China opposes criticizes decision to confer Grammy to Dalai Lama called it Anti Chinese activity under religion guise दलाई लामा को मिला ग्रैमी अवॉर्ड तो क्यों जल-भुन उठा चीन? किस बात की इतनी मिर्ची, क्या डर, International Hindi News - Hindustan
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दलाई लामा को मिला ग्रैमी अवॉर्ड तो क्यों जल-भुन उठा चीन? किस बात की इतनी मिर्ची, क्या डर

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि दलाई लामा सिर्फ धार्मिक नेता नहीं हैं, बल्कि वे धर्म की आड़ में चीन विरोधी राजनीति करते हैं। चीन ने कहा कि वह किसी भी अवॉर्ड का इस्तेमाल चीन विरोधी गतिविधियों के लिए किए जाने का कड़ा विरोध करता है।

Mon, 2 Feb 2026 05:13 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, बीजिंग
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दलाई लामा को मिला ग्रैमी अवॉर्ड तो क्यों जल-भुन उठा चीन? किस बात की इतनी मिर्ची, क्या डर

तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा को 90 साल की उम्र में उनके शांति, करुणा और मानवीय मूल्यों के प्रसार के प्रयासों के लिए ग्रैमी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है लेकिन चीन को इससे मिर्ची लग गई है। चीन ने सोमवार को दलाई लामा को दिए गए ग्रैमी पुरस्कार की निंदा करते हुए कहा कि वह तिब्बती आध्यात्मिक नेता द्वारा इस सम्मान का उपयोग 'चीन विरोधी गतिविधियों' को अंजाम देने के लिए किए जाने का कड़ा विरोध करता है। दलाई लामा को पुरस्कार मिलने पर उनकी प्रतिक्रिया पूछे जाने पर, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने चीन के इस आरोप को दोहराया कि 90 वर्षीय आध्यात्मिक नेता धर्म के नाम पर अलगाववादी गतिविधियां चला रहे हैं।

दरअसल, अमेरिका के लॉस एंजिल्स में हुए 68वें ग्रैमी अवॉर्ड्स में दलाई लामा को उनकी ऑडियो बुक “Meditations: The Reflections of His Holiness the Dalai Lama” के लिए सम्मान मिला। यह अवॉर्ड उन्हें Best Audio Book, Narration and Storytelling Recording कैटेगरी में दिया गया है। इस ऑडियो बुक में दलाई लामा शांति, करुणा, ध्यान और इंसानी मूल्यों पर अपनी बातें साझा करते हैं, साथ ही इसमें संगीत और दूसरे कलाकारों की भी झलक है। मज़ेदार बात यह है कि इस कैटेगरी में उनके मुकाबले कॉमेडियन ट्रेवर नोआ और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की जज केतनजी ब्राउन जैक्सन जैसे नाम भी थे।

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दलाई लामा विशुद्ध रूप से धार्मिक व्यक्ति नहीं: चीन

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि दलाई लामा विशुद्ध रूप से धार्मिक व्यक्ति नहीं हैं। उन्होंने कहा, "वह एक राजनीतिक निर्वासित हैं, जो धर्म की आड़ में चीन विरोधी अलगाववादी गतिविधियों के लिए प्रतिबद्ध हैं।" उन्होंने कहा कि बीजिंग इस बात का पुरजोर विरोध करता है कि संबंधित पक्ष इस पुरस्कार का इस्तेमाल चीन विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए एक उपकरण के रूप में करें।

1959 से धर्मशाला में रह रहे दलाई लामा

दलाई लामा 1959 में तिब्बत छोड़ने के बाद से हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में निर्वासन में रह रहे हैं। उनको तिब्बत को मुक्त कराने के लिए उनके निरंतर, अहिंसक संघर्ष के लिए 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने इस श्रेणी में कैथी गार्वर (एल्विस रॉकी एंड मी: द कैरल कॉनर्स स्टोरी), ट्रेवर नोआ (इंटू द अनकट ग्रास), केतनजी ब्राउन जैक्सन (लवली वन: ए मेमॉयर) और फैब मोरवन (यू नो इट्स ट्रू: द रियल स्टोरी ऑफ मिली वैनिली) जैसे कलाकारों को पीछे छोड़ते हुए यह पुरस्कार जीता।

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दलाई लामा ने जताया आभार

दलाई लामा ने यह पुरस्कार मिलने पर आभार व्यक्त करते हुए कहा, ''मैं इस सम्मान को कृतज्ञता और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं। मैं इसे व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि हमारी साझा वैश्विक जिम्मेदारी की मान्यता के रूप में देखता हूं।'' उन्होंने कहा, ''मेरा दृढ़ विश्वास है कि शांति, करुणा, पर्यावरण की देखभाल और मानवता की एकता की समझ, सभी आठ अरब लोगों के सामूहिक कल्याण के लिए आवश्यक है।'' दलाई लामा ने कहा, “मैं आभारी हूं कि यह ग्रैमी सम्मान इन संदेशों को व्यापक रूप से फैलाने में मदद कर सकता है।”

दुनिया में सम्मान, राजनीति में तनाव

दलाई लामा को दुनिया भर में शांति और अहिंसा का प्रतीक माना जाता है। वे नोबेल शांति पुरस्कार भी जीत चुके हैं। 1959 में तिब्बत में हुए विद्रोह के बाद वे भारत आ गए थे और तब से यहीं रह रहे हैं। उनका ग्रैमी जीतना एक तरफ जहाँ उनकी शिक्षाओं को मिला वैश्विक सम्मान दिखाता है, वहीं दूसरी तरफ यह भी साफ करता है कि तिब्बत और चीन से जुड़ा विवाद आज भी खत्म नहीं हुआ है। कुल मिलाकर, शांति की बात करने वाला एक संत जब म्यूज़िक अवॉर्ड जीता है, तो दुनिया खुश है लेकिन राजनीति गरम हो गई है। (एजेंसी इनपुट्स के साथ)

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