होर्मुज में ईरान की बिछाईं बारूदी सुरंगे हटा रहा अमेरिका, दो जंगी जहाज गुजरे; युद्ध के बाद पहली बार हुआ ऐसा
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता शुरू हो गई है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में हो रही ये बातचीत 2 सप्ताह के नाजुक सीजफायर के बीच हो रही है। संघर्ष अब दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को घोषणा की कि होर्मुज स्ट्रेट को साफ करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस कड़ी में 2 अमेरिकी युद्धपोतों ने होर्मुज स्ट्रेट को पार किया, जो ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद पहली ऐसी आवाजाही है। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने तीन अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर बिना किसी समस्या के स्ट्रेट से गुजरे। इस ऑपरेशन के बारे तेहरान की सरकार के साथ तालमेल नहीं किया गया था। ट्रंप ने इसे चीन, जापान और फ्रांस जैसे देशों के लिए एक एहसान बताया, जो खुद यह काम करने की हिम्मत या इच्छाशक्ति नहीं रखते।
होर्मुज स्ट्रेट विश्व के कच्चे तेल का 5वां हिस्सा गुजरने वाला बेहद अहम समुद्री मार्ग है। ईरान ने 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर बमबारी शुरू होने के बाद इस स्ट्रेट को लगभग बंद कर दिया था। ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल पोस्ट में कहा कि ईरान युद्ध में बुरी तरह हार रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि ईरानी समुद्री माइन्स अभी भी खतरा बने हुए हैं। हालांकि, बारूदी सुरंगों को साफ किया जा रहा है।
युद्ध रोकने को लेकर बातचीत जारी
इस घटना के ठीक पहले अमेरिकी और ईरानी सीनियर अधिकारियों के बीच पाकिस्तान में बातचीत शुरू हुई है, जिसका उद्देश्य मध्य पूर्व को हिंसा में डुबोने वाले इस संघर्ष को समाप्त करना है। युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला है। हाल ही में लगाए गए अस्थिर युद्धविराम में होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना एक प्रमुख शर्त थी, लेकिन ईरान ने इसे मानने में देरी की। अमेरिकी नौसेना का यह कदम क्षेत्र में तनाव कम करने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बहाल करने की दिशा में अहम प्रयास माना जा रहा है।
जानकारों का मानना है कि ताजा आवाजाही वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए सकारात्मक संकेत है, हालांकि माइन्स का खतरा अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अमेरिका इस क्षेत्र को साफ करके विश्व समुदाय की मदद कर रहा है। अगर बातचीत सफल रही तो स्थायी शांति की संभावना बढ़ सकती है, नहीं तो तनाव और बढ़ सकता है।
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