ईरान युद्ध में सैन्य तैनाती से ट्रंप का इनकार, कहा- सैनिकों को कहीं नहीं भेज रहा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध में यूएस सैनिक भेजने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह सैनिकों को कहीं नहीं भेज रहे हैं। इससे पहले युद्ध की शुरुआत में ट्रंप ने कहा था कि वह सैनिकों को भेजने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने पश्चिम एशिया के युद्ध में यूएस आर्मी को भेजने की संभावना से इनकार कर दिया है। ट्रंप ने गुरुवार को इस बात के संकेत दिए कि युद्ध के चौथे सप्ताह में पहुंचने के बाद भी वह ईरान युद्ध में अमेरिकी सैनिकों को भेजने के पक्ष में नहीं है। जापानी पीएम तकाइची के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि वह सैनिक भेजने के पक्ष में नहीं हैं। बता दें कि ईरान युद्ध के शुरू होने के दो दिन बाद ट्रंप ने कहा था कि उन्हें जमीन पर सैनिक भेजने में कोई डर नहीं है।
वाइट हाउस में जापानी प्रधानमंत्री तकाइची के साथ मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने ईरान में जारी युद्ध पर सवालों के जवाब दिए। ट्रंप से जब पूछा गया कि क्या ट्रंप प्रशासन ईरान में सैनिक भेजने के बारे में सोच रहा है? इसका जवाब देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “मैं कहीं भी सैनिक नहीं भेज रहा हूं... अगर मैं भेज भी रहा होता, तो मैं निश्चित रूप से आपको नहीं बताता। लेकिन मैं साफ कर देना चाहता हूं कि मै वहां पर सैनिक नहीं भेज रहा हूं। हम जो भी जरूरी होगा, वह करेंगे।” बता दें, डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी सैनिकों को दूसरे देश में युद्ध लड़ने के सबसे बड़े विरोधी रहे हैं। अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी उन्होंने अफगानिस्तान तालिबान के साथ समझौता करने में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि, अफगानिस्तान से सैनिकों के लौटने के पहले उनका कार्यकाल खत्म हो गया था।
इस युद्ध के बाद दुनिया ज्यादा सुरक्षित होगी: ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को दुनिया और मध्य-पूर्व के लिए एक बड़ा खतरा करार दिया। उन्होंने कहा कि ईरान पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा है और इस बात पर दुनिया के लगभग सभी देश उनसे सहमत हैं। ट्रंप ने कहा, "हम यह अभियान चला रहे हैं, और जब यह पूरा हो जाएगा, तो दुनिया कहीं ज्यादा सुरक्षित होगी।" ट्रंप ने कहा, "ईरान दुनिया, मध्य पूर्व और सभी के लिए एक गंभीर खतरा है और इस पर लगभग हर देश मुझसे सहमत है।"
अमेरिकी सेना दुनिया में सबसे ताकतवर: ट्रंप
ईरान युद्ध में अमेरिकी सेना की बहादुरी की तारीफ करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना दुनिया की सबसे मजबूत सेना है। उन्होंने कहा, "हमारे पास दुनिया की सबसे मजबूत सेना है। हमारे पास सबसे बेहतरीन हथियार हैं। हम सबसे अच्छे हथियार बनाते हैं। उस रात 114 रॉकेट दागे गए थे और हर एक को हमारे एयर डिफेंस से नष्ट कर दिया गया। यह वाकई अद्भुत है। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हम हमेशा सर्वोत्तम स्थिति में रहें।"
गौरतलब है कि 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के साथ शुरू हुए इस संघर्ष को 20 दिन बीत चुके हैं। ट्रंप और नेतन्याहू ने उम्मीद लगाई थी कि खामेनेई के मारे जाने के बाद ईरान की जनता विद्रोह कर देगी और कुछ ही दिनों में यह युद्ध खत्म हो जाएगा। लेकिन ईरान की जनता से उन्हें ज्यादा कोई समर्थन नहीं मिला और अब ट्रंप अमेरिका को एक लंबे युद्ध में उलझाते नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्ध की शुरूआत के बाद मुख्य तौर पर दो लक्ष्य बताए थे। इनमें से पहला सत्ता परिवर्तन और दूसरा एनरिच्ड यूरेनियम को खत्म करना। ईरान के मजबूत पलटवार और ईरान जनता का सड़कों पर न उतरने ने अमेरिका के इन दोनों सपनों पर एक तरह से पानी फेर दिया है।
इस मामले के जानकारों की मानें तो अमेरिका और इजरायल हवाई हमले चाहें कितने भी कर लें, लेकिन वह सत्ता को पलटने के लिए काफी नहीं होगा। वहीं, दूसरी ओर ईरान ने अपने संवर्धित यूरेनियम को भी कई फिट गहरे भूमिगत बंकरों में छिपा रखा है। पिछले वर्ष बी-2 बॉम्बर के जरिए गिराए गए बॉम्ब के बाद भी वह नष्ट नहीं हुआ था। ऐसे में हवाई हमलों के जरिए उसके नष्ट होने की संभावना न के बराबर है। ट्रंप को इन दोनों उद्देश्यों को पूरा करने के लिए ईरान में सैनिकों की जरूरत पड़ेगी, जो कि उनके लिए बहुत महंगा पड़ सकता है। क्योंकि ईरान की धरती पर ईरान की सेना से लड़ना आसान नहीं होगा।
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