कनाडा ने भारत के साथ कर ली ऐसी डील कि रोने लगा पाकिस्तान, बड़ी टेंशन में पड़ोसी देश
भारत और कनाडा के बीच हुए दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौते से पाकिस्तान बुरी तरह बौखला गया है। जानिए कैसे इस डील से भारत की परमाणु ताकत और बढ़ेगी और पड़ोसी देश क्यों इतनी भारी टेंशन में है।

भारत और कनाडा के बीच हाल ही में हुए एक दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौते ने पड़ोसी देश पाकिस्तान की चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं। पाकिस्तान ने इस डील पर गहरी आपत्ति जताते हुए आशंका व्यक्त की है कि इससे भारत के परमाणु हथियारों के भंडार में भारी इजाफा हो सकता है।
कनाडाई पीएम का भारत दौरा और अहम समझौते
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी 27 फरवरी से 2 मार्च तक भारत के महत्वपूर्ण दौरे पर थे। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों में बड़ी प्रगति देखने को मिली। भारत और कनाडा ने यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख समझौतों पर मुहर लगाई। दोनों देशों ने जल्द ही एक व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता संपन्न करने पर भी सहमति व्यक्त की है।
कनाडा की कंपनी कैमेको और भारत सरकार के बीच लगभग 2.6 बिलियन कनाडाई डॉलर का यूरेनियम आपूर्ति समझौता हुआ है। यह समझौता भारत के नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को समर्थन देने के लिए है, जिसमें 2027 से 2035 तक लगभग 22 मिलियन पाउंड (करीब 10 मिलियन किलोग्राम) यूरेनियम की आपूर्ति शामिल है। इसके अलावा, दोनों देश छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों और उन्नत रिएक्टर तकनीकों पर सहयोग करने पर भी सहमत हुए हैं।
पाकिस्तान की बौखलाहट
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए एक बयान जारी किया। उन्होंने कहा- पाकिस्तान ने कनाडा और भारत के बीच हुए दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौते के साथ-साथ छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) और एडवांस रिएक्टर टेक्नोलॉजी पर दोनों पक्षों के बीच संभावित सहयोग को भारी चिंता के साथ नोट किया है।
पाकिस्तान की टेंशन का मुख्य कारण क्या है?
पाकिस्तान ने इस समझौते के रणनीतिक परिणामों को परेशान करने वाला बताया है। पाकिस्तान का मानना है कि बाहर से यूरेनियम की सुनिश्चित आपूर्ति मिलने के बाद, भारत अपने घरेलू यूरेनियम भंडार का इस्तेमाल पूरी तरह से सैन्य उद्देश्यों के लिए करने के लिए स्वतंत्र हो जाएगा। इससे भारत के विखंडनीय सामग्री के भंडार में तेजी से विस्तार होगा और उसके परमाणु हथियारों की क्षमता और बढ़ेगी। पाकिस्तान का दावा है कि इस कदम से दक्षिण एशिया के रणनीतिक संतुलन में मौजूद असमानताएं और अधिक गहरी हो जाएंगी।
कनाडा पर अंतरराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी का आरोप
पाकिस्तान ने केवल भारत ही नहीं, बल्कि कनाडा पर भी निशाना साधा है। उसका कहना है कि यह समझौता अंतरराष्ट्रीय अप्रसार व्यवस्था के प्रति कनाडा की प्रतिबद्धताओं और दायित्वों को कमजोर करता है। पाकिस्तान ने इस डील को नागरिक परमाणु सहयोग के क्षेत्र में एक देश-विशिष्ट अपवाद करार दिया है।
पाकिस्तान ने इस बात को दोहराया है कि नागरिक परमाणु सहयोग हमेशा एक गैर-भेदभावपूर्ण और मानदंड-आधारित दृष्टिकोण द्वारा संचालित होना चाहिए। यह दृष्टिकोण उन सभी देशों पर समान रूप से लागू होना चाहिए जो परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का हिस्सा नहीं हैं।
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