Bangladeshi president has accused Yunus of seizing power and creating instability in Dhaka बनाया महल का कैदी, संविधान की उड़ाई धज्जियां; बांग्लादेश प्रेसिडेंट ने खोले यूनुस के काले कारनामे, International Hindi News - Hindustan
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बनाया महल का कैदी, संविधान की उड़ाई धज्जियां; बांग्लादेश प्रेसिडेंट ने खोले यूनुस के काले कारनामे

बांग्लादेश में सियासी तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा है। तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार के सत्ता संभालने के महज कुछ दिनों बाद ही राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने पूर्व मुख्य सलाहकार और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस पर गंभीर आरोप लगाते हुए बड़ा खुलासा किया है।

Mon, 23 Feb 2026 06:39 PMDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान, ढाका
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बनाया महल का कैदी, संविधान की उड़ाई धज्जियां; बांग्लादेश प्रेसिडेंट ने खोले यूनुस के काले कारनामे

बांग्लादेश में सियासी तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा है। तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार के सत्ता संभालने के महज कुछ दिनों बाद ही राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने पूर्व मुख्य सलाहकार और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस पर गंभीर आरोप लगाते हुए बड़ा खुलासा किया है। बंगाली दैनिक 'कलेर कंठो' से बात करते हुए राष्ट्रपति ने दावा किया कि यूनुस के डेढ़ साल के अंतरिम शासनकाल में उन्हें 'महल का कैदी' बनाकर रखा गया, संवैधानिक दायित्वों का उल्लंघन किया गया, और यहां तक कि उन्हें असंवैधानिक तरीके से पद से हटाने की साजिश भी रची गई।

राष्ट्रपति ने कहा कि पूर्व मुख्य सलाहकार यूनुस ने अंतरिम सरकार के दौरान उनके साथ संवैधानिक रूप से आवश्यक संचार बनाए नहीं रखा। उन्होंने कहा कि उन्हें न तो विदेशी दौरों के बारे में सूचित किया गया और न ही राज्य के मामलों पर कोई जानकारी दी गई, जिसे उन्होंने 'संवैधानिक दायित्व' बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि मुख्य सलाहकार ने संविधान के किसी भी प्रावधान का पालन नहीं किया। जब भी वे विदेश जाते थे, तो लौटने के बाद राष्ट्रपति से मिलना होता था और मुझे लिखित रूप में परिणामों की जानकारी देनी होती थी। उन्होंने 14 से 15 बार विदेश यात्रा की, लेकिन एक बार भी मुझे सूचित नहीं किया। वे मुझसे मिलने कभी नहीं आए।

डेढ़ साल तक बंदी बनाकर रखा गया

शहाबुद्दीन ने आरोप लगाया कि पिछले डेढ़ साल से उन्हें महल (बंगभवन) में बंदी बनाकर रखा गया है और उनकी दो नियोजित विदेश यात्राएं (कोसोवो और कतर) यूनुस प्रशासन द्वारा रोक दी गईं। जब उनसे पूछा गया कि क्या पूर्व मुख्य सलाहकार ने 133 अध्यादेशों को जारी करने सहित राज्य के निर्णयों पर राष्ट्रपति के साथ समन्वय किया था, तो शहाबुद्दीन ने कहा कि हालांकि कुछ अध्यादेश परिस्थितियों के कारण आवश्यक हो सकते हैं, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में अध्यादेश जारी करने का कोई औचित्य नहीं था।

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जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें चुनाव से पहले अंतरिम सरकार द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ किए गए अंतिम समझौते की जानकारी थी, तो राष्ट्रपति ने कहा, "नहीं, मुझे कुछ नहीं पता। इस तरह के घटनाक्रमों के बारे में मुझे औपचारिक रूप से सूचित किया जाना चाहिए था। चाहे समझौता छोटा हो या बड़ा, पूर्व राष्ट्राध्यक्षों ने राष्ट्रपति को सूचित किया था। और यह संवैधानिक दायित्व है। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने मुझे न तो मौखिक रूप से और न ही लिखित रूप से सूचित किया। वे आए ही नहीं। जबकि उन्हें आना ही था!"

रची गई थी भयानक साजिश

शहाबुद्दीन ने कहा कि एक समय तो पूर्व मुख्य न्यायाधीश को असंवैधानिक तरीकों से लाकर उनकी जगह नियुक्त करने की साजिश भी रची गई थी। लेकिन उन्होंने आगे कहा कि एक न्यायाधीश ने संवैधानिक बाध्यताओं का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। उन्होंने 22 अक्तूबर 2024 को बंगभवन के बाहर हुए विरोध प्रदर्शनों को 'भयानक रात' बताया और कहा कि भीड़ जुटाई गई थी और राष्ट्रपति आवास को लूटने के प्रयास किए गए थे, जिन्हें अंततः सैन्य तैनाती के साथ नियंत्रण में लाया गया।

शहाबुद्दीन ने कहा कि बांग्लादेशी सेना और बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) के नेतृत्व ने संवैधानिक निरंतरता बनाए रखने में उनकी मदद की। उन्होंने कहा कि तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने उन्हें स्पष्ट रूप से कहा कि आप सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर हैं। आपकी हार का मतलब पूरे सशस्त्र बलों की हार है। हम हर कीमत पर इसे रोकेंगे।

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