China building launch pads near nuclear missile silos Viral satellite images चीन न्यूक्लियर मिसाइल कंटेनरों के पास बना रहा लॉन्च पैड, सेटेलाइट तस्वीरों से खुलासा; क्या मकसद, International Hindi News - Hindustan
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चीन न्यूक्लियर मिसाइल कंटेनरों के पास बना रहा लॉन्च पैड, सेटेलाइट तस्वीरों से खुलासा; क्या मकसद

यह नया डिफेंसिव नेटवर्क हजारों वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। इसमें मोबाइल मिसाइल लॉन्चर्स, एयर डिफेंस बैटरियां, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और सैटेलाइट कम्युनिकेशन सुविधाएं शामिल हो सकती हैं। 

Fri, 29 May 2026 11:33 PMNiteesh Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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चीन न्यूक्लियर मिसाइल कंटेनरों के पास बना रहा लॉन्च पैड, सेटेलाइट तस्वीरों से खुलासा; क्या मकसद

चीन अपने दूरदराज के रेगिस्तानी इलाके में एक विशाल सैन्य परिसर तेजी से बना रहा है। सेटेलाइट तस्वीरों से पता चला कि बीजिंग अपनी न्यूक्लियर मिसाइलों के कंटेनरों के आसपास 80 से अधिक लॉन्च पैड बना रहा है। ये निर्माण शिनजियांग और गांसू प्रांतों के रेगिस्तानी क्षेत्रों में फैले हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ढांचा हमले की स्थिति में चीन की परमाणु क्षमता को सुरक्षित रखने और जवाबी हमला सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया जा रहा है। चीन की परमाणु मिसाइलें दूसरे देशों के कई शहरों तक पहुंच सकती हैं।

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यह नया डिफेंसिव नेटवर्क हजारों वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। इसमें मोबाइल मिसाइल लॉन्चर्स, एयर डिफेंस बैटरियां, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और सैटेलाइट कम्युनिकेशन सुविधाएं शामिल हो सकती हैं। 2 ऑक्टागन संरचनाएं हामी साइलो से 140-230 किलोमीटर दूर हैं, जिनमें सैनिकों के लिए आवास, वाहन स्टोरेज और कम्युनिकेशन सेंटर हैं। तीसरी ऑक्टागन का उपयोग लक्ष्य अभ्यास के लिए किया जा रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि यह निर्माण चीन की हमला क्षमता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है।

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चीन की क्या है परमाणु नीति

चीन की आधिकारिक नीति नो फर्स्ट यूज है, यानी वह पहले परमाणु हमला नहीं करेगा। लेकिन ताइवान मुद्दे पर बढ़ते तनाव के बीच यह विस्तार अमेरिका के साथ परमाणु संघर्ष को तेज कर रहा है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ताइवान पर चेतावनी दी थी। पेंटागन रिपोर्ट के अनुसार, चीन 2030 तक 1000 परमाणु वारहेड्स तक पहुंचने की राह पर है।

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चीन का नया निर्माण लंबी दूरी की परमाणु मिसाइलों (ICBMs) को बेहतर सुरक्षा प्रदान करेगा, जिससे दुश्मन के पहले हमले का जवाब देना आसान हो जाएगा। बीजिंग का इसे असाधारण प्रयास बताया जा रहा है। यह चीन को अमेरिका और रूस से अलग करते हुए बड़े स्तर पर डिफेंसिव इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान कर रहा है। चीन के रक्षा मंत्रालय ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

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