Former diplomat KP Fabian on fragile US Iran peace talks in Pakistan Tail wags the dog 'पूंछ कुत्ते को हिलाती है', पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान की बातचीत पर पूर्व राजनयिक ने क्या कहा, International Hindi News - Hindustan
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'पूंछ कुत्ते को हिलाती है', पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान की बातचीत पर पूर्व राजनयिक ने क्या कहा

सीनियर राजनयिक ने कहा, ‘कूटनीति संभव की कला है। इस समय मैं कल्पना भी नहीं कर सकता कि ईरानी और इजरायली एक ही कमरे या एक ही इमारत में बैठें, लेकिन मुझे लगता है कि यह अहम नहीं है। असली मायने में राष्ट्रपति ट्रंप रखते हैं।’

Sat, 11 April 2026 05:47 PMNiteesh Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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'पूंछ कुत्ते को हिलाती है', पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान की बातचीत पर पूर्व राजनयिक ने क्या कहा

इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही उच्च-स्तरीय बातचीत पर सीनियर राजनयिक केपी फेबियन ने तीखी टिप्पणी की है। एएनआई से बात करते हुए फेबियन ने कहा कि वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच का रिश्ता स्थायी शांति की राह में सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने इस गठबंधन के बारे में एक मुहावरा दोहराते हुए कहा कि 'पूंछ कुत्ते को हिलाती है'। फेबियन ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को कमरे में हाथी करार दिया, जो बातचीत की सफलता को रोकने की कोशिश कर रहे हैं।

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सीनियर राजनयिक फेबियन ने कहा, 'कूटनीति संभव की कला है। इस समय मैं कल्पना भी नहीं कर सकता कि ईरानी और इजरायली एक ही कमरे या एक ही इमारत में बैठें, लेकिन मुझे लगता है कि यह अहम नहीं है। असली मायने में राष्ट्रपति ट्रंप रखते हैं। समस्या यह है कि अमेरिका और इजरायल के रिश्ते में कभी-कभी 'पूंछ कुत्ते को हिलाती है' वाली स्थिति बन जाती है। नेतन्याहू का ट्रंप पर कुछ ऐसा प्रभाव है जिसकी व्याख्या करना आसान नहीं है। मेरा अनुमान है कि उन्होंने 28 फरवरी को युद्ध शुरू करवाने के लिए इसी प्रभाव का इस्तेमाल किया, लेकिन अब ट्रंप बढ़ती राजनीतिक कीमत को समझ रहे हैं और खुद को मजबूत तरीके से पेश करने जा रहे हैं।'

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नेतन्याहू को क्यों बताया 'बातचीत का स्पॉइलर'

केपी फेबियन ने नेतन्याहू को 'बातचीत का स्पॉइलर' बताया और कहा कि वे इन वार्ताओं की सफलता नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि शुरू में ट्रंप इजरायली दबाव में आ गए थे, लेकिन अब बढ़ती राजनीतिक लागत के कारण उन्हें बातचीत के लिए मजबूर होना पड़ा है। उन्होंने कहा, 'अमेरिका और ईरान दोनों ही सफलता चाहते हैं, हालांकि अलग-अलग कारणों से। राष्ट्रपति ट्रंप बढ़ती राजनीतिक लागत के कारण प्रेरित हैं, जबकि ईरान स्वाभाविक रूप से कमजोर पक्ष है। ट्रंप उन्हें पत्थर के युग में भले ही वापस न भेज सकें, लेकिन बमबारी से पहले ही काफी नुकसान और मौतें हो चुकी हैं।'

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राजनयिक ने कहा कि अगर युद्ध जारी रहा तो ईरान गाजा जैसी स्थिति का सामना कर सकता है। फेबियन ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की संरचना की सबसे ज्यादा आलोचना की। उन्होंने कहा कि स्टेट डिपार्टमेंट के अनुभवी पेशेवर राजनयिकों की जगह राजनीतिक नियुक्तियों को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि इनमें परमाणु वार्ता जैसे जटिल मुद्दों की तकनीकी समझ की कमी है। उन्होंने उपराष्ट्रपति जेडी वांस की तारीफ करते हुए कहा कि वे पिछले परिवार-केंद्रित कूटनीतिक प्रयासों की तुलना में काफी बेहतर हैं।

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