पैसे वापस करो, UAE का पाकिस्तान को अल्टीमेटम; अब किस पर टिकी शहबाज की उम्मीदें?
UAE द्वारा 3 अरब डॉलर का कर्ज वापस मांगने के बाद पाकिस्तान भारी आर्थिक संकट में घिर गया है। जानिए कैसे विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए पाकिस्तान नए बॉन्ड बेचने और IMF की मदद लेने की तैयारी कर रहा है।
पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने जानकारी दी है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी कर्ज के दबाव के बीच, पाकिस्तान अपने विदेशी मुद्रा भंडार को बनाए रखने के लिए अन्य देशों और बैंकों से नए कर्ज लेने पर विचार कर रहा है। यह स्थिति तब और गंभीर हो गई जब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पाकिस्तान से अपने 3 अरब डॉलर के कर्ज की पूरी अदायगी की मांग की है। यूएई का कर्ज चुकाने में पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार के हाथ-पांव फूल गए हैं। उसे कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है।
UAE के कर्ज का दबाव
इस महीने पाकिस्तान और UAE के बीच कर्ज चुकाने की अवधि को आगे बढ़ाने पर सहमति नहीं बन पाई। पिछले सात सालों में यह पहली बार है जब UAE ने इस तरह की मोहलत देने से इनकार किया है। मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही मुश्किलों का सामना कर रही है। अब UAE के इस फैसले ने देश के बाहरी वित्तीय सुरक्षा कवच पर दबाव और बढ़ा दिया है।
पाकिस्तान सरकार की क्या योजना है?
वाशिंगटन में ब्लूमबर्ग से बात करते हुए वित्त मंत्री औरंगजेब ने कहा कि इस कमी को पूरा करने के लिए वे वाणिज्यिक विकल्पों और अन्य देशों से कर्ज लेने सहित कई रास्तों पर विचार कर रहे हैं। 27 मार्च तक पाकिस्तान के पास 16.4 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार था, जो लगभग तीन महीने के आयात (इंपोर्ट) का खर्च उठाने के लिए काफी है।
वित्त मंत्री ने दावा किया कि फरवरी के अंत में ईरान पर हुए अमेरिकी-इजरायली हमले से पहले पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति मजबूत थी। उन्होंने भरोसा जताया कि पाकिस्तान अपने कर्जदाताओं का पैसा चुकाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसके लिए अन्य संसाधनों का इंतजाम कर लिया जाएगा।
चीन और सऊदी अरब से बातचीत?
जब वित्त मंत्री से पूछा गया कि क्या वित्तीय मदद के लिए चीन और सऊदी अरब से कोई बातचीत चल रही है, तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। हालांकि, ब्लूमबर्ग की पहले की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि इस तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
IMF और वर्ल्ड बैंक की बैठक
वित्त मंत्री इस समय वाशिंगटन में IMF और वर्ल्ड बैंक की 'स्प्रिंग मीटिंग्स' में हिस्सा ले रहे हैं। मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू होने से पहले, इन बैठकों में ग्लोबल ट्रेड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर चर्चा होने वाली थी। लेकिन अब इस बैठक का मुख्य फोकस मध्य पूर्व का तनाव और उसके कारण तेल की सप्लाई में आई भारी बाधा पर है।
ग्लोबल बॉन्ड मार्केट में वापसी की तैयारी
पाकिस्तान चार साल के लंबे अंतराल के बाद इस साल फिर से ग्लोबल बॉन्ड मार्केट में उतरने की योजना बना रहा है। सरकार 'यूरोबॉन्ड', 'इस्लामिक सुकुक' और 'डॉलर से जुड़े रुपये वाले बॉन्ड' जारी करेगी। इसके लिए अगले कुछ दिनों में प्रबंधकों की नियुक्ति की जाएगी।
सरकार दूसरी तिमाही में पहली बार चीनी मुद्रा 'युआन' में भी कर्ज लेने की तैयारी कर रही है। इसे 'पांडा बॉन्ड' कहा जाता है। इसे एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) और एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) का समर्थन मिलेगा। शुरुआत में 25 करोड़ डॉलर के बॉन्ड जारी किए जाएंगे और इसका कुल लक्ष्य 1 अरब डॉलर है।
IMF से क्या हैं उम्मीदें?
पाकिस्तान को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का कार्यकारी बोर्ड जल्द ही 7 अरब डॉलर के बेलआउट प्रोग्राम की अगली किश्त को मंजूरी दे देगा। इस मंजूरी और 'क्लाइमेट रेजिलिएंस फंड' को मिलाकर पाकिस्तान को करीब 1.3 अरब डॉलर की रकम मिल सकेगी।
वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान तेल संकट के बावजूद, पाकिस्तान फिलहाल IMF से अपने मौजूदा प्रोग्राम को तेज करने या रकम बढ़ाने की कोई मांग नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा- अगर आगे हमारी अर्थव्यवस्था में कोई कमजोरी आती है, तभी हम IMF से इस बारे में बात करेंगे, अभी के लिए ऐसा कोई विचार नहीं है।
कुल मिलाकर, पाकिस्तान एक तरफ अपने पुराने कर्जों को चुकाने का दबाव झेल रहा है, तो दूसरी तरफ नए बॉन्ड जारी करके और IMF की मदद से अपने विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर रखने की कोशिश कर रहा है।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




साइन इन