How US rescued their fighter pilots of F15 Jets in Iran Full detail of mission दुश्मन देश, ईरानी सेना की निगाहें; फिर अमेरिका ने अपने पायलटों को कैसे बचाया, International Hindi News - Hindustan
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दुश्मन देश, ईरानी सेना की निगाहें; फिर अमेरिका ने अपने पायलटों को कैसे बचाया

ईरान में लापता हुए अमेरिकी फाइटर पायलट को बचा लिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को इस बारे में दावा किया। उनका कहना है कि पायलट घायल है, लेकिन वह बिल्कुल ठीक हो जाएगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि उसने ईरान के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में शरण ली थी।

Sun, 5 April 2026 03:58 PMDeepak Mishra लाइव हिन्दुस्तान
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दुश्मन देश, ईरानी सेना की निगाहें; फिर अमेरिका ने अपने पायलटों को कैसे बचाया

ईरान में लापता हुए अमेरिकी फाइटर पायलट को बचा लिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को इस बारे में दावा किया। उनका कहना है कि पायलट घायल है, लेकिन वह बिल्कुल ठीक हो जाएगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि उसने ईरान के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में शरण ली थी। अमेरिकी राष्ट्रपति के अनुसार, बचाव अभियान में दर्जनों विमान शामिल थे और अमेरिका उसकी लोकेशन पर 24 घंटे नजर रखे हुए था तथा उसके बचाव की सावधानीपूर्वक योजना बना रहा था। हालांकि ईरान का कहना है कि पायलट को बचाने का अमेरिकी अभियान विफल रहा और दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और एक सी-130 सहायक विमान को मार गिराया गया। आइए जानते हैं कैसे चला ईरान में अमेरिकी बचाव अभियान...

जैसे ही शुक्रवार को अमेरिका का एफ-15ई क्रैश हुआ, अमेरिका ने एक बेहद हाई लेवल का तलाशी और बचाव अभियान शुरू कर दिया। वहीं, ईरान ने भी दुश्मन पायलट के ऊपर इनाम रख दिया। इसमें कहा गया कि जो कोई भी अमेरिकी पायलट को पकड़कर लाएगा, उसे इनाम दिया जाएगा। इस युद्ध के दौरान यह पहली बार हुआ है जब ईरान ने किसी अमेरिकी एयरक्राफ्ट को मार गिराया है। इससे पहले, कुवैत के एयर डिफेंस में फ्रेंडली फायर में तीन एफ-15 मार गिराए गए थे।

पहाड़ी में ले रखा था कवर
जानकारी के मुताबिक दोनों एफ-15 पायलटों और वेपंस सिस्टम अधिकारी ने खुद को इजेक्ट करने के बाद अपने कम्यूनिकेशन सिस्टम से संपर्क किया। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक अफसरों ने एक पहाड़ी में कवर ले रखा था। काफी समय तक तो अमेरिकी अफसर भी उन्हें तलाश नहीं पाए। वहीं, ईरान को भी इस दिशा में सफलता नहीं मिल रही थी। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक वेपंस सिस्टम अधिकारी का पता चलने से पहले, सीआईए ने एक धोखाधड़ी अभियान चलाया। उसने जानबूझकर ईरान में एक झूठी खबर फैला दी कि अमेरिकी सेना ने गुम हुए पायलटों का पता लगा लिया है और उन्हें निकालने की कोशिश हो रही है।

सीआईए ने निभाई बड़ी भूमिका
ठीक इसी समय, अमेरिकी एजेंसी ने खास क्षमता का इस्तेमाल करके उनकी पोजीशन का पता लगा लिया। अधिकारी ने बताया कि सीआईए ने बाद में पेंटागन, अमेरिकी सेना और वाइट हाउस को इन अमेरिकी सैनिकों की जानकारी दी। इसके बाद ट्रंप ने तत्काल रेस्क्यू मिशन चलाने का आदेश दिया। एफ-15ई लड़ाकू जेट को ईरान के उस हिस्से में नीचे गिरा दिया गया जहां ईरानी सरकार के खिलाफ काफी विरोध है। ऐसे में माना जा रहा था कि अमेरिकी विमान चालक को वहां पर स्थानीय निवासियों से मदद और आश्रय मिल सकता है।

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ईरान ने किया रोकने का प्रयास
अमेरिकी समाचार वेबसाइट एक्सियोस को अधिकारियों ने बताया कि ईरान के इस्लामी क्रांति गार्ड कॉर्प्स ने भी बचाव को रोकने के प्रयास में क्षेत्र में बल तैनात किए। इसके अलावा ईरानी सेना ने अमेरिकी वायु सेना के विमानों पर हमले भी किए, ताकि उन्हें उस जगह पहुंचने से रोक सकें। लेकिन एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के मुताबिक सभी कमांडो और वेपंस अधिकारी सुरक्षित लौट आए। बाद में बचाव विमान घायल एयरमैन को इलाज के लिए कुवैत ले जाया गया।

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