बांग्लादेश के लिए क्या है तारिक रहमान का 180 दिनों का मास्टरप्लान, हिंदुओं के लिए क्या खास?
प्रधानमंत्री रहमान ने देशवासियों को संदेश देते हुए कहा कि वे देश के मुस्लिम, हिंदू, बौद्ध, ईसाई, पहाड़ों में रहने वाले और मैदानों में रहने वाले सभी लोगों से कहना चाहता हैं कि यह देश सबका है और बीएनपी हर नागरिक के लिए हम देश को सुरक्षित बनाना चाहती है।
बांग्लादेश के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने देश के लिए अपना 180 दिनों का मास्टरप्लान पेश किया है। इस दौरान नई सरकार ने अपनी प्राथमिकताएं भी स्पष्ट की हैं। खास बात यह है कि आम तौर पर बांग्लादेश में नई सरकार बनने पर वह 100 दिन का एजेंडा पेश करती थी, लेकिन रहमान ने इसे बढ़ाकर 180 दिनों का कर दिया है।
तारिक रहमान ने हर मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह इन 180 दिनों के भीतर अपनी-अपनी कार्ययोजना तैयार करे और उसे लागू करे। इस योजना में तारिक रहमान ने चार मुख्य प्राथमिकताओं पर जोर दिया है। रहमान के मुताबिक उनकी सरकार की पहली प्राथमिकता देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति को सुधारना होगा। मुहम्मद यूनुस के शासन में अल्पसंख्यकों पर बढ़े हमलों और भीड़-तंत्र के बाद स्थिति को नियंत्रित करना उनकी सरकार के लिए अहम चुनौती होगी।
इसके अलावा जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण करना भी सरकार की मुख्य प्राथमिकताओं में से एक होगी। वहीं उन्होंने कहा है कि उनकी सरकार बिना रुकावट बिजली और गैस की सप्लाई सुनिश्चित करना और महंगाई कम करने की दिशा में भी काम करेगी। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश भी दिया है।
हिंदुओं पर क्या बोले?
इससे पहले पदभार ग्रहण करने के बाद राष्ट्र को अपने पहले टेलीविजन भाषण में, 60 वर्षीय रहमान ने कहा कि कानून-व्यवस्था सुधारना और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री ने कहा, ''हम इस देश को हर नागरिक के लिए सुरक्षित बनाना चाहते हैं। मुसलमान, हिंदू, बौद्ध, ईसाई। चाहे किसी पार्टी, धर्म, मत या जातीयता को मानने वाले हों। चाहे पहाड़ों में हों या मैदानों में-यह देश हम सभी का है।''
उन्होंने इस बात पर जोर दिया, "चाहे आपने बीएनपी को वोट दिया हो या ना दिया हो इस सरकार पर सभी का बराबर अधिकार है। एक बांग्लादेशी के रूप में हम सभी को इस देश में समान अधिकार प्राप्त हैं।" रहमान की यह टिप्पणी इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि अगस्त 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद से बांग्लादेश में हिंदू समुदाय को लगातार निशाना बनाया गया। अगस्त 2024 से मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के शासनकाल में भीड़ हिंसा, अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर हमले बढ़ गए।
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