबूत तालमेल है।”
भारत पर जताया भरोसा
उन्होंने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर के हालिया दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि यह मजबूत होते रिश्तों का संकेत है। उन्होंने कहा, “भारत वैश्विक प्रयासों को समर्थन देने और महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों को खुला बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी शामिल है।”
पश्चिम एशिया के हालात पर उन्होंने बड़ी चेतावनी देते हुए कहा, “सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि होर्मुज जलमार्ग खुला, सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के बना रहे। यह अहम मार्ग किसी एक देश का नहीं है और यहां आवाजाही बिना बाधा के होनी चाहिए।”
ईरान पर लगाया बड़ा आरोप
UAE के मंत्री ने इस दौरान ईरान पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “ईरान के बिना उकसावे और अनुचित हमलों ने संयुक्त अरब अमीरात और क्षेत्र के देशों पर असर डालते हुए वैश्विक ऊर्जा बाजार और आपूर्ति व्यवस्था में अस्थिरता पैदा की है।” उन्होंने दोहराया, “सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला, सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के बना रहे। यह अहम मार्ग किसी एक देश का नहीं है और यहां आवाजाही बिना बाधा के होनी चाहिए। किसी भी तरह की रुकावट के दूरगामी असर होंगे, जो सिर्फ खाड़ी तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि हिन्द महासागर, अफ्रीका और दुनिया के अन्य व्यापारिक साझेदारों को भी प्रभावित करेंगे।”
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