मुझे नहीं मिला नोबेल शांति पुरस्कार तो किसी को नहीं मिले; ट्रंप ने बदल दिया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नाम
आपको बता दें कि वर्ष 2025 में यह पुरस्कार वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को दिया गया था। ट्रंप ने बताया कि मचाडो ने बाद में यह पुरस्कार उन्हें समर्पित करने की पेशकश की थी।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियां बटोरी हैं। फ्लोरिडा के मियामी शहर में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान दिए गए भाषण में ट्रंप ने ईरान को लेकर तीखी टिप्पणी की और साथ ही नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर भी नाराजगी जाहिर की। अपने संबोधन में ट्रंप ने दावा किया कि ईरान अमेरिका के साथ समझौता करने के लिए गिड़गिड़ा रहा है और उसे जल्द ही एक डील करनी चाहिए। इसी दौरान उन्होंने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को गलती से स्ट्रेट ऑफ ट्रंप (Strait of Trump) कह दिया। हालांकि तुरंत ही उन्होंने अपनी बात सुधारते हुए इसे होर्मुज बताया और मजाकिया अंदाज में कहा कि यह एक भयानक गलती थी।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब उन्होंने एक दिन पहले ही ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर संभावित हमलों को 10 दिनों के लिए टालने की घोषणा की थी। इस कदम को क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में एक संकेत माना जा रहा है, हालांकि जमीनी हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं।
अपने भाषण के दौरान ट्रंप ने एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “अगर मुझे शांति का नोबेल पुरस्कार नहीं मिला तो फिर किसी को भी नहीं मिलना चाहिए।” आपको बता दें कि वर्ष 2025 में यह पुरस्कार वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को दिया गया था। ट्रंप ने बताया कि मचाडो ने बाद में यह पुरस्कार उन्हें समर्पित करने की पेशकश की थी।
ट्रंप ने अपने भाषण में खुद को महान शांति स्थापित करने वाला भी बताया। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि इतिहास में उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में हो, जिसने शांति स्थापित की। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मौजूदा परिस्थितियों में यह दावा विरोधाभासी लग सकता है। राष्ट्रपति ने यह भी दावा दोहराया कि उन्होंने आठ युद्धों को रोका है, हालांकि इस दावे को कई बार खारिज किया जा चुका है और इसके समर्थन में कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है।
इधर, अमेरिका और इजरायल द्वारा पिछले महीने शुरू किए गए संघर्ष के चलते मिडिल ईस्ट में हिंसा लगातार बढ़ रही है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल में 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लेबनान में 4 इजरायली सैनिक मारे गए हैं। वहीं लेबनान में 1,100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और ईरान में 1,900 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। इसके अलावा, कम से कम 13 अमेरिकी सैनिकों की भी मौत हो चुकी है। वेस्ट बैंक और खाड़ी देशों में भी कई लोगों की जान गई है।
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