मोदी-ट्रंप की टेलीफोन पर हुई बातचीत में एलन मस्क भी शामिल थे, चौंक गई दुनिया; इनसाइड स्टोरी
अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मस्क इस कॉल का हिस्सा थे। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने चर्चा में सक्रिय रूप से भाग लिया या नहीं, लेकिन उनकी मौजूदगी कई सवाल खड़े करती है।

ईरान युद्ध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मंगलवार को हुई एक महत्वपूर्ण टेलीफोनिक बातचीत में दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क की भागीदारी ने सबको हैरान कर दिया है। 'न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, एक गंभीर भू-राजनीतिक संकट के दौरान दो राष्ट्राध्यक्षों की चर्चा में एक निजी नागरिक का शामिल होना एक असामान्य घटना है। इस बातचीत का मुख्य विषय पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और उसके वैश्विक प्रभाव थे। खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को खुला, सुरक्षित और सुचारु बनाए रखने पर जोर दिया गया। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और विश्व ऊर्जा बाजार की स्थिरता में इसकी बड़ी भूमिका है।
मस्क की मौजूदगी के क्या हैं मायने?
अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मस्क इस कॉल का हिस्सा थे। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने चर्चा में सक्रिय रूप से भाग लिया या नहीं, लेकिन उनकी मौजूदगी कई सवाल खड़े करती है। एलन मस्क की कंपनियों का मध्य पूर्वी संप्रभु वेल्थ फंड्स के साथ गहरा निवेश संबंध है। मस्क लंबे समय से भारत में व्यावसायिक अवसरों की तलाश कर रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में ट्रंप और मस्क के बीच संबंधों में काफी सुधार देखा गया है, जो इस कॉल में उनकी मौजूदगी का एक बड़ा कारण हो सकता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर फोकस
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की रणनीतिक आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि भारत तनाव कम करने और जल्द शांति बहाल करने के पक्ष में है। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर लगातार संपर्क बनाए रखने पर सहमति बनी है।
भारत की ओर से जारी बयान में यह भी रेखांकित किया गया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए सुरक्षित आवाजाही वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब ट्रंप ने ईरान के ठिकानों पर संभावित अमेरिकी हमलों को पांच दिनों के लिए टालने की घोषणा की थी, जिससे तनाव कम होने की उम्मीद जगी है।
पाकिस्तान जा सकते हैं वेंस
इसी बीच खबरें यह भी हैं कि अमेरिका, अपने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को पाकिस्तान भेज सकता है, जहां ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत हो सकती है। यह कदम क्षेत्र में कूटनीतिक समाधान की दिशा में एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
जशंकर ने भी संभाला मोर्चा
भारत की ओर से भी सक्रिय कूटनीतिक पहल जारी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ बातचीत कर इस संकट के वैश्विक बाजार और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की। साथ ही, उन्होंने भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली से भी मुलाकात की और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।
भारत लगातार ईरान के संपर्क में बना हुआ है ताकि वहां फंसे भारतीय जहाजों और नागरिकों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके। हाल ही में कुछ जहाजों को मार्ग दिया गया है, जबकि कुछ अब भी स्ट्रेट के पास मौजूद हैं।
भारत की कूटनीति
सरकार ने ट्रंप के सैन्य कार्रवाई टालने के फैसले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत का मानना है कि इस संकट का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि भारत, अमेरिका के नेतृत्व वाले उस नौसैनिक गठबंधन में शामिल होने को लेकर उत्सुक नहीं दिखा जिसका उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित बनाए रखना है। यह रुख भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और संतुलित कूटनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
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