Donald Trump decision to launch a military campaign against Iran in collaboration with Israel नेतन्याहू ने ट्रंप को तो जीत लिया, मगर अमेरिका को कैसे हार गए; समझिए, International Hindi News - Hindustan
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नेतन्याहू ने ट्रंप को तो जीत लिया, मगर अमेरिका को कैसे हार गए; समझिए

पिछले तीन दशकों में नेतन्याहू के नेतृत्व में इजरायल के प्रति अमेरिकी डेमोक्रेटिक पार्टी के आम मतदाताओं में समर्थन तेजी से गिरा है। इससे डेमोक्रेटिक पार्टी के युवा नेताओं को इजरायल की आलोचना करने की छूट मिली है। अब ईरान युद्ध इस विभाजन को और गहरा कर रहा है।  

Mon, 16 March 2026 06:49 PMNiteesh Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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नेतन्याहू ने ट्रंप को तो जीत लिया, मगर अमेरिका को कैसे हार गए; समझिए

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चलाया जा रहा है, जो इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की दशकों पुरानी रणनीति की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है। नेतन्याहू ने लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी के सबसे रूढ़िवादी तत्वों (ईसाई इवैंजेलिकल्स और कंजर्वेटिव यहूदी) को अपना मुख्य आधार बनाया है। यह अभियान ईरान और उसके प्रॉक्सी समूहों के खिलाफ अभूतपूर्व हमला है, लेकिन यह अल्पकालिक जीत साबित हो सकता है, जिसके आने वाले समय में भारी नुकसान होंगे। नेतन्याहू की रणनीति ने अमेरिका में इजरायल के समर्थन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

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पिछले तीन दशकों में नेतन्याहू के नेतृत्व में इजरायल के प्रति अमेरिकी डेमोक्रेटिक पार्टी के आम मतदाताओं में समर्थन तेजी से गिरा है। इससे डेमोक्रेटिक पार्टी के युवा नेताओं को इजरायल की आलोचना करने की छूट मिली है। अब ईरान युद्ध इस विभाजन को और गहरा कर रहा है। नेतन्याहू ने जानबूझकर अमेरिकी दक्षिणपंथी ताकतों पर फोकस किया और डेमोक्रेट्स को नजरअंदाज किया। पूर्व अमेरिकी अधिकारी एरॉन डेविड मिलर के अनुसार, नेतन्याहू ने 20 साल पहले तय कर लिया था कि उनका प्राकृतिक समर्थक आधार रिपब्लिकन हैं और उन्होंने बाकी को छोड़ दिया। क्लिंटन, ओबामा और बाइडेन जैसे डेमोक्रेटिक राष्ट्रपतियों से उनके संबंध तनावपूर्ण रहे, जबकि ट्रंप के साथ उन्होंने मजबूत साझेदारी बनाई।

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किस तरह बदले रिश्ते

अमेरिका में इजरायल के प्रति समर्थन अब दशकों के निचले स्तर पर है। शिकागो काउंसिल और गैलप के सर्वे से पता चलता है कि अमेरिकियों में इजरायल के प्रति सकारात्मक राय 1970 के दशक से घटी है। पहली बार गैलप के सर्वे में फिलिस्तीनियों के प्रति सहानुभूति इजरायल से अधिक हो गई। डेमोक्रेट्स में यह बदलाव सबसे ज्यादा है। युवा डेमोक्रेट्स में फिलिस्तीनियों के प्रति सहानुभूति इजरायल से सात गुना अधिक है। क्विनिपियाक पोल में अधिकांश युवा डेमोक्रेट्स ने कहा कि अमेरिका इजरायल का बहुत समर्थन कर रहा है। यहां तक कि रिपब्लिकन्स में भी युवा वोटरों (18-34 वर्ष) में इजरायल का समर्थन घटा है, 2008 में आठ गुना से अब मात्र दो गुना रह गया है।

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अगर ईरान युद्ध के खर्च बढ़ते रहे और इससे रिपब्लिकन्स को मिडटर्म चुनावों में नुकसान हुआ, तो GOP में इजरायल विरोध बढ़ सकता है। अगला डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति इजरायल का बिना शर्त समर्थन नहीं करेगा और रिपब्लिकन में भी ट्रंप जैसी निकटता की संभावना कम है। नेतन्याहू ने बाइपार्टिसन समर्थन छोड़ दिया, जिससे इजरायल को अमेरिका में स्थिर समर्थन किसी भी पार्टी से नहीं मिल सकता। यह इजरायल-अमेरिका संबंधों के लिए लंबे समय का नुकसान साबित हो सकता है।

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